माता रुक्मिणी आश्रम की समस्याओं के निराकरण के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश

  • Admin
  • Oct 26, 2026
  • 11,083 views

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने पद्मश्री धर्मपाल सैनी से की मुलाकात, शिक्षकों के रिक्त पदों और लंबित स्वीकृतियों पर हुई चर्चा

जगदलपुर, 26 अक्टूबर 2026। 

छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने बस्तर प्रवास के दौरान डिमरापाल स्थित माता रुक्मिणी आश्रम पहुंचकर संस्थान के संचालक पद्मश्री धर्मपाल सैनी से मुलाकात की। इस दौरान आश्रम की संचालन व्यवस्था, जनजातीय बच्चों की शिक्षा, खेल प्रतिभाओं के विकास, संस्थागत आवश्यकताओं और नवाचार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

वर्ष 1976 से बस्तर अंचल में शिक्षा, खेल और जनजातीय कल्याण के क्षेत्र में योगदान दे रहा माता रुक्मिणी आश्रम दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रहा है। आश्रम की आवश्यकताओं और संचालन संबंधी समस्याओं की जानकारी मिलने पर मिश्रा रायपुर से सीधे संस्थान पहुंचे और पद्मश्री धर्मपाल सैनी से वर्तमान परिस्थितियों तथा आवश्यकताओं पर चर्चा की।

शिक्षकों के रिक्त पदों और लंबित स्वीकृतियों की होगी समीक्षा

मुलाकात के दौरान आश्रम की कार्यकारिणी, सचिव पद के प्रभार, आश्रम से संबद्ध विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों और वित्त एवं शिक्षा विभाग से संबंधित लंबित स्वीकृतियों के मामलों पर विचार-विमर्श किया गया।

मिश्रा ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और प्रतिभा विकास के लिए कार्यरत संस्थाओं का सुचारू संचालन जरूरी है। संस्थागत व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का नियमानुसार और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

उन्होंने मौके पर उपस्थित स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सत्येन्द्र बंजारे और आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त गणेश शोरी को आश्रम की नियमावली (बाय-लॉज) के अनुरूप सभी संबंधित मामलों की गहन समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही, आश्रम से संबद्ध शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों की व्यवस्था, प्रशासनिक विषयों और लंबित स्वीकृतियों पर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने को कहा, ताकि संबंधित विभागों के समन्वय से समस्याओं का त्वरित और स्थायी समाधान किया जा सके।

जनजातीय बच्चों की शिक्षा और खेल प्रतिभाओं को संवारने में अहम योगदान

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने जनजातीय बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, उनकी खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने में पद्मश्री धर्मपाल सैनी के योगदान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि लगभग पांच दशकों से माता रुक्मिणी आश्रम जनजातीय समाज के शैक्षणिक और सामाजिक उत्थान के लिए काम कर रहा है। ऐसे संस्थान दूरस्थ अंचलों के बच्चों को शिक्षा, संस्कार, अनुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में शैक्षणिक संस्थाओं की भागीदारी जरूरी

मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के विकास लक्ष्यों को हासिल करने में समाजसेवी और शैक्षणिक संस्थाओं की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शिक्षा और मानव संसाधन विकास को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। शासन की योजनाओं और सेवाभावी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से बच्चों के सर्वांगीण विकास के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

मिश्रा ने आश्वस्त किया कि माता रुक्मिणी आश्रम के जनसेवा और कल्याणकारी कार्यों के सुचारू संचालन तथा संस्थागत समस्याओं के निराकरण के लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर हरसंभव सहयोग किया जाएगा।

सम्बन्धित खबरें