बुक्सा में लौटी बाघों की उम्मीद, पहली बाघिन के साथ शुरू हुआ पुनर्वास अभियान

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  • Oct 02, 2026
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 पश्चिम बंगाल, 2 अक्टूबर 2026। भारत में बाघ संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के बुक्सा बाघ अभ्यारण्य में शुक्रवार को पहली बाघिन को छोड़ा गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उपस्थिति में हुई इस पहल के साथ ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में बाघों की आबादी को फिर से बसाने के लिए चरणबद्ध ‘बाघ पुनर्वास कार्यक्रम’ की शुरुआत हुई।

यह पहल वन्यजीव सप्ताह 2026 की भी उपयुक्त शुरुआत मानी जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य बुक्सा क्षेत्र में बाघों की ऐसी आबादी को फिर से स्थापित करना है, जो प्राकृतिक रूप से विकसित हो सके और लंबे समय तक कायम रहे। इसके लिए वैज्ञानिक तरीकों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है।

बाघिन को बुक्सा में छोड़ने के बाद भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिदृश्य संरक्षण और प्रजातियों की सुरक्षा के प्रयासों से प्रेरित होकर बुक्सा में बाघों को पुनः बसाने का महत्वपूर्ण वादा आज पूरा हुआ है। उन्होंने इस पुनर्वास अभियान की सफलता में सहयोग के लिए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का आभार व्यक्त किया।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर

‘बाघ पुनर्वास कार्यक्रम’ के तहत बुक्सा में बाघों की संख्या को फिर से बढ़ाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी। इसमें वैज्ञानिक संरक्षण पद्धतियों के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है, ताकि बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास तैयार हो और पुनर्वास की प्रक्रिया दीर्घकालिक रूप से सफल हो सके।

बुक्सा में पहली बाघिन को छोड़ना इस व्यापक संरक्षण प्रयास का पहला महत्वपूर्ण चरण है। इसका लक्ष्य केवल बाघों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि क्षेत्र में एक ऐसी स्वस्थ और टिकाऊ बाघ आबादी स्थापित करना है, जो प्राकृतिक रूप से फल-फूल सके।

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