थल सेना अध्यक्ष ने संयुक्त भारत-अर्जेंटीना सेना पर्वतारोहण अभियान दल का किया स्वागत

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  • Oct 07, 2026
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35 सदस्यीय संयुक्त दल ने बेहद कठिन हिमालयी परिस्थितियों में हासिल की दोनों चोटियों पर सफलता; थल सेना अध्यक्ष ने नई दिल्ली में किया स्वागत

नई दिल्ली | 6 अक्टूबर 2026

7,756 मीटर ऊंची माउंट कामेट और 7,355 मीटर ऊंची माउंट अबी गामिन पर तिरंगा और अर्जेंटीना का ध्वज फहराने वाले भारत-अर्जेंटीना की सेनाओं के संयुक्त पर्वतारोहण दल का नई दिल्ली में स्वागत हुआ। थल सेना अध्यक्ष (सीओएएस) जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को अभियान दल के सदस्यों से मुलाकात की। दल ने 17 सितंबर को माउंट अबी गामिन और 21 सितंबर 2026 को माउंट कामेट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माउंट कामेट 7,756 मीटर ऊंची है और माउंट कंचनजंगा तथा माउंट नंदा देवी के बाद भारत की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है।

35 सदस्यीय दल में भारत के 25 और अर्जेंटीना के 10 सैनिक

लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी के नेतृत्व में इस अभियान में 35 सदस्य शामिल थे। इनमें भारतीय सेना के 25 और अर्जेंटीना सेना के 10 जवान थे। दल को 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर से रवाना किया गया था।

हिमालय के बेहद कठिन और जोखिमपूर्ण वातावरण में पर्वतारोहियों ने अत्यधिक ठंड, तेज हवाओं, बर्फीले इलाकों, खड़ी चट्टानों और गहरी दरारों यानी क्रेवासेज का सामना किया। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों की तमाम चुनौतियों के बावजूद दल ने दोनों चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।

यह सफलता सैनिकों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, मानसिक दृढ़ता और आपसी तालमेल का प्रदर्शन है।

तीसरा संयुक्त अभियान, पहले एकोनकागुआ और माउंट कुन फतह

भारत और अर्जेंटीना की सेनाओं का यह तीसरा संयुक्त पर्वतारोहण अभियान है। इससे पहले दोनों देशों की सेनाओं ने जनवरी 2025 में अर्जेंटीना के मेंडोज़ा में 6,962 मीटर ऊंची माउंट एकोनकागुआ और अगस्त 2025 में लद्दाख की सुरू घाटी में 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन पर संयुक्त अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया था।

लगातार तीन संयुक्त अभियानों से दोनों सेनाओं के बीच पेशेवर सहयोग, आपसी तालमेल, सौहार्द और विश्वास और मजबूत हुआ है। इन अभियानों ने दोनों देशों के सैनिकों को अत्यधिक ऊंचाई वाले दुर्गम वातावरण में साथ काम करने का व्यावहारिक और महत्वपूर्ण अनुभव भी दिया है।

थल सेना अध्यक्ष द्वारा अभियान दल का स्वागत इसी बढ़ते सैन्य सहयोग और संयुक्त अभियानों में हासिल उपलब्धि के सम्मान के रूप में किया गया।

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