आस्था और एकता का महापर्व है कुंभ, युवा पीढ़ी को भारत की विरासत से जोड़ने का अवसर बनेगा सिंहस्थ: राष्ट्रपति मुर्मु

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  • Nov 01, 2026
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नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ-2027 के ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह 

 

नासिक । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कुंभ मेलों में असंख्य श्रद्धालुओं का एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता और परंपराओं की निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। ये आयोजन केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और देश की समृद्ध विरासत के प्रतीक भी हैं। 

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ-2027 हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ने के साथ युवा पीढ़ी को भारत की महान संस्कृति और जीवन-मूल्यों से परिचित कराने का अवसर बनेगा। राष्ट्रपति 31 अक्टूबर को महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वज-स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुईं। उन्होंने इस अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम को भी संबोधित किया।

चार प्रमुख तीर्थस्थलों पर सदियों से हो रहे कुंभ आयोजन

राष्ट्रपति ने कहा कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ की परंपरा जितनी प्राचीन है, उतनी ही समृद्ध भी है। हरिद्वार में गंगा तट, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम, उज्जैन में शिप्रा नदी और नासिक में गोदावरी के तट पर आयोजित होने वाले कुंभ समागम पूरी दुनिया में विख्यात हैं। सदियों से इन आयोजनों का निरंतर होते रहना भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परंपराओं की शक्ति का प्रमाण है। इन मेलों में देश-दुनिया से लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं का जुटना सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को सशक्त करता है।

आस्था के साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश

मुर्मु ने कहा कि कुंभ मेले आस्था और सामाजिक समरसता के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सिंहस्थ महाकुंभ-2027 हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा। यह आयोजन नई पीढ़ी को भारत की महान परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन-दृष्टि से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हो सकता है।

सूखे से प्रभावित किसानों की मदद के लिए सरकारें प्रयासरत

राष्ट्रपति ने बदलती मौसमी परिस्थितियों और पर्यावरणीय चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया के अनेक हिस्सों में अत्यंत प्रतिकूल मौसम के कारण लोगों को कई संकटों का सामना करना पड़ रहा है। भारत में भी महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें विशेष रूप से किसान भाई-बहन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें इन कठिनाइयों से निपटने तथा प्रभावित नागरिकों, खासकर किसानों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं।

स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में मिसाल बने महाकुंभ

राष्ट्रपति ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए सभी देशवासियों से व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नासिक महाकुंभ के दौरान मेला प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था और जनभागीदारी से स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे। उनके अनुसार, इतने बड़े धार्मिक आयोजन को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना प्रशासन के साथ-साथ प्रत्येक श्रद्धालु की भी जिम्मेदारी है।

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