समृद्ध भारत के साथ विश्व शांति और मानव कल्याण का संकल्प: राजनाथ सिंह

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  • Oct 21, 2026
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38 देशों से मुक्त व्यापार समझौते, रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये और स्टार्टअप 2.5 लाख पार; भारतीय समुदाय को बताया बदलते भारत की ताकत


दुशान्बे, 20 अक्टूबर 2026। भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक महाशक्ति बनना नहीं, बल्कि समृद्धि, ज्ञान और सामर्थ्य के साथ विश्व शांति तथा मानवता के कल्याण में भी योगदान देना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक बदलाव, सुधारोन्मुखी शासन, तकनीकी प्रगति और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका इस लक्ष्य को साकार करने का रास्ता तैयार कर रही है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विकास के साथ वैश्विक शांति और मानव कल्याण को भी समान महत्व देता है।
वैश्विक विकास में भारत की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक
रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास में भारत का योगदान 16 प्रतिशत से अधिक है और देश करीब 7.8 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है, जबकि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं मंदी का सामना कर रही हैं। बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत ने 38 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे भारतीय निर्माताओं और उत्पादकों के लिए नए बाजार खुले हैं। भारत-ब्रिटेन और भारत-यूरोपीय संघ के व्यापार समझौतों से इन बाजारों में भारतीय निर्यात पर शुल्क में 99 प्रतिशत तक की कमी आने की उम्मीद है। इससे निर्यात के अवसर बढ़ने और वैश्विक आर्थिक साझेदारियां मजबूत होने की संभावना है।
नीतिगत निष्क्रियता से सुधारों की तेज रफ्तार तक
राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत शासन और नीति-निर्माण के क्षेत्र में बड़े बदलावों से गुजरा है। देश नीतिगत निष्क्रियता के दौर से निकलकर स्पष्ट दिशा और तेज सुधारों के रास्ते पर आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए सुधार केवल मजबूरी नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास का विषय हैं। उन्होंने बताया कि 12-13 वर्ष पहले सकल घरेलू उत्पाद के चार प्रतिशत से अधिक रहा चालू खाता घाटा पिछले वित्त वर्ष में घटकर 0.61 प्रतिशत रह गया। देश का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक हो गया है और बैंकिंग प्रणाली अब तक की सबसे मजबूत स्थिति में है।
रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़, निर्यात 38,424 करोड़ रुपये
रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा विनिर्माण में भारत की क्षमता लगातार बढ़ी है। देश का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने स्टार्टअप क्षेत्र की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि 2014 से पहले इनकी संख्या कुछ सौ तक सीमित थी, जो अब 2.5 लाख से अधिक हो गई है। इनमें लगभग आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से हैं तथा 45 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार है। सस्ता मोबाइल डेटा और बेहतर संपर्क व्यवस्था नवाचार को बढ़ावा देने के साथ नई प्रतिभाओं के लिए अवसर बढ़ा रही है।
25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, सरकारी सहायता सीधे खातों में
समावेशी विकास का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने जनधन-आधार-मोबाइल व्यवस्था और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे भ्रष्टाचार कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 75 से बढ़कर 300 गीगावाट
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2014 के लगभग 75 गीगावाट से बढ़कर अब करीब 300 गीगावाट हो गई है। सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से देश चिप विनिर्माण में भी आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जहाजों से लेकर सेमीकंडक्टर चिप्स तक के उत्पादन की दिशा में बढ़ते कदम रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की स्थिति मजबूत कर रहे हैं।
यूपीआई लेन-देन का मूल्य 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा
डिजिटल बदलाव का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत वास्तविक समय में डिजिटल लेन-देन के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है। उनके अनुसार, यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेन-देन का मूल्य 2016-17 के 7,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। इससे लेन-देन आसान हुआ है और नकदी तथा कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। उन्होंने रेलवे, सड़कों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और ब्रॉडबैंड संपर्क के विस्तार को भी विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
चंद्रयान से आदित्य-एल1 तक, अंतरिक्ष में बढ़ते कदम
विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए सिंह ने चंद्रयान और आदित्य-एल1 मिशन की सफलताओं को रेखांकित किया। उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की तैयारियों में हो रही प्रगति पर भी विश्वास जताया।
प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के साथ मजबूत और सकारात्मक संबंध बनाने में दुनिया के अनेक देश रुचि रखते हैं। विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोग सांस्कृतिक राजदूत के रूप में भारतीय मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ उन देशों के विकास में भी योगदान देते हैं, जहां वे रहते हैं। उन्होंने भारत और ताजिकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय गीतों, संगीत, साहित्य और सिनेमा की ताजिकिस्तान में लोकप्रियता ने दोनों देशों के लोगों के बीच निकटता बढ़ाई है। भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण सेतु है।
प्रो. हबीबुलो रजाबोव का सम्मान
कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने प्रख्यात भारतीय अध्ययन विशेषज्ञ और ताजिकिस्तान के पहले पद्मश्री सम्मानित प्रो. हबीबुलो रजाबोव को सम्मानित किया। उन्होंने हिंदी साहित्य, शिक्षा और विशेष रूप से भाषा विज्ञान के गहन अध्ययन में उनके योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में भारत और ताजिकिस्तान के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं।

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