शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री नहीं, समाज और राष्ट्र की प्रगति हो: राष्ट्रपति मुर्मु

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  • Sep 23, 2026
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वडोदरा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसका लाभ देश और समाज तक पहुंचे। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और ज्ञान के उद्देश्य पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र तथा समाज के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे देश और समाज की प्रगति के साथ स्वयं उन्हें भी संतोष और उपलब्धि का अनुभव होगा।

राष्ट्रपति मुर्मु ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भाग लिया और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित किया।

बदलते समय में बहुविषयक शिक्षा जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय ने ज्ञान की अनेक धाराओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की परंपरा कायम की है। आज की जटिल समस्याओं का समाधान किसी एक विषय या अध्ययन की धारा तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए बहुविषयक दृष्टिकोण आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसी समस्या को समझने और उसका समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिक की जिज्ञासा, कलाकार की संवेदना, इतिहासकार की दृष्टि, अर्थशास्त्री की समझ और समाजशास्त्री की चेतना—इन सभी की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।

हर पेशे में समाजहित को प्राथमिकता देने का आह्वान

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा को समाज की जरूरतों से जोड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि इंजीनियर ऐसी तकनीक विकसित करें, जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाए। चिकित्सक चिकित्सा को केवल पेशा न मानकर सेवा का माध्यम बनाएं। वैज्ञानिक मानवता के हित में समस्याओं के समाधान खोजें।

उन्होंने कहा कि कलाकार और साहित्यकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज की संवेदनशीलता को समृद्ध करें। उद्यमी केवल धन सृजन तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार और नए अवसर भी पैदा करें। शिक्षक ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करने पर ध्यान दें, जो विरासत और विकास को साथ लेकर चले। वहीं, सार्वजनिक जीवन में आने वाले लोग अपने पद को अधिकार के बजाय उत्तरदायित्व के रूप में देखें।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत ऐसा होना चाहिए, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सभी तक पहुंचें, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग मानव कल्याण के लिए हो और अवसरों की समानता सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग विकसित भारत के निर्माण में किया जाना जरूरी है। ऐसा भारत बनाना लक्ष्य है, जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।

राष्ट्रपति ने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने में विश्वविद्यालयों और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे अपने ज्ञान, प्रतिभा और कौशल का उपयोग देश और समाज की प्रगति के लिए करेंगे।

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