नई दिल्ली में 2027 में जुटेगा एशिया का विमानन जगत, ‘रूट्स एशिया’ के लिए भारत तैयार

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  • Sep 29, 2026
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16 से 18 मार्च तक भारत मंडपम में होगा 24वां ‘रूट्स एशिया’, 55 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों समेत 115 से ज्यादा प्रमुख एयरलाइंस की भागीदारी की उम्मीद

 

भारत के बढ़ते विमानन बाजार, नए हवाई मार्गों और टियर-2 शहरों की कनेक्टिविटी पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। भारत में अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र के बड़े आयोजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को नई दिल्ली में ‘रूट्स एशिया 2027’ के कर्टेन रेज़र का अनावरण किया। 24वां ‘रूट्स एशिया’ 16 से 18 मार्च 2027 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा। आयोजन में एशिया और अन्य क्षेत्रों की 115 से अधिक प्रमुख एयरलाइंस, 55 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, हवाई अड्डे, पर्यटन प्राधिकरण और विमानन क्षेत्र के प्रमुख हितधारक शामिल होंगे।

कर्टेन रेज़र कार्यक्रम में 28 दूतावासों के प्रतिनिधियों और विमानन क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। इससे आयोजन के जरिए बनने वाले अंतरराष्ट्रीय संबंधों और सहयोग की संभावनाओं का संकेत मिला।

‘भारत एविएशन राइजिंग’ होगी आयोजन की थीम

नायडू ने ‘रूट्स एशिया 2027’ के लिए भारत का विजन प्रस्तुत करते हुए इसकी थीम “भारत एविएशन राइजिंग: इनक्लूसिव ग्रोथ – कनेक्टिंग एशिया एंड बियांड” बताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि “रूट्स एशिया 2027 सही जगह, सही समय और सही अवसर के साथ आ रहा है।” भारत में अधिक क्षमता, अधिक एयरलाइंस और अधिक हवाई मार्गों के विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।

166 से अधिक हवाई अड्डे, अगले दशक में 100 और विकसित करने की योजना

भारत के विमानन क्षेत्र के विस्तार का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि देश में 166 से अधिक हवाई अड्डे हैं और अगले दशक में 100 और हवाई अड्डे विकसित करने की योजना है। इस विस्तार के साथ देश के विमानन नेटवर्क में नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने ‘हब-एंड-स्पोक’ मॉडल के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे उभरते बाजारों के साथ अधिक शहरों और लोगों को जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे एयरलाइंस, पर्यटन और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे।

मंत्री ने भारत के सक्रिय द्विपक्षीय विमानन संबंधों, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ संबंधों और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में लगातार हो रही वृद्धि का भी उल्लेख किया। अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में यात्रियों की संख्या की सालाना चक्रवृद्धि विकास दर 4.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।

टियर-2 शहरों को नए मार्गों से जोड़ने पर जोर

नायडू ने वैश्विक विमानन समुदाय को ‘रूट्स एशिया 2027’ में भाग लेने और भारत के विविध पर्यटन स्थलों के साथ विमानन क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को समझने का आमंत्रण दिया।

उन्होंने कहा कि टियर-2 शहरों को जोड़ना, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा केंद्रों को मजबूत करना और नए हवाई मार्ग विकसित करना भारत की विमानन क्षमता के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए एयरलाइंस, हवाई अड्डों, पर्यटन संस्थाओं और अन्य संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

चीन से भारत ने संभाली मेजबानी की जिम्मेदारी

अप्रैल 2026 में चीन के शियान में आयोजित ‘रूट्स एशिया 2026’ के समापन समारोह के दौरान भारत ने औपचारिक रूप से चाइना वेस्ट एयरपोर्ट ग्रुप से ‘रूट्स एशिया 2027’ की मेजबानी की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके साथ ही भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को आयोजन की मेजबानी की कमान सौंपी गई।

आगामी आयोजन में 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें प्रमुख एयरलाइंस, हवाई अड्डों और पर्यटन प्राधिकरणों के निर्णय लेने वाले अधिकारी भी शामिल होंगे।

विमानन बनेगा व्यापार और पर्यटन को गति देने का माध्यम

नागर विमानन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोगों को जोड़ने, व्यापार को सुगम बनाने और आर्थिक अवसर पैदा करने में विमानन क्षेत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पर्यटन और व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाना जरूरी है।

उन्होंने भारत के विमानन तंत्र को मजबूत करने में साझेदारियों और नए हवाई मार्गों के विकास को महत्वपूर्ण बताया।

भारत को वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में मजबूत करने का मंच

‘रूट्स एशिया 2027’ भारत को नए साझेदार बनाने, हवाई मार्गों के विस्तार और विमानन एवं कनेक्टिविटी के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने का रणनीतिक मंच उपलब्ध कराएगा। आयोजन के जरिए भारत के बढ़ते विमानन बाजार, पर्यटन क्षमता और नए शहरों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर विमर्श होगा।

यह आयोजन समावेशी विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।

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