भारत बनेगा वैश्विक कृषि अनुसंधान का केंद्र, दिल्ली में जुटेंगे 5 हजार से अधिक प्रतिनिधि

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  • Oct 30, 2026
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12 से 17 अप्रैल 2027 तक होगा आईसीएआर-सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह

 100 से अधिक देशों में काम कर रहे 15 अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्रों की भागीदारी

 कृषि नवाचारों को दुनिया तक पहुंचाने पर रहेगा जोर


नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026
खाद्यान्न की कमी और आयात पर निर्भरता से निकलकर दुनिया के प्रमुख खाद्य उत्पादक एवं निर्यातक देशों में शामिल हुआ भारत अब वैश्विक कृषि अनुसंधान और नवाचारों को नई दिशा देने की तैयारी में है। इसी कड़ी में भारत 12 से 17 अप्रैल 2027 तक नई दिल्ली में आईसीएआर-सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह की मेजबानी करेगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में दुनिया भर से 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें वैज्ञानिकों, किसानों, सरकारों के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप और व्यावसायिक संस्थानों को एक मंच पर लाकर कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों, नए अनुसंधानों और वैश्विक साझेदारियों पर मंथन किया जाएगा।
इस आयोजन की घोषणा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सीजीआईएआर ने 30 अक्टूबर को नई दिल्ली में की। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के अंतर्गत आईसीएआर और सीजीआईएआर संयुक्त रूप से करेंगे। इसका उद्देश्य उन कृषि नवाचारों को पहचानना है, जो पहले से किसानों तक पहुंच रहे हैं, साथ ही यह तय करना है कि इनका लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए किन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत है।

पांच दशक पुरानी साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि भारत और सीजीआईएआर की साझेदारी पांच दशकों से अधिक पुरानी है। इस सहयोग ने देश में कृषि अनुसंधान एवं विकास को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीजीआईएआर एक अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान साझेदारी है, जिसके 15 अनुसंधान केंद्र 100 से अधिक देशों में काम कर रहे हैं। भारत में इसके 10 अनुसंधान केंद्र फसल, जल, पशुधन, मत्स्य पालन, पोषण और नीतिगत विषयों पर अनुसंधान कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आईसीएआर दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक का नेतृत्व करता है। भारतीय वैज्ञानिक पांच दशकों से भी अधिक समय से सीजीआईएआर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस साझेदारी ने फसल सुधार, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों का आधार तैयार किया है।

हरित क्रांति से खाद्य निर्यातक देश बनने तक का सफर
डॉ. जाट ने कहा कि हरित क्रांति के बाद भारतीय कृषि में आए बदलावों में सीआईएमएमवाईटी, आईआरआरआई और आईसीआरआईएसएटी जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इनके साथ साझेदारी ने भारत की खाद्य उत्पादन क्षमता को मजबूत किया। कभी खाद्यान्न की कमी और आयात पर निर्भर रहने वाला भारत आज प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश बन चुका है।
उन्होंने कहा कि सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह 2027 अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के साथ वैज्ञानिक ज्ञान, प्रौद्योगिकियों और कृषि की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगा। भारत की प्राथमिकता दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना और अपने सफल कृषि नवाचारों को विशेष रूप से अफ्रीका सहित अल्पविकसित देशों तक पहुंचाना होगी।

मूंगफली की भारतीय किस्मों का अफ्रीकी देशों में भी लाभ
भारतीय कृषि अनुसंधान का प्रभाव अब देश की सीमाओं से बाहर भी दिखाई दे रहा है। अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) द्वारा संरक्षित और साझा किए गए भारत के मूंगफली के एक नमूने ने ऐसी किस्मों के विकास में योगदान दिया है, जिनकी खेती अब मलावी, युगांडा, मोजाम्बिक और जाम्बिया में हो रही है।
हैदराबाद स्थित कृषि में दक्षिण-दक्षिण सहयोग उत्कृष्टता केंद्र भी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ भारत के सफल कृषि नवाचारों को साझा कर रहा है। आयोजन के माध्यम से इस सहयोग को और व्यापक बनाने की योजना है।

जलवायु अनुकूल खेती से एग्रीस्टैक तक भारतीय अनुभव होंगे साझा
डॉ. जाट ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि एवं एग्रीस्टैक, कृषि मशीनीकरण, मोटे अनाज (श्री अन्न), प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। आयोजन में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला से जुड़ी उभरती चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होगी।
इनमें जलवायु अनुकूलता, जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, स्टार्टअप, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा कृषि विज्ञान एवं नवाचारों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाने में मीडिया की भूमिका प्रमुख रहेगी।

अगले 50 वर्षों की कृषि साझेदारी का रोडमैप बनेगा
सीजीआईएआर की कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. इस्माहेन एलौफ़ी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य भारत और सीजीआईएआर की दीर्घकालिक साझेदारी की उपलब्धियों को सामने लाने के साथ कृषि सहयोग के अगले 50 वर्षों की कार्ययोजना तैयार करना है। भारत ने साबित किया है कि मजबूत राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान प्रणाली बड़े पैमाने पर बदलाव ला सकती है। भारत के बीज और कृषि ज्ञान पहले से ही एशिया और अफ्रीका के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अप्रैल 2027 का आयोजन इस आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का अवसर होगा, जहां विज्ञान मानव कल्याण और खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने में अधिक योगदान दे सकता है। उन्होंने मानव कल्याण तथा खाद्य सुरक्षा में वैज्ञानिकों के योगदान को मान्यता देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. एलौफ़ी ने अप्रैल 2025 में केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित सीजीआईएआर विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह के पहले संस्करण की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत में होने वाला दूसरा संस्करण वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करेगा और कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के समाधान तैयार करने के लिए विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाएगा।

विज्ञान और तकनीक से बदली भारतीय कृषि की तस्वीर
आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि खाद्यान्न की कमी वाले देश से प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक बनने तक भारत की कृषि यात्रा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की परिवर्तनकारी क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से भारत अपनी कृषि उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखेगा, अपने नवाचार साझा करेगा और कृषि एवं खाद्य प्रणालियों की नई चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए वैश्विक अनुभवों से सीखेगा।सीजीआईएआर का पहला विज्ञान एवं साझेदारी सप्ताह अप्रैल 2025 में नैरोबी में आयोजित हुआ था। इसी दौरान सीजीआईएआर ने अपना वर्तमान अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किया था। नई दिल्ली में होने वाला दूसरा संस्करण वैज्ञानिक अनुसंधान को जमीन पर प्रभावी परिणामों में बदलने और साझेदारियों के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगा।
विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में कृषि अनुसंधान की भूमिका
नई दिल्ली में होने वाले इस आयोजन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि अनुसंधान और नवाचारों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और इसमें शामिल होने वाले वक्ताओं की घोषणा आने वाले महीनों में की जाएगी।

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