ग्रामीण सड़कों के असर का 4 साल तक होगा आकलन, एनआरआईडीए और आईआईएम कलकत्ता के बीच समझौता

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  • Sep 29, 2026
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पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन के तहत बनी सड़कों से गांवों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में आए बदलावों का होगा अध्ययन

 

10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50 जिलों, 150 ब्लॉकों व 250 सड़कों को अध्ययन में किया जाएगा शामिल

नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026। ग्रामीण सड़कों के निर्माण से गांवों की जिंदगी में किस तरह और कितने समय तक बदलाव आता है, इसका अब व्यापक और दीर्घकालिक अध्ययन किया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (एनआरआईडीए) और आईआईएम कलकत्ता ने पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन के तहत बनी ग्रामीण सड़कों के चार वर्ष के लॉन्गिट्यूडिनल प्रभाव आकलन अध्ययन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते पर एनआरआईडीए की महानिदेशक अदिति सिंह (आईएएस) और आईआईएम कलकत्ता के निदेशक प्रो. आलोक कुमार राय ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल, मंत्रालय और आईआईएम कलकत्ता के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। यह समझौता ग्रामीण संपर्कता से जुड़ी परियोजनाओं के प्रभाव का साक्ष्य-आधारित आकलन मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा अध्ययन

चार वर्ष के इस अध्ययन में 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50 जिलों, 150 ब्लॉकों और 250 सड़कों को शामिल किया जाएगा। अध्ययन के दायरे में आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम और उत्तराखंड होंगे।

ग्रामीण सड़क संपर्कता के दीर्घकालिक परिणामों को समझने के लिए करीब 5,000 परिवारों का सर्वेक्षण किया जाएगा।

निर्माण से पहले और बाद की स्थिति का होगा तुलनात्मक अध्ययन

अध्ययन में लॉन्गिट्यूडिनल दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इसके तहत समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने के लिए बेसलाइन सर्वेक्षण यानी निर्माण-पूर्व सर्वेक्षण और एंडलाइन सर्वेक्षण यानी निर्माण-पश्चात सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े जुटाए जाएंगे।

अध्ययन की निर्धारित समय-सीमा में बेसलाइन सर्वेक्षण के लिए 14 महीने, इसके बाद लगभग 12 महीने की परिवर्तन अवधि और एंडलाइन सर्वेक्षण के लिए 22 महीने शामिल हैं।

इस दौरान यह देखा जाएगा कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण से लोगों की आवाजाही, पहुंच, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में किस तरह बदलाव आया।

सड़क से बदलेगी आजीविका और बाजार तक पहुंच?

अध्ययन में यह भी आकलन किया जाएगा कि बेहतर सड़क संपर्कता का लोगों की आजीविका, रोजगार, आय के विभिन्न स्रोतों, खेती, गैर-कृषि गतिविधियों और बाजारों तक पहुंच पर क्या प्रभाव पड़ा। साथ ही परिवारों के कल्याण और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी की स्थिति में आए बदलावों का भी अध्ययन होगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा तथा आवश्यक सार्वजनिक और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच पर बेहतर ग्रामीण संपर्कता के दीर्घकालिक प्रभाव को भी अध्ययन में शामिल किया गया है।

विशेष रूप से यात्रा समय और परिवहन लागत में कमी, आवाजाही में सुधार, रोजगार एवं आजीविका के अवसरों तक बेहतर पहुंच तथा पलायन पर निर्भरता में कमी का आकलन किया जाएगा।

कमजोर वर्गों और अलग-अलग क्षेत्रों के प्रभाव भी जांचे जाएंगे

अध्ययन केवल औसत प्रभाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय के साथ परिणामों में आए बदलाव और अलग-अलग क्षेत्रों तथा कमजोर वर्गों के बीच प्रभाव के अंतर का भी आकलन किया जाएगा। इससे ग्रामीण सड़क संपर्कता से मिलने वाले दीर्घकालिक लाभों की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि इन सामाजिक-आर्थिक लाभों के लंबे समय तक बने रहने की क्षमता का आकलन किया जाए। अध्ययन से ग्रामीण सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मौजूद कमियों, उभरती चुनौतियों और ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत है।

भविष्य की ग्रामीण सड़क योजनाओं के लिए मिलेगा ठोस आधार

एनआरआईडीए, ग्रामीण विकास मंत्रालय और आईआईएम कलकत्ता के बीच यह सहयोग कार्यक्रमों की समीक्षा, परिणामों की निगरानी और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएगा। अध्ययन से ग्रामीण सड़क परियोजनाओं की भावी योजना और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी उपयोगी आधार तैयार होगा।

चार वर्ष के इस अध्ययन से पीएमजीएसवाई-IV और पीएम-जनमन के तहत विकसित ग्रामीण सड़क संपर्कता के सतत सामाजिक-आर्थिक और विकासात्मक प्रभावों के संबंध में ठोस साक्ष्य मिलने की उम्मीद है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि सड़क संपर्कता किस तरह ग्रामीण जीवन, अवसरों और विकास की गति को लंबे समय तक प्रभावित करती है।

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