आध्यात्मिक जागृति से विश्व नवीनीकरण और राष्ट्र निर्माण का संदेश, राष्ट्रपति मुर्मु ने वडोदरा में ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस का किया उद्घाटन

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  • Sep 24, 2026
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वडोदरा, 23 सितंबर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को गुजरात के वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज के ‘विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागरण’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया और ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ब्रह्माकुमारीज नडियाद के ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का भी वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज आवश्यकता केवल आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि मानवीय विकास की भी है। ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो केवल बुद्धि का विकास न करे, बल्कि विवेक को भी जागृत करे। प्रगति ऐसी हो जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हो और शक्ति का अर्थ दूसरों पर नियंत्रण नहीं, बल्कि स्वयं पर नियंत्रण करना हो। उन्होंने कहा कि ऐसी आध्यात्मिकता की आवश्यकता है जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़े।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता है कि ब्रह्माकुमारीज संस्था ने ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत परिवर्तन तथा विश्व नवीनीकरण का संदेश भारत के साथ-साथ दुनिया के अनेक देशों तक पहुंचाया है।

व्यक्ति के बदलाव से समाज में आता है सकारात्मक परिवर्तन

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर परिवर्तन की संभावना मौजूद रहती है। यदि किसी व्यक्ति में यह विश्वास जागता है कि अपने विचारों और कर्मों में बदलाव लाकर वह अपना जीवन बदल सकता है और उसके जीवन में आशा तथा आत्मसम्मान लौटता है, तो वह परिवर्तन केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। वह पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शुभारंभ के बाद ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ ऐसा स्थान बनेगा, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक-दूसरे से शांति और सद्भाव के साथ जुड़ सकेंगे।

युवाओं की आंतरिक शक्ति राष्ट्र निर्माण की आधारशिला

राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मस्थली नडियाद में ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का वर्चुअल रूप से शुभारंभ किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तो उसका प्रभाव परिवार से लेकर कार्यस्थल, समुदाय और अंततः पूरे राष्ट्र तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि ‘आंतरिक शक्ति का जागरण’ केवल व्यक्तिगत विकास का संदेश नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक गहरी प्रक्रिया है। युवाओं को सशक्त बनाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्हें आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

आत्म-परिवर्तन से विकसित भारत की दिशा

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में आत्म-परिवर्तन को समाज परिवर्तन का आधार माना गया है। आज आवश्यकता इस महान विरासत को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के साथ जोड़ने की है। भारत का लक्ष्य ऐसा राष्ट्र बनाना होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध, वैज्ञानिक रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो।

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