गौतम ऋषि पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल, 15 से अधिक गांवों को मिलेगा लाभ

  • Admin
  • Oct 16, 2026
  • 14,797 views

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ग्रामीणों से किया संवाद, सड़क-पुल निर्माण और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर

धमतरी, 16 अक्टूबर 2026।

सेवा संकल्प अभियान के तहत धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में पर्यटन विकास और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नगरी विकासखंड के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत मांदागिरी स्थित प्राचीन गौतम ऋषि पहाड़ का भ्रमण किया। उन्होंने पहाड़ पर पूजा-अर्चना कर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विकास, सड़क-पुल निर्माण से आवागमन सुगम बनाने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई।

भ्रमण के दौरान वनमंडलाधिकारी कृष्णा जाधव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

पहाड़ की चढ़ाई के दौरान ग्रामीण महिलाओं से किया संवाद

गौतम ऋषि पहाड़ की ओर जाते समय कलेक्टर ने ग्रामीण महिलाओं से मुलाकात कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी ली। उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि मिलने, आंगनबाड़ी केंद्रों की सेवाओं और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन की उपलब्धता के संबंध में पूछताछ की।

इस दौरान महिलाओं ने सोंढुर नदी पर पुल निर्माण की मांग रखी। उन्होंने बताया कि पुल बनने से नदी पार करने और आसपास के गांवों तक आने-जाने में सुविधा होगी। कलेक्टर ने ग्रामीणों की समस्याएं और सुझाव सुनते हुए क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप बुनियादी सुविधाओं के विकास पर चर्चा की।

12 किलोमीटर का इको-ट्रैकिंग मार्ग और 55 किलोमीटर सड़क बनाने का प्रस्ताव

जय गौतम ऋषि सेवा समिति, मांदागिरी ने गौतम ऋषि पहाड़ को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए जिला प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव सौंपा। समिति के अध्यक्ष मंगल सिंह नाग ने बताया कि गंगरेल डुबान क्षेत्र और दुर्गम वनांचल के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने की पहल से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने क्षेत्र के समग्र विकास की रूपरेखा तैयार की है।

प्रस्ताव में गौतम ऋषि पहाड़ तक लगभग 12 किलोमीटर लंबे इको-ट्रैकिंग मार्ग के विकास और पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही नगरी-करका-मांदागिरी से मेचका तक लगभग 55 किलोमीटर लंबी बारहमासी सड़क बनाने तथा सोंढुर और आमकड़ा नदी पर उच्चस्तरीय पुल-पुलियों के निर्माण का सुझाव दिया गया है।

समिति के अनुसार, इन सुविधाओं के विकसित होने से 15 से अधिक गांवों के लोगों को लाभ मिल सकता है। वर्तमान में सड़क और पुलों की कमी के कारण बारिश के मौसम में जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होता है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी होती है।

पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय आदिवासी युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे और अन्य पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

सड़क उन्नयन के कार्यों से आवागमन होगा सुगम

कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए सड़क उन्नयन के कार्य कराए जा रहे हैं। इनमें मेचका क्षेत्र में नहर नाली से खुडुमुड़ा तालाब तक मिट्टी-मुरुम सड़क का उन्नयन तथा रिसगांव क्षेत्र में सोंढुर नदी से गादुलबाहरा-3 सीमा तक मिट्टी-मुरुम सड़क का उन्नयन शामिल है।

उन्होंने गौतम ऋषि पहाड़ को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने और क्षेत्र की विशेषताओं के अनुरूप सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक पहल करने की बात कही। कलेक्टर ने पहाड़ से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन भी किया।

माहुल पत्ता संग्रहण और रेशम कीट पालन का किया निरीक्षण

भ्रमण के दौरान कलेक्टर और अधिकारियों की टीम बाइक से दुर्गम क्षेत्र में पहुंची। उन्होंने मांदागिरी स्थित गौतम ऋषि से संबंधित केंद्र और आसपास की गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान माहुल पत्ता संग्रहण तथा रेशम कीट पालन से जुड़ी गतिविधियों का निरीक्षण कर इनके माध्यम से ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने की संभावनाओं की जानकारी ली। इस अवसर पर ग्रामीण मौसमी मानचित्र कुटिया का शुभारंभ भी किया गया।

वनांचल में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय परंपराओं और पारंपरिक कौशल को आजीविका के अवसरों से जोड़ना क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पर्यटन के साथ माहुल पत्ता संग्रहण और रेशम कीट पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण परिवारों की आय के स्रोतों का विस्तार हो सकता है।

जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए बुनियादी सुविधाओं का विकास करना, आवागमन सुगम बनाना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से वनांचल में विकास एवं रोजगार की नई संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।

सम्बन्धित खबरें