रानी दुर्गावती के दिखाए मार्ग से जनजातियों के विकास का नया अध्याय लिख रही राज्य सरकार : सीएम मोहन

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  • Oct 05, 2026
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रानी दुर्गावती की विरासत के बीच खंडवा को विकास की सौगात, 161 करोड़ से बनेंगे 40 जनजातीय छात्रावास

हरसूद में 490 सीटर कन्या छात्रावास, खालवा में छह सांदीपनि विद्यालय और सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स; 3.54 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21.34 करोड़ का बोनस

 खंडवा5 अक्टूबर। वीरांगना रानी दुर्गावती की 502वीं जयंती पर खंडवा जिले में विकास और जनजातीय कल्याण की योजनाओं का बड़ा खाका सामने आया। हरसूद के ग्राम छनेरा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने करीब 161 करोड़ रुपये की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास, खालवा तहसील में छह सांदीपनि विद्यालय, हरसूद में 490 सीटर नया कन्या छात्रावास, खंडवा में 10 करोड़ रुपये से अधिक की हाइटेक नर्सरी और जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने सहित कई घोषणाएं कीं।

कार्यक्रम में खंडवा सहित बुरहानपुर, बड़वानी, खरगौन, देवास और हरदा के 3 लाख 54 हजार 126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21 करोड़ 34 लाख रुपये से अधिक की बोनस राशि वितरित की गई। खंडवा के 32 हजार 846 संग्राहक भी इसमें शामिल हैं। खंडवा वन मंडल की 56 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से जुड़े 26 हजार 400 से अधिक हितग्राहियों को 4 करोड़ 58 लाख रुपये का काष्ठ लाभांश भी दिया गया।

मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले में करीब 143 करोड़ रुपये की लागत के 18 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें लगभग 48 करोड़ रुपये के विभिन्न हाईस्कूल भवन और छात्रावास, करीब 20 करोड़ रुपये की लागत का खालवा खेल परिसर तथा 68 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से तीन सामुदायिक एवं सांस्कृतिक भवन शामिल हैं।

40 नए छात्रावास, 6 सांदीपनि विद्यालय

हरसूद विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। करवानी उद्वहन सिंचाई परियोजना पर तेजी से काम करने की बात कही गई। राज्य सरकार के पांच साल में सिंचाई का रकबा 100 लाख हेक्टेयर से अधिक करने के लक्ष्य के तहत इस परियोजना को गति दी जाएगी।

जनजातीय क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति से जुड़े विकास कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। खालवा तहसील में छह सांदीपनि विद्यालय बनाए जाएंगे। हरसूद में 490 सीटर कन्या छात्रावास बनेगा।

क्षेत्र के छात्रावासों में सुविधाओं के विस्तार के लिए 34 करोड़ रुपये की लागत से रोटी मेकर मशीनें लगाई जाएंगी। छात्रावासों में वॉटर कूलर और ई-लाइब्रेरी की सुविधा भी विकसित की जाएगी। इसके अलावा करीब 161 करोड़ रुपये की लागत से 40 नए जनजातीय छात्रावास बनाए जाएंगे।

आश्रम स्कूलों के विकास कार्यों के लिए 143 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी। खंडवा में 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हाइटेक नर्सरी बनाई जाएगी। हरसूद सहित खंडवा जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा भी की गई।

रानी दुर्गावती के 52 गढ़ों के वंशज पहली बार सम्मानित

रानी दुर्गावती जयंती समारोह का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष गोंडवाना साम्राज्य के तत्कालीन 52 गढ़ों के राजशासकों के वर्तमान वंशजों का सम्मान रहा। कार्यक्रम में प्रदेश के इतिहास में पहली बार इन राजवंशजों को साफा पहनाकर खड्ग और प्रतीक चिह्न भेंट किए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती ने प्रजा के सुख को अपना धर्म माना। उनका शासन कृषि, जल प्रबंधन और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उनके शासन में गोंड साम्राज्य के हजारों गांव समृद्धि के केंद्र बने।

उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती अदम्य साहस, अटल स्वाभिमान और शक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने जीवनकाल में 52 युद्ध लड़े और 51 में विजय प्राप्त की। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर जनजातीय समाज के कल्याण और विकास का नया अध्याय लिखने की बात भी कही गई।

तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21.34 करोड़ का बोनस

कार्यक्रम में छह जिलों के 3,54,126 तेंदूपत्ता संग्राहकों को 21 करोड़ 34 लाख रुपये से अधिक की बोनस राशि वितरित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों की मेहनत को सम्मान देते हुए सरकार ने प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक 750 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये किया है और शुद्ध लाभ का 75 प्रतिशत बोनस के रूप में दिया जा रहा है।

वनवासियों को उचित मूल्य दिलाने के लिए 32 लघु वनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किए जाने की जानकारी भी दी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब बच्चों की मेडिकल शिक्षा की फीस राज्य सरकार वहन कर रही है। मेधावी विद्यार्थियों को स्कूटी और लैपटॉप तथा शासकीय स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क किताबें और साइकिलें दी गई हैं। प्रदेश में 85 हजार युवाओं को शासकीय पदों पर नौकरी दिए जाने की जानकारी भी दी गई। उन्होंने कहा कि इसी वर्ष राज्य में 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से जनकल्याण और विकास कार्य कराए जाएंगे।

गांव-गांव परिवहन, किसानों को दिन में 10 घंटे बिजली

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के गांव-गांव तक मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। जनजातीय क्षेत्रों को भी इस सेवा का लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में कानून का राज है तथा बालाघाट और मंडला जिलों से नक्सलवाद की समस्या को जड़ से खत्म किया गया है। सभी पंचायतों में ग्रामीण आबादी को नि:शुल्क रजिस्ट्री का लाभ दिए जाने की बात भी कही गई।

किसानों के लिए दिन में 10 घंटे बिजली देने की शुरुआत की जा रही है। कृषक कल्याण वर्ष में बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से अन्नदाताओं को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है।

धार्मिक और स्वास्थ्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओंकारेश्वर धाम को पीएमश्री हेली सेवा से जोड़ा गया है। गरीब और जरूरतमंदों को एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिल रही है। राहवीर योजना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

रानी दुर्गावती से राष्ट्र प्रथम की सीख

मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन राष्ट्र प्रथम, स्वाभिमान, विषम परिस्थितियों में नेतृत्व कौशल, नारी शक्ति के सम्मान, जल संचय तथा जंगल और प्रकृति के संरक्षण की सीख देता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार विरासत से विकास के संकल्प के साथ गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने का काम कर रही है।

52 गढ़ों की विरासत का पुनर्स्मरण

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि रानी दुर्गावती जयंती पर 52 गढ़ों के राजवंशजों का सम्मान इतिहास के पुनर्स्मरण का अवसर है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश में बड़ा बदलाव आया है और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सामने है। उन्होंने रानी दुर्गावती के जीवन पर आधारित स्वलिखित गीत भी प्रस्तुत किया।

जनजातीय कार्य, लोक संपत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि जनजातीय राजवंशों के 52 गढ़ केवल मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी थे। स्वतंत्रता के बाद इन राजवंशों ने देश की एकता के लिए अपने राज्य समर्पित किए। उन्होंने बताया कि जनजातीय युवाओं की शिक्षा और विकास के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है तथा डॉक्टर बनने के लिए जनजातीय युवाओं की फीस पर राज्य सरकार हर वर्ष 90 लाख रुपये खर्च कर रही है।

कार्यक्रम में रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, क्रांतिसूर्य टंट्या मामा और संत सिंगाजी महाराज के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं का मंचन भी हुआ।

5 अक्टूबर 1524 को महोबा में हुआ था जन्म

रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को वर्तमान उत्तर प्रदेश के महोबा में हुआ था। वे गढ़ मंडला राज्य की शासक महारानी थीं और साहस, शौर्य, पराक्रम तथा स्वाभिमान की प्रतीक मानी जाती हैं। उन्होंने गोंडवाना साम्राज्य और राष्ट्र के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए मुगलों से संघर्ष किया और 24 जून 1564 को वर्तमान मध्यप्रदेश के जबलपुर में वीरगति प्राप्त की।

इन राजवंशजों का हुआ सम्मान

समारोह में महेंद्र प्रताप सिंह जूदेव (नर्मदापुरम), महेंद्र शाह (बरहेटा, नरसिंहपुर), डॉ. हेमराज सिंह (जागीरदेवरी, रायसेन), अमरजीत सिंह (उदयपुरा, रायसेन), रंजना सिंह (मदनपुर, नरसिंहपुर), दमयंती सिंह (दियागढ़, जबलपुर), यशवंत सिंह जूदेव (बिलोनिया, नरसिंहपुर), विमलेश ठाकुर (दमोह), राजा वीरेंद्र शाह (देवगढ़, छिंदवाड़ा), डॉ. योगेश्वर सिंह (सिहोरा बघेलगढ़), गरिमा सिंह (मदनपुर), अर्चना सिंह कसदे (उमरिया), अभिजीत शाह (हरदा), ठाकुर (गोटेगांव, नरसिंहपुर) सहित अन्य गढ़ों से आए राजवंशजों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विधायक नारायण पटेल, कंचन तनवे, छाया मौरे, जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेड़े, महापौर अमृत अमर यादव, पूर्व महापौर भावना शाह, कुंवर दिव्यादित्य शाह और अंबाराम कराड़ा सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में तेंदूपत्ता संग्राहक मौजूद रहे।

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