मुख्यमंत्री साय ने की परिवहन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा

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  • Sep 29, 2026
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23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य जारी, ग्रामीण बस सेवा का विस्तार; कोंटा-जगरगुंडा का छह घंटे का सफर घटकर करीब 45 मिनट हुआ

एचएसआरपी, वाहन फिटनेस, ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन और ई-ट्रैक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश

रायपुर, 29 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए अब विभागीय प्रयासों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने परिवहन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा के दौरान ‘जीरो फेटेलिटी’ का लक्ष्य सामने रखते हुए परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग और नगरीय निकायों को मिलकर विस्तृत एवं परिणामोन्मुखी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि हर संभावित जनहानि को रोकना होना चाहिए। इसके लिए दुर्घटना से पहले रोकथाम और दुर्घटना के बाद घायल को तत्काल सहायता तथा उपचार—दोनों व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी है।

सड़क सुरक्षा के हर पहलू पर एक साथ काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित सड़क संरचना, यातायात नियमों का प्रभावी पालन, वाहनों की तकनीकी फिटनेस, प्रशिक्षित चालक और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता जैसे सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा।

उन्होंने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर वहां सुधारात्मक एवं सुरक्षात्मक उपाय प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 23 ब्लैक स्पॉट पर सुधार की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन कार्यों को तेजी से पूरा करने और दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। घायल तक जितनी जल्दी सहायता और चिकित्सा सुविधा पहुंचेगी, उसके जीवन बचने की संभावना उतनी ही बढ़ेगी। इसके लिए दुर्घटना की सूचना, एंबुलेंस की उपलब्धता, नजदीकी अस्पताल तक पहुंच और उपचार के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए नागरिकों को करें जागरूक

मुख्यमंत्री ने पीएम-राहत योजना और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों तक यह संदेश पहुंचना चाहिए कि सड़क दुर्घटना देखकर घबराने के बजाय पीड़ित की मदद के लिए आगे आएं।

बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर सहायता करने वाले नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के संबंध में व्यापक जनजागरूकता दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

दूरस्थ अंचलों में बढ़ेगी बस सेवा

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का विस्तार करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे ग्रामीण, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता से चिन्हित करने को कहा, जहां अभी नियमित सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार तक पहुंच का आधार भी है। किसी दूरस्थ गांव को बस सेवा से जोड़ने का अर्थ वहां के लोगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलना है। शासन का प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश के अंतिम छोर तक सुरक्षित, सुगम और सुलभ सार्वजनिक परिवहन पहुंचे।

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधा से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कराने, नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने और आवश्यकता के अनुसार योजना का विस्तार करने के निर्देश दिए।

कोंटा-जगरगुंडा में छह घंटे का सफर अब 45 मिनट

दुर्गम क्षेत्रों में बस सेवा के प्रभाव का उदाहरण देते हुए बैठक में बताया गया कि कोंटा से जगरगुंडा के बीच पहली बार शुरू हुई बस सेवा से क्षेत्र के नागरिकों का आवागमन आसान हुआ है। पहले अंदरूनी और सुदूर क्षेत्रों से इस यात्रा में करीब छह घंटे लगते थे, जबकि बस सेवा शुरू होने के बाद यही सफर लगभग 45 मिनट में पूरा हो रहा है।

इससे स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी विकास की गति बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है और नियमित बस सेवा लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

पर्यटन स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर

मुख्यमंत्री ने पर्यटन विकास की संभावनाओं को देखते हुए पर्यटन मिशन के साथ परिवहन विभाग की भूमिका प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने को कहा।

उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी और इसका लाभ स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान तथा अन्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को भी मिलेगा।

तकनीक आधारित फिटनेस जांच को मिले मजबूती

मुख्यमंत्री ने वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने के निर्देश दिए। बैठक में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की मौजूदा व्यवस्था और नए केंद्रों की स्थापना पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि वाहनों की तकनीकी स्थिति का निष्पक्ष परीक्षण सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है। तकनीक आधारित व्यवस्था से फिटनेस जांच में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके वाहनों के नियमानुसार नवीनीकरण और फिटनेस संबंधी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

एचएसआरपी और लंबित चालानों की वसूली में तेजी

मुख्यमंत्री ने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाने के अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। निर्धारित प्रावधानों के पालन के साथ वाहन मालिकों की सुविधा का भी ध्यान रखने को कहा गया।

उन्होंने लंबित चालानों की वसूली में तेजी लाने और अत्याधुनिक चालान प्रणाली का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए। यातायात नियमों के पालन के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी जोर दिया गया।

ई-ट्रैक से ड्राइविंग टेस्ट में बढ़ेगी पारदर्शिता

बैठक में ई-ट्रैक व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। इसके तहत सीसीटीवी कैमरों और सेंसर आधारित प्रणाली के माध्यम से कम्प्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। इससे पारदर्शिता बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि आवश्यक प्रशिक्षण और दक्षता रखने वाले लोगों को ही लाइसेंस मिले। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा में प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन

बैठक में राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन नीति तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने और नई तकनीक आधारित परिवहन सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परिवहन विभाग की प्रत्येक व्यवस्था के केंद्र में आम नागरिक की सुरक्षा और सुविधा होनी चाहिए। ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार, सुरक्षित और फिट वाहन, प्रशिक्षित चालक, आधुनिक तकनीक, बेहतर सड़क सुरक्षा प्रबंधन तथा दुर्घटना की स्थिति में तत्काल उपचार—इन सभी मोर्चों पर एक साथ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की परिवहन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो लोगों का सफर न केवल आसान बनाए, बल्कि उसे सुरक्षित भी करे। विभागीय समन्वय, आधुनिक तकनीक और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से छत्तीसगढ़ में सुरक्षित, सुगम और आधुनिक परिवहन तंत्र को लगातार मजबूत किया जाएगा।

बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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