‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के मुनगा अभियान की गूंज, पोषण को लेकर जनभागीदारी पर जोर

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  • Sep 27, 2026
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महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिल्ली एयरपोर्ट पर सुना प्रधानमंत्री का संबोधन

रायपुर, 27 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ में पोषण जागरूकता को जनभागीदारी से जोड़ने वाला ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान रविवार को राष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 138वें संस्करण में छत्तीसगढ़ की इस पहल का उल्लेख करते हुए मुनगा यानी मोरिंगा को खान-पान में शामिल करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किए जाने की जानकारी दी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम का श्रवण किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के अभियान का उल्लेख प्रदेश के लिए उत्साह और प्रेरणा का विषय है। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, माताओं, स्वसहायता समूहों और पोषण अभियान से जुड़े लोगों को अपने प्रयासों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पोषण के प्रति जागरूकता तभी प्रभावी होगी, जब परिवार अपने दैनिक भोजन में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करेंगे।

12 सितंबर को शुरू हुआ अभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 12 सितंबर को ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत की थी। अभियान का उद्देश्य मुनगा के पौधे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ उसके उपयोग और पोषण संबंधी गुणों के प्रति परिवारों को जागरूक करना है। इसमें महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों को इस संदेश को समुदाय तक पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बनाया गया है।

मुनगा, जिसे सहजन भी कहा जाता है, छत्तीसगढ़ में परिचित और आसानी से उगाया जा सकने वाला पौधा है। इसकी पत्तियों और फलियों का उपयोग भोजन में किया जाता है। मुनगा की पत्तियों में आयरन, कैल्शियम और विटामिन सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। पत्तियों को साग या अन्य स्थानीय व्यंजनों में तथा फलियों को सब्जी और दाल में शामिल किया जा सकता है। इससे परिवार स्थानीय खाद्य संसाधनों का उपयोग करते हुए अपने भोजन में विविधता बढ़ा सकते हैं।

संतुलित आहार और स्थानीय खाद्य पदार्थों पर जोर

अभियान के माध्यम से परिवारों को यह संदेश दिया जा रहा है कि बेहतर पोषण केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं करता, बल्कि अलग-अलग पौष्टिक खाद्य पदार्थों को संतुलित मात्रा में भोजन में शामिल करना महत्वपूर्ण है। मुनगा इसी विविधता का एक हिस्सा बन सकता है। घर या आंगन में लगाया गया पौधा परिवार को उसके नियमित उपयोग के लिए भी प्रेरित करता है।

प्रदेश में चल रहे पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर माताओं और समुदाय के साथ संवाद, स्थानीय खाद्य पदार्थों का प्रदर्शन और संतुलित आहार के प्रति जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान इन गतिविधियों से जुड़कर पोषण का संदेश परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचा रहा है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परिवारों को मुनगा लगाने, उसकी देखभाल करने और उपलब्ध पत्तियों तथा फलियों को भोजन में उपयोग करने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

पौधरोपण, पोषण शिक्षा और जनभागीदारी को जोड़ा

इस पहल में पौधरोपण, पोषण शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया है। अभियान का उद्देश्य कुपोषण के विरुद्ध प्रयासों में परिवार और समुदाय की सक्रिय भूमिका को बढ़ाना है।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ की इस पहल का उल्लेख स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रोत्साहन के रूप में सामने आया है। प्रधानमंत्री के आधिकारिक संबोधन में भी सितंबर को कुपोषण के खिलाफ प्रयासों के लिए समर्पित पोषण माह का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ के ‘हर घर मुनगा-घर-घर मुनगा’ अभियान की जानकारी दी गई।

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