रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के कमांडरों के दूसरे सम्मेलन को किया संबोधित

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  • Sep 30, 2026
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दक्षिण चीन सागर से भूमध्य सागर और अटलांटिक तक भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी ने दिखाई समुद्री क्षमता

नई दिल्ली। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता, पसंदीदा सुरक्षा भागीदार और विश्वास एवं विश्वसनीयता के प्रतीक के रूप में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ती भीड़, छल और संदिग्ध गतिविधियों के बीच भारत को अपनी समुद्री निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को नए स्तर पर ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि समुद्र सुरक्षित होंगे तो भारत सुरक्षित रहेगा और सुरक्षित भारत ही विकसित भारत के संकल्प को और मजबूत करेगा।

राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन-2026 के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए नौसेना की परिचालन क्षमता, समुद्री सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की तैयारियों की समीक्षा की। तीन दिवसीय यह शीर्ष स्तरीय सम्मेलन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहा है।

दक्षिण चीन सागर से अटलांटिक तक भारतीय युद्धपोत

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय युद्धपोतों की मौजूदगी दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर तक फैली हुई है। यह भारत की समुद्री सैन्य क्षमता और रणनीतिक पहुंच को दर्शाती है। उन्होंने सामरिक गहराई और क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन सुनिश्चित करने में नौसेना की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। नौसेना ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की रणनीतिक आधारशिला है। समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के साथ यह आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और शक्ति प्रदर्शन को भी मजबूत करती है। उन्होंने नौसेना से भविष्य के लिए तैयार, युद्ध के लिए तत्पर और विश्व स्तर पर सम्मानित बल के रूप में निरंतर क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया।

होर्मुज में भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही अहम उपलब्धि

पश्चिम एशिया के संकट के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने ‘ऊर्जा सुरक्षा अभियान’ के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, विशेषकर एलपीजी टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 85 से 90 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस का लगभग 50 प्रतिशत समुद्री मार्गों से आयात करता है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और रक्षा तैयारियों से सीधे जुड़ी है।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले युद्धपोत

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में नौसेना के प्रयासों का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना का युद्धपोत उत्पादन तंत्र अब वैश्विक मानकों को पूरा कर रहा है। हाल में शामिल किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को अपनी आवश्यकताएं पूरी करने के साथ मित्र देशों को युद्धपोत निर्यात करने की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा।

बढ़ते समुद्री यातायात और उसकी जटिलता को देखते हुए उन्होंने मौजूदा समुद्री निगरानी प्रणालियों को और मजबूत करने तथा उन्नत विश्लेषणात्मक क्षमताएं विकसित करने पर जोर दिया।

2026 में 18 युद्धपोत शामिल करने की योजना

रक्षा मंत्री ने 2026 को भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक वर्ष बताया। इस वर्ष 18 युद्धपोतों को शामिल या कमीशन किए जाने की योजना है। यह नौसेना के इतिहास में एक वर्ष के दौरान होने वाली सबसे बड़ी सैन्य वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि घरेलू नौसैनिक जहाज निर्माण तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती है, हालांकि भविष्य में क्षमता विस्तार की आवश्यकता बनी रहेगी।

अग्रिम मोर्चे पर महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका

राजनाथ सिंह ने ‘सभी रैंक, सभी भूमिकाएं’ के दृष्टिकोण के तहत महिला सशक्तीकरण, भर्ती और नवाचार के क्षेत्र में नौसेना के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों और विमानों पर महिला अधिकारियों की तैनाती का उल्लेख किया। नाविक सागर परिक्रमा सहित नौसैनिक नौवहन अभियानों में महिलाओं की भागीदारी को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

27 देशों की भागीदारी वाला ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस

रक्षा मंत्री ने संयुक्त समुद्री बलों के अंतर्गत संयुक्त कार्य बल-154 (CTF-154) की कमान संभालने पर भारतीय नौसेना को बधाई दी और इसे क्षेत्रीय सहयोगात्मक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान बताया।

भारत के पास CTF-154 की कमान रहने के दौरान कोच्चि में आयोजित ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस का भी उन्होंने उल्लेख किया। इसमें 27 देशों के 276 कर्मी, 76 प्रशिक्षक एवं विषय-विशेषज्ञ और चार अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हुए।

लोकयान-26 से मजबूत हुई समुद्री कूटनीति

राजनाथ सिंह ने लोकयान-26 के लिए आईएनएस सुदर्शनी की तैनाती की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका, अटलांटिक और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में भारत की समुद्री कूटनीति तथा भारतीय प्रवासियों के साथ जुड़ाव को मजबूती मिली। साथ ही इस अभियान ने भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को भी प्रदर्शित किया।

समुद्र की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा

बदलती चुनौतियों के बीच उच्च स्तर की युद्ध तत्परता बनाए रखने और अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री शक्ति का उद्देश्य केवल समुद्र में राष्ट्रीय ध्वज फहराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जहां भी तिरंगा दिखाई दे, वहां वह सुरक्षा, विश्वास और भरोसे का प्रतीक बने।

उन्होंने नौसेना को सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा, “यदि समुद्र सुरक्षित हैं, तो भारत सुरक्षित होगा; और यदि भारत सुरक्षित है, तो विकसित भारत का संकल्प और भी सुदृढ़ होगा।”

सम्मेलन के दौरान राजनाथ सिंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ से भी बातचीत की। तीन दिवसीय सम्मेलन में भारतीय नौसेना का शीर्ष नेतृत्व प्रचालनगत तैयारियों, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमता विकास से जुड़े विषयों की समीक्षा कर रहा है।

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