पूर्णिया में विजयादशमी पर RSS का पथ संचलन, डॉ. कृष्ण गोपाल ने पंच परिवर्तन अपनाने का किया आह्वान

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  • Oct 18, 2026
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कला भवन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ उत्सव का शुभारंभ, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी को जीवन में उतारने पर जोर

पूर्णिया। 

विजयादशमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में पूर्णिया जिला मुख्यालय में पथ संचलन का आयोजन किया गया। सीमांचल के प्रमुख केंद्र पूर्णिया में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया। सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने विजयादशमी के महत्व को रेखांकित करते हुए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक मूल्यों, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ उत्सव का शुभारंभ

पूर्णिया शहर स्थित कला भवन में सुबह 8 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विजयादशमी उत्सव की शुरुआत हुई। इस दौरान मंच पर उपस्थित संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, विभाग संघचालक ठाकुर रामनारायण सिंह और जिला संघचालक डॉ. एच.एन. राय ने भारत माता, संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और श्री गुरुजी के चित्रों पर माल्यार्पण किया।

सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है विजयादशमी

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि विजयादशमी केवल भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और आसुरी शक्तियों पर दैवीय शक्तियों की विजय का शाश्वत संदेश भी देती है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। संघ का प्रमुख उद्देश्य भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाना है।

पंच परिवर्तन से समाज में सकारात्मक बदलाव का आह्वान

सह सरकार्यवाह ने पंच परिवर्तन की पहलों को समाज और व्यक्तिगत जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने इसके प्रमुख आयामों को रेखांकित करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर एक सशक्त एवं एकजुट समाज का निर्माण किया जाना चाहिए।

पर्यावरण संरक्षण के संबंध में उन्होंने प्रत्येक नागरिक से पौधारोपण और जल संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की। कुटुंब प्रबोधन के तहत पारिवारिक मूल्यों को सहेजने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति तथा नैतिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने स्वदेशी को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए स्थानीय उद्योगों और कारीगरों के उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही। साथ ही प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्र प्रथम की भावना विकसित करने और नागरिक कर्तव्यों को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।

पुष्पवर्षा कर नागरिकों ने किया स्वयंसेवकों का स्वागत

बौद्धिक कार्यक्रम और संघ प्रार्थना के बाद पथ संचलन निकाला गया। निर्धारित मार्ग पर स्वयंसेवकों का स्वागत करने के लिए शहर के नागरिकों में उत्साह दिखाई दिया। लोग अपने घरों की छतों, बालकनियों और सड़क किनारे खड़े होकर संचलन देख रहे थे।

इस दौरान विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा स्थानीय निवासियों ने स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।

 

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