संतों ने शिविर निरीक्षण कर आयोजकों को दिया आशीष.

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  • Sep 28, 2026
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अयोध्या, 28 सितंबर। 

श्रद्धेय अशोक सिंहल जी की जयंती के उपलक्ष्य में कारसेवकपुरम् में अशोक सिंहल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर के दूसरे दिन बावन जी मंदिर के महंत सहित अन्य संतों ने शिविर का निरीक्षण कर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आयोजकों को आशीष दिया।

बावन जी मंदिर के महंत बैदेही वल्लभशरण जी महाराज, बधाई भवन के महंत राजीव लोचन की महाराज, मौनी जी महाराज किशोरी शरण जी व सीताकांत सदन के ब्रह्मचारी रामानुजाचार्य जी महाराज ने शिविर का निरीक्षण किया और कृत्रिम अंग निर्माण के साथ उन्हें लगाने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस अवसर पर वेद विद्यालय के आचार्यों ने सभी संतों को अंगवस्त्र, राम परिवार चित्र व पुस्तक देकर सम्मानित किया।

एक साथ पैर गंवाने वाली मां-बेटी को मिली नई उम्मीद

निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर के दूसरे दिन सड़क हादसे में एक साथ पैर गंवाने वाली मां-बेटी को उम्मीद की नई रोशनी मिली। रायबरेली निवासी अशोक कुमार के अनुसार उनकी बहन सुरेखा, मां शकुंतला को लेकर स्कूटी पर बड़ी बहन के विवाह का आमंत्रण पत्र देने ननिहाल जा रही थी। घर से कुछ दूरी पर एक तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक दोनों को कुचलते निकल गया। पुलिस ने जनता की मदद से दोनों को अस्पताल में भर्ती कराकर परिवारजनों को सूचना दी।

दुर्घटना के पश्चात जीवन में निराशा का अंधेरा नजर आने लगा। हादसे के चलते बहन का विवाह भी टल गया और एक वर्ष बाद दोबारा तिथि निर्धारित की गई। खेती किसानी के बल पर जीवन यापन करने वाले परिवार के सामने बड़ा संकट था। दो वर्ष पहले किसी ने कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण शिविर की जानकारी दी तो यहां कृत्रिम पैर लगाए गए। सुरेखा के अनुसार, वह अब आराम से चल फिर कर अपने सभी काम करती है। शकुंतला भी खेत पर जाकर काम में परिवार का हाथ बंटाने लगी है। शिविर के दूसरे दिन दोनों ने अपने पैरों की दोबारा जांच कराई।

ट्रेन से हुई घटना ने छीने सपने, नए अंग से होगी उड़ान

बचपन से पुलिस विभाग में भर्ती होकर सेवा का सपना उस समय चूर-चूर हो गया, जब ट्रेन से उतरते समय ममता ने संतुलन खोया। शरीर के बिगड़े संतुलन ने मानों पूरे जीवन का संतुलन बिगाड़ दिया। अब कृत्रिम अंग पाकर एक बार फिर पुलिस अथवा सरकारी सेवा में आने का जज्बा हिलोरें मारने लगा है।

मूल रूप से इटावा निवासी ममता ने बी.एससी करने के बाद परीक्षा की तैयारी की और दिल्ली पुलिस में पद निकलने पर फार्म भर दिया। भर्ती परीक्षा देने के लिए जाते समय दिल्ली निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर धीमी गति से चल रही ट्रेन की बोगी से उतरते समय शरीर का संतुलन बिगड़ गया। घटना में बायां पैर प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खाली जगह में जा फंसा। जब तक ट्रेन पूरी तरह रुकती तब तक जीवन का ही संतुलन बिगड़ चुका था। डॉक्टरों ने घुटने से नीचे पैर काटा पर कुछ दिन बाद गैंग्रीन होने की वजह से घुटने से ऊपर जांघ के नीचे से काटना पड़ा। ममता के पति के अनुसार पत्नी हादसे के बाद अवसाद ग्रस्त होने लगी। लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल से ही जयपुर फुट और वहां से इस शिविर की जानकारी हुई। शिविर के दूसरे दिन अंग प्रत्यारोपण होने के बाद पुनः मन में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

अंग प्रत्यारोपण ने दिया परिवार के साथ खुशी बांटने का उत्साह

गुजरात से मुम्बई जाते समय सैंडिल में साड़ी क्या उलझी मानों जिन्दगी की डोर ही उलझ गई हो। रेलवे प्लेटफॉर्म पर गिरते ही दाहिना पैर ट्रेन के पहिए की चपेट में आ गया। उस समय ऐसा लगा जैसे जिन्दगी में सब कुछ मिट गया हो।

अयोध्या के ही गोसाईगंज निवासी संध्या उस दिन को याद कर सिहर उठती है, जब वह मायके के परिवार के साथ सूरत से मुम्बई जा रही थी। लगभग 16 साल पहले 2010 में स्टेशन पर ट्रेन से उतरते समय सैंडिल में साड़ी उलझ गई। जब तक उलझन छूटती शरीर असंतुलित हुआ और दाहिना पैर पटरी पर आने से ट्रेन के पहिए के नीचे आया और पैर का पंजा कट गया। कुछ दिन बाद चोट ठीक होने बजाए समस्या बढ़ी तो डाक्टरों ने जीवन बचाने के लिए घुटने के नीचे से पैर काट दिया। बकौल संध्या मन में तरह तरह के विचार उठने लगे, बच्चों को गोद ले पाऊंगी, उनके साथ खेल पाऊंगी या नहीं। कुछ दिन बाद अंग प्रत्यारोपण हुआ तो सब कुछ सामान्य लगने लगा। तीन साल पहले यहां नया प्रत्यारोपण कराया। कुछ असुविधा होने पर अब हर साल शिविर में कमी दुरुस्त कराने की सहूलियत मिल गई है और जीवन में खुशी का संचार महसूस होने लगा है।

31 को मिले कृत्रिम अंग, उपकरण व 75 को चश्मे

अशोक सिंहल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित निःशुल्क अंग प्रत्यारोपण शिविर के दूसरे दिन 31 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व आवश्यक उपकरण दिए गए। कुल 75 लोगों को चश्मे वितरित किए गए।

पहले दिन के शिविर में 31 को कृत्रिम अंग, 7 को कैलिपर, 5 को हाथ व  6 को बैसाखियों का वितरण किया गया था। नेत्र परीक्षण कराने वाले कुल 95 लोगों में से 75 को चश्मे वितरित किए गए।

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