नौसेना को मिलेंगे 8 अत्याधुनिक युद्धपोत, 53,866 करोड़ से मजबूत होगी समुद्री ताकत

  • Admin
  • Nov 02, 2026
  • 7,846 views

जीआरएसई बनाएगा पांच और गोवा शिपयार्ड तीन नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट

 अगले दशक में शिपयार्डों और सहायक उद्योगों में 532 लाख व्यक्ति-दिवस रोजगार का अनुमान

 

नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026। भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता और स्वदेशी रक्षा निर्माण को नई मजबूती मिलने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट के निर्माण हेतु गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) के साथ कुल 53,866.50 करोड़ रुपये के अनुबंध किए हैं। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर हुए।


जीआरएसई को पांच, गोवा शिपयार्ड को तीन युद्धपोत
अनुबंध के अनुसार, जीआरएसई पांच और जीएसएल तीन नेक्स्ट जेनरेशन कोरवेट का निर्माण करेगा। यह भारतीय युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पहली बार ऐसी परियोजना शुरू की जा रही है, जिसमें जहाजों का डिजाइन भारतीय नौसेना स्वयं करेगी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से चुने गए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम उनका निर्माण करेंगे। इससे स्वदेशी डिजाइन और निर्माण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।


तीनों क्षेत्रों में दुश्मन से निपटने में सक्षम होंगे
अत्याधुनिक मिसाइलों, हथियार प्रणालियों और सेंसर से लैस ये युद्धपोत वायु, सतह और जलमग्न—तीनों क्षेत्रों में अभियान संचालित करने में सक्षम होंगे। इनके नौसेना में शामिल होने से समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, सतह और पनडुब्बियों से होने वाले संभावित हमलों का मुकाबला करने तथा तटीय रक्षा को मजबूती मिलेगी। ये जहाज तटीय युद्ध अभियानों, समुद्री निगरानी और क्षेत्र में नौसैनिक उपस्थिति बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
532 लाख व्यक्ति-दिवस रोजगार का अनुमान
परियोजना से देश के स्वदेशी जहाज निर्माण तंत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इसमें रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ निजी शिपयार्ड, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य भारतीय औद्योगिक भागीदारों की भागीदारी बढ़ेगी। अगले दस वर्षों में जहाज निर्माण करने वाले शिपयार्डों में लगभग 72 लाख व्यक्ति-दिवस और सहायक उद्योगों तथा एमएसएमई में 460 लाख व्यक्ति-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इस तरह कुल 532 लाख व्यक्ति-दिवस रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
स्वदेशी तकनीक और उपकरणों को मिलेगा बढ़ावा
परियोजना में भारत में निर्मित सामग्री और उपकरणों के साथ स्वदेशी तकनीक तथा भारतीय कौशल और विशेषज्ञता के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे रक्षा उत्पादन में घरेलू उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में मदद मिलेगी। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया के तहत स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।

सम्बन्धित खबरें