उज्जैन की युवा धर्म संसद में धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों पर मंथन, मुख्यमंत्री मोहन बोले—धर्म का आधार सत्य, करुणा और अनुशासन

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  • Sep 19, 2026
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उज्जैन। उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद-2026 का शनिवार को गीता भवन सभागार में समापन हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में हर कालखंड में वैचारिक मंथन की विशेष परंपरा रही है। युवा धर्म संसद ने युवाओं को धर्म के वास्तविक महत्व, उसके उद्देश्य और जीवन में उसके मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी है।मुख्यमंत्री ने उज्जैन को भारत की सात पवित्र नगरियों में से एक बताते हुए कहा कि इसका एक नाम अवंतिका भी है। अवंतिका का अर्थ ऐसा स्थान है, जिसका कभी अंत नहीं होता। यह कालों के काल बाबा महाकाल की नगरी है। उन्होंने कहा कि समृद्ध भारतीय संस्कृति ने विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

धर्म का आधार सत्य, करुणा और अनुशासन

डॉ. यादव ने कहा कि युवा धर्म संसद के माध्यम से धर्म के मर्म को समझने और उसके वास्तविक उद्देश्य को जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। भारतीय संस्कृति ‘यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे’ के भाव पर आधारित है। धर्म का आधार सत्य, करुणा और अनुशासन है।उन्होंने कहा कि भारतीय संत परंपरा जीवन के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराती है। साधु-संत समाज की विसंगतियों से बचने और दूसरों को भी उनसे बचाने के लिए सचेत करते हैं। धर्म व्यक्ति को विषय-आसक्ति से अनासक्ति की ओर बढ़ने और मोक्ष का मार्ग दिखाता है।

श्रीराम के जीवन से मिलती है संघर्ष और साहस की सीख

देश के विभिन्न प्रांतों से आए संतों और प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने त्रेता युग के राजा दशरथ और महर्षि विश्वामित्र के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र दूरदृष्टि रखते थे और भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण को अपने साथ जंगल में ले गए। उनके माध्यम से मारीच, सुबाहु जैसी अनेक आसुरी शक्तियों का नाश कराकर उस समय धर्म की रक्षा की गई। इसके बाद भगवान श्रीराम ने स्वयंवर में धनुष उठाकर माता जानकी से विवाह किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सिखाता है कि बिना कष्ट के सफलता नहीं मिलती। कठिनाइयों के सामने हिम्मत दिखाने से विजय का मार्ग खुलता है। जीवन में संसाधन सीमित हों, तब भी साहस और आत्मविश्वास के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है। जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं संघर्ष के बाद विजय का अवसर भी बनता है।

राधाष्टमी पर राधा-कृष्ण और मित्रता का संदेश

मुख्यमंत्री ने सभी को राधाष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राधे-राधे का स्मरण भगवान श्रीकृष्ण की याद स्वतः करा देता है। उन्होंने कहा कि राधाजी के जीवन में भी अनेक कष्ट रहे, लेकिन उनका जीवन आस्था और समर्पण की प्रेरणा देता है।उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में मित्र की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि महायुद्ध से पहले भी कौरवों और पांडवों ने राजा द्रुपद के विरुद्ध एक बड़ा युद्ध लड़ा था।

युवाओं को धर्म, संस्कृति और समाज सेवा की दिशा दिखाता है आयोजन

समापन समारोह में आचार्य मिथिलेश नंदिनीशरण महाराज ने अपने पाथेय में कहा कि जो व्यक्ति कृतज्ञ होना जानता है, वही सच्चे अर्थों में मनुष्य है। कृतघ्न व्यक्ति के मानवीय मूल्यों पर प्रश्न उठता है। उन्होंने कहा कि भारत को उसके मूल चरित्र में पुनर्प्रतिष्ठित करने के लिए युवा धर्म संसद जैसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपने धर्म, संस्कृति, देश और समाज की सेवा का मार्गदर्शन मिलता है।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का भी उल्लेख

समापन समारोह में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 महाकुंभ का भी उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने कहा कि सिंहस्थ के नव्य, भव्य और दिव्य आयोजन की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।महाराज ने कहा कि बाबा महाकाल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को देश-दुनिया की ऋषि परंपराओं का स्वागत करने का दायित्व सौंपा है।

प्रस्तुत हुआ युवा धर्म संसद का प्रतिवेदन

सेवा प्रतिष्ठानम के राष्ट्रीय सचिव माधव ने युवा धर्म संसद में शामिल सभी अतिथियों, संतों, प्रबुद्धजनों और युवा शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने तीन दिवसीय आयोजन का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया।तीन दिनों तक चले युवा धर्म संसद में धर्म, भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों, समाज और राष्ट्र के प्रति युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर वैचारिक विमर्श हुआ। समापन के साथ आयोजन ने युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया।

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