मुल्ले में सेंड फिल्टर से जल संरक्षण को बढ़ावा, भूजल पुनर्भरण के साथ ग्रामीणों को मिला रोजगार

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  • Sep 27, 2026
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विकसित भारत जीरामजी योजना के तहत 52 हजार रुपए की लागत से तैयार हुई जल संरक्षण संरचना

धमतरी, 27 सितंबर 2026

सेवा संकल्प अभियान के तहत “जल है तो जीवन है” की भावना को धरातल पर उतारते हुए धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड की ग्राम पंचायत मुल्ले में विकसित भारत जीरामजी योजना के अंतर्गत जल स्रोतों में सेंड फिल्टर निर्माण कराया गया है। यह पहल वर्षा एवं सतही जल के बेहतर प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बनकर सामने आई है।

वर्षा आधारित ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की प्रत्येक बूंद को सहेजना भविष्य की जल सुरक्षा के लिए जरूरी है। इसी उद्देश्य से ग्राम मुल्ले में बारिश के दौरान बहकर निकल जाने वाले पानी को जल स्रोतों तक पहुंचाने और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए सेंड फिल्टर का निर्माण किया गया है।

बहते पानी को सहेजने की पहल

सेंड फिल्टर में रेत सहित प्राकृतिक छनन माध्यमों का उपयोग किया गया है, जो पानी के साथ आने वाली मिट्टी, गाद और अन्य ठोस अशुद्धियों को रोकने में सहायक होते हैं। इससे पानी को अपेक्षाकृत स्वच्छ रूप में जमीन में समाने का अवसर मिलता है और जल स्रोतों के पुनर्भरण की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी छोटी लेकिन उपयोगी जल संरचनाएं स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण की मजबूत नींव तैयार करती हैं। इसका उद्देश्य वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ वर्षा जल को भविष्य की जल संपदा में बदलना भी है।

52 हजार रुपए की लागत से पूरा हुआ निर्माण

ग्राम पंचायत मुल्ले में सेंड फिल्टर निर्माण के लिए 0.52 लाख रुपए यानी 52 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। इसमें 0.11 लाख रुपए मजदूरी और 0.41 लाख रुपए सामग्री के लिए निर्धारित किए गए थे। कार्य पूर्ण होने के बाद कुल 0.52 लाख रुपए व्यय हुए, जिसमें 0.105 लाख रुपए मजदूरी के रूप में खर्च किए गए।

सीमित संसाधनों के प्रभावी उपयोग से तैयार इस संरचना से जल संरक्षण के साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।

जल संरक्षण के साथ ग्रामीणों को मिला रोजगार

सेंड फिल्टर निर्माण में स्थानीय श्रमशक्ति का उपयोग किया गया। इससे गांव के श्रमिकों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिला और स्थानीय स्तर पर आय का साधन उपलब्ध हुआ।

विकसित भारत जीरामजी योजना के तहत इस तरह के कार्य ग्रामीण विकास की उस अवधारणा को मजबूत करते हैं, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, स्थानीय रोजगार और गांव की बुनियादी जरूरतों का समाधान एक साथ किया जाता है। जल संरक्षण संरचना गांव के प्राकृतिक संसाधनों को मजबूत करने के साथ मजदूरी के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा भी देती है।

भूजल पुनर्भरण से कृषि को मिलेगा संबल

ग्राम मुल्ले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। कृषि के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता उत्पादन और किसानों की आय से सीधे जुड़ी है। ऐसे में जल स्रोतों के संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने वाले कार्य आने वाले समय में कृषि गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

सेंड फिल्टर के माध्यम से बारिश के पानी को बहकर व्यर्थ जाने से रोककर उसे जल स्रोतों के जरिए भूजल पुनर्भरण की दिशा में उपयोग करने का प्रयास किया गया है। इससे भविष्य में जल उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की संभावना है। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में ऐसी संरचनाएं स्थानीय जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

जल संरक्षण को लेकर बढ़ रही सामुदायिक समझ

ग्राम मुल्ले में सेंड फिल्टर का निर्माण केवल एक संरचना तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक सोच को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है। ग्रामीण वर्षा जल को तत्काल उपयोग के साथ भविष्य की जरूरत के लिए संरक्षित किए जाने वाले प्राकृतिक संसाधन के रूप में देखने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

गांव स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वर्षा की प्रत्येक बूंद को स्थानीय स्तर पर रोकने, सहेजने और जमीन में उतारने से जल स्रोतों पर दबाव कम करने तथा भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

आज का संरक्षण, कल की जल सुरक्षा

ग्राम मुल्ले में निर्मित सेंड फिल्टर आने वाले समय की जल सुरक्षा की दिशा में एक सार्थक कदम है। इस पहल ने दिखाया है कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर कम लागत वाली जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से भी गांव के प्राकृतिक संसाधनों को सहेजने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा सकता है।

विकसित भारत जीरामजी योजना के माध्यम से जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण रोजगार को एक साथ बढ़ावा देने वाला यह प्रयास गांव को जल सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। यह पहल इस सोच को मजबूत करती है कि जल संरक्षण सरकार और समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। आज सहेजी गई पानी की एक-एक बूंद आने वाले कल में गांव की जीवनरेखा बन सकती है।

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