बेमेतरा में ‘खेत बचाओ अभियान-2026’, 90 किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन की दी जानकारी

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  • Oct 26, 2026
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प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने पर जोर

दर्री और पतोरा गांव में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताए फसल सुरक्षा के वैज्ञानिक तरीके

बेमेतरा, 26 अक्टूबर 2026। 

फसलों को कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान से बचाने और किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर ने बेमेतरा जिले में ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा और कृषि विभाग के सहयोग से विकासखंड साजा के ग्राम दर्री तथा विकासखंड बेरला के ग्राम पतोरा में आयोजित इन कार्यक्रमों में कुल 90 किसानों ने हिस्सा लिया।

इनमें 80 पुरुष और 10 महिला किसान शामिल थे। ग्राम दर्री में 48 और ग्राम पतोरा में 42 किसानों ने सहभागिता की। कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को फसलों में कीट एवं रोगों की समय पर पहचान, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों की जानकारी देना था।

वैज्ञानिकों ने बताए फसल सुरक्षा के उपाय

कार्यक्रम में ICAR-NIBSM के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार शर्मा और वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका मीना सहित कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा के विषय विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र कुमार जोशी एवं डोमन सिंह टेकाम तथा कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को मार्गदर्शन दिया। ग्राम दर्री के सरपंच तोरण यादव और ग्राम पतोरा की सरपंच नामिन बाई साहू भी उपस्थित रहीं।

विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कीट और रोगों की समय पर पहचान, समन्वित कीट प्रबंधन (IPM), संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग करने और फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने बताया कि कीटों और रोगों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते वैज्ञानिक उपाय अपनाने से फसल नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

किसान-वैज्ञानिक संवाद में साझा कीं समस्याएं

कार्यक्रम के दौरान आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद में किसानों ने खेती से जुड़ी समस्याओं और चुनौतियों को साझा किया। विशेषज्ञों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक सुझाव दिए और कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, फसलों को नुकसान से बचाने के लिए पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।

प्राकृतिक खेती पर प्रकाशन वितरित

‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस विषय पर आधारित प्रकाशन भी वितरित किया गया। अभियान के माध्यम से फसलों को जैविक एवं अजैविक तनावों से सुरक्षित रखने, कीट एवं रोगों से होने वाली क्षति कम करने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को खेत स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

इन जागरूकता कार्यक्रमों से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा मिला। साथ ही, किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन, फसल सुरक्षा और टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जुड़ी उपयोगी तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई।

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