धमतरी में ‘प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी’ से संवरेगी ग्रामीण महिलाओं की आजीविका

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  • Oct 17, 2026
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पहले चरण में 100 महिला पशु उद्यमियों की इकाइयां होंगी स्थापित, अगले वित्तीय वर्ष में 500 और इकाइयां शुरू करने का लक्ष्य

धमतरी, 17 अक्टूबर 2026।

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए धमतरी जिले में ‘प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी’ की शुरुआत की जा रही है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित इस पहल के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पशु उद्यमी के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के प्रथम चरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 100 महिला पशु उद्यमियों की इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2027-28 में 500 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है। इस तरह दो चरणों में कुल 600 महिला पशु उद्यमी इकाइयों के विकास की योजना बनाई गई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा के निर्देशन में इस पहल को आगे बढ़ाया जाएगा।

कृषि के साथ पशुपालन बनेगा आय का अतिरिक्त जरिया

धमतरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार कृषि और मौसमी मजदूरी पर निर्भर हैं। धान की एक प्रमुख फसल पर निर्भरता, सीमित रोजगार अवसर तथा मौसम और बाजार की अनिश्चितताओं के कारण कई परिवारों को सालभर नियमित आय बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बकरीपालन, देशी मुर्गीपालन और डेयरी जैसे व्यवसाय ग्रामीण परिवारों के लिए आय के वैकल्पिक और टिकाऊ साधन बन सकते हैं।

प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी के माध्यम से स्थानीय संसाधनों पर आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है।

दो चरणों में विकसित होंगी 600 महिला उद्यमी इकाइयां

यह परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करेगी। इसमें विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के साथ अभिसरण की भी परिकल्पना की गई है।

पहले चरण में जिले के चयनित संकुलों में 100 महिला पशु उद्यमियों की इकाइयां पायलट परियोजना के रूप में स्थापित होंगी। इस चरण से प्राप्त अनुभवों और सफल क्रियान्वयन के आधार पर अगले वित्तीय वर्ष में 500 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इस क्रमिक विस्तार से परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने और महिला उद्यमियों को व्यवस्थित आजीविका गतिविधियों से जोड़ने में मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक पशुपालन और बाजार से जुड़ाव पर विशेष जोर

परियोजना के तहत महिलाओं को उन्नत एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से बकरीपालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। देशी मुर्गीपालन को भी आजीविका के एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुओं के उचित पोषण, नियमित टीकाकरण, बीमा और स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पशुधन सुरक्षित रहे और उद्यम आर्थिक रूप से व्यवहार्य बन सकें।

पशुपालन से प्राप्त गोबर और अन्य जैविक संसाधनों से खाद तैयार करने, उसके संग्रहण और विक्रय को भी प्रोत्साहित करने की योजना है। इससे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और महिलाओं को आय के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे।

उत्पादों के विपणन के लिए बायबैक व्यवस्था के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के विक्रय में सुविधा मिलने और आजीविका गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

आत्मनिर्भर महिलाओं से सशक्त परिवार और समृद्ध गांव का लक्ष्य

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा के निर्देशन में परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी और आजीविका गतिविधियों की निरंतरता पर ध्यान दिया जाएगा। महिलाओं को पशुपालन संबंधी जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के माध्यम से व्यवस्थित उद्यम संचालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी का उद्देश्य महिलाओं को आय अर्जित करने के अवसर देने के साथ आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। सफल क्रियान्वयन से ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोतों में विविधता लाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और महिला उद्यमिता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। सेवा संकल्प अभियान की भावना के अनुरूप यह पहल आत्मनिर्भर महिलाओं, सशक्त परिवारों और समृद्ध गांवों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

लेख: शशिरत्न पाराशर, उप संचालक

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