सरदार पटेल के एकता मंत्र से विकसित भारत का संकल्प

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  • Oct 31, 2026
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पीएम मोदी बोले- नक्सलवाद की कमर टूटी, अब वैचारिक उग्रवाद से सतर्क रहने की जरूरत

एकता नगर में 151वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह

2015 के 126 नक्सल प्रभावित जिले मार्च 2026 में घटकर शून्य हुए, 10-12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर आए

2047 तक सशक्त और विकसित भारत बनाने का आह्वान

एकता नगर (गुजरात), 31 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने 550 से अधिक रियासतों को एकजुट कर भारत को एकता के सूत्र में पिरोया और आधुनिक राष्ट्र की नींव रखी। आज उसी एकता की शक्ति के बल पर भारत विकास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा के नए मुकाम हासिल कर रहा है। देश में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार किया जा चुका है, लेकिन वैचारिक उग्रवाद का खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए देशवासियों को विभाजनकारी ताकतों और भारत विरोधी साजिशों के प्रति सतर्क रहना होगा। उन्होंने 2047 तक सशक्त, सक्षम और विकसित भारत के निर्माण को राष्ट्रीय संकल्प बनाने का आह्वान किया।प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर को गुजरात के एकता नगर में सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में हिस्सा लिया और जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने सुबह के पारंपरिक कार्यक्रम के स्थान पर इस बार शाम को आयोजित समारोह का उल्लेख करते हुए पिछली शाम भारत पर्व पवेलियन में हुए शानदार प्रदर्शन और सुबह आयोजित रन फॉर यूनिटी में लाखों नागरिकों की भागीदारी को याद किया। उन्होंने कहा कि एकता बनाए रखने का संकल्प और नागरिकों का उत्साह इस आयोजन को विशेष बनाता है।

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दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में देशभर के लोगों की सामूहिक भागीदारी, एकता नगर के विशिष्ट वातावरण और समारोह की प्रेरक ऊर्जा का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि यहां आने पर प्रत्येक भारतीय का हृदय राष्ट्रीय गौरव और सरदार पटेल के प्रति कृतज्ञता से भर जाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पटेल ने 550 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर अपने दृढ़ संकल्प से देश को एक सूत्र में बांधा।

स्वतंत्रता, गणतंत्र और एकता-तीनों राष्ट्रीय पर्वों का विशेष महत्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता किसी राष्ट्र को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अधिकार देती है। गणराज्य की व्यवस्था संविधान के दायरे में जन-उत्तरदायित्व के साथ निर्णय लेने का मार्ग प्रशस्त करती है, जबकि राष्ट्रीय एकता पूरे देश को एक साथ आगे बढ़ने की शक्ति देती है। इसी कारण भारत में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस तीनों पर्व पूरे उत्साह से मनाए जाते हैं।

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उन्होंने एकता नगर की राष्ट्रीय एकता परेड को भारत की एकजुट शक्ति का भव्य प्रदर्शन बताया। यह परेड पुलिस और सुरक्षा बलों के शौर्य को समर्पित थी। इसमें भारत की विरासत और आकांक्षाओं को प्रदर्शित करने वाली झांकियों ने भी आयोजन की शोभा बढ़ाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस अब केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा जनगौरव का उत्सव बन चुका है। उन्होंने सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सरदार पटेल को नमन किया।

विविधता को बाधा नहीं, एकता का आधार मानते थे पटेल

मोदी ने कहा कि सरदार पटेल के बिना आधुनिक भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। देश के वर्तमान भौगोलिक और राजनीतिक स्वरूप को आकार देने में उनकी निर्णायक भूमिका रही। विभाजन के बाद हिमालय से हिंद महासागर तक भारत की एकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया।प्रधानमंत्री के अनुसार, पटेल भारत के स्वभाव और उसकी चेतना को गहराई से समझते थे। वे विविधता को कभी बाधा नहीं मानते थे, बल्कि उसे राष्ट्रीय एकता का वास्तविक आधार मानते थे। यही शक्ति हजारों वर्षों से भारतीय सभ्यता को एक सूत्र में बांधे हुए है और इसी के बल पर देश ने प्रगति तथा समृद्धि के नए शिखर छुए हैं। उन्होंने कहा कि पटेल ने देश को भौगोलिक और भावनात्मक, दोनों स्तरों पर एकजुट कर आधुनिक भारत की नींव रखी। गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के माध्यम से उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग भी प्रशस्त किया। इस वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। एक हजार वर्षों तक आक्रांताओं की चुनौतियों के बावजूद मंदिर पर धर्मध्वजा के शान से लहराते रहने की प्रेरणा से देशभर में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के भव्य आयोजन, वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता कद, तेज आर्थिक विकास और काशी विश्वनाथ से राम मंदिर तक सांस्कृतिक पुनर्जागरण उसी मार्ग की उपलब्धियां हैं, जिसकी कल्पना सरदार पटेल ने की थी। इसके लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।

दो वर्षों के संकल्पों में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता

प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर में दो वर्षों तक चले आयोजनों और उस दौरान लिए गए संकल्पों को याद किया। उन्होंने 151वीं जयंती पर संतोष जताया कि देश ने बहुत कम समय में कई संकल्प पूरे किए और ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए, जो पहले कभी नहीं बने थे।
उन्होंने पिछले वर्ष पटेल को नमन करते हुए ली गई उस प्रतिज्ञा का उल्लेख किया, जिसमें नक्सलवाद और माओवादी आतंक के पूरी तरह समाप्त होने तक चैन से नहीं बैठने का संकल्प लिया गया था। मोदी ने कहा कि महज एक वर्ष में वामपंथी उग्रवाद की कमर टूट गई है। वर्ष 2015 में देश में 126 नक्सल प्रभावित जिले थे, जिनकी संख्या मार्च 2026 तक घटकर शून्य हो गई।

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उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्र अब विकास की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। वहां सड़कें, मोबाइल नेटवर्क, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं। जिन युवाओं के सामने कभी अनिश्चितता थी, उनके लिए शिक्षा, रोजगार और आगे बढ़ने के नए अवसर खुल रहे हैं।
समारोह में पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे परिवारों का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने उन सुरक्षाकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इन क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।

जनता का बढ़ा विश्वास, भारत पहले से अधिक सुरक्षित

प्रधानमंत्री ने कहा कि ठोस राष्ट्रीय उपलब्धियों और संवेदनशील प्रशासन के कारण जनता का विश्वास बढ़ा है। यही बढ़ा हुआ आत्मविश्वास भारत को पहले से अधिक सुरक्षित और संकल्पबद्ध बना रहा है। गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक गरीबी हटाने के नारे दिए गए, लेकिन उनका वास्तविक लाभ गरीबों तक नहीं पहुंचा।

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उन्होंने हाल ही में जारी विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। पहले देश में हर 100 में से 27 लोग अत्यधिक गरीबी की चपेट में थे, जबकि अब यह संख्या तीन से भी कम रह गई है।
मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में गरीबों के कल्याण और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देकर यह उपलब्धि हासिल की गई है। इसके लिए बिना किसी लीकेज के सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि हस्तांतरित करने वाली डीबीटी व्यवस्था, मुफ्त राशन, मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं, करोड़ों पक्के मकान, शौचालय, धुएं से मुक्त रसोई और व्यापक बीमा कवरेज जैसी योजनाएं लागू की गईं। वर्ष 2014 से पहले सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ 25 करोड़ से कम लोगों तक पहुंचता था, जबकि अब इनका दायरा लगभग 100 करोड़ नागरिकों तक हो गया है। उन्होंने गरीबी को पूरी तरह समाप्त करने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया।

वैश्विक संकटों के बीच राष्ट्रीय एकता सबसे बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई दशकों का वैश्विक परिदृश्य उथल-पुथल भरा रहा है। युद्ध, आर्थिक संकट, संसाधनों की कमी और आपूर्ति शृंखलाओं में बिखराव जैसी चुनौतियां दुनिया के सामने हैं। ऐसे समय में राष्ट्रीय एकता ही स्थिरता और सफलता की सबसे बड़ी गारंटी है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का सामना करने में भारतीयों की एकजुटता देश की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने हाल में पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके कारण कई देशों को ईंधन की राशनिंग करनी पड़ी। बड़ी आबादी और तेल आयात पर निर्भरता के कारण भारत के सामने भी गंभीर संकट की आशंकाएं जताई जा रही थीं। इस दौरान भारत विरोधी ताकतें भी सक्रिय हो गई थीं, लेकिन भारत की कूटनीतिक सूझबूझ और देशवासियों की एकजुटता ने नागरिकों को संकट के प्रभाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सोशल मीडिया से अफवाह फैलाने वाली ताकतों से सावधान रहने की अपील

मोदी ने विभाजनकारी ताकतों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि एक दशक से अधिक समय की राजनीतिक हताशा के बाद ऐसी ताकतें खुलकर सामने आ रही हैं। वे साजिशें रचने, नागरिकों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काने और सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर अफवाहें फैलाने तथा भारत की छवि खराब करने का प्रयास कर रही हैं।
उन्होंने नागरिकों से गुप्त विदेशी बैठकों, भारत विरोधी तत्वों को मिलने वाले बाहरी समर्थन और देश के शत्रुओं की भाषा से मेल खाते बयानों के तौर-तरीकों को पहचानने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से नक्सलवाद समाप्त कर दिया गया है, लेकिन वैचारिक उग्रवाद का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। देश को ऐसी ताकतों के प्रति हमेशा सतर्क रहना होगा।

सीमाओं की सुरक्षा, घुसपैठ पर रोक और समान नागरिक संहिता पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय एकता का संकल्प और सशक्त एवं सक्षम भारत के निर्माण की यात्रा तमाम कठिनाइयों के बावजूद जारी रहनी चाहिए। देश की अगली प्रमुख प्राथमिकताओं में सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करना, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलावों पर रोक लगाना तथा सेकुलर सिविल कोड की दिशा में आगे बढ़ना शामिल है।
उन्होंने कहा कि बड़े संकल्पों और साहसिक निर्णयों के रास्ते में बाधाएं आना स्वाभाविक है, लेकिन देश एक भारत, श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ प्रयास करना होगा।

परिश्रम की पराकाष्ठा तक जाएंगे, लक्ष्य विकसित भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश हर चुनौती और तूफान का डटकर सामना करेगा, लेकिन लक्ष्य एक ही रहेगा—2047 तक सशक्त और सक्षम भारत का निर्माण। उन्होंने सभी देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस और पर्व की शुभकामनाएं दीं। भारत माता की जय के उद्घोष के साथ उन्होंने अपना संबोधन समाप्त किया।

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