डिजिटल तकनीक से दुर्ग न्यायालय में आसान हुई सुनवाई, मुंबई-चेन्नई के गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से दर्ज

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  • Oct 15, 2026
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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जमानत आवेदन का निराकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डिजिटल न्याय और विधिक जागरूकता को दे रहा बढ़ावा

दुर्ग, 15 अक्टूबर 2026।

न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ, सुगम और प्रभावी बनाने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक जमानत आवेदन पर सुनवाई कर उसका निराकरण किया गया। वहीं, मुंबई और चेन्नई में निवासरत महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही भी पूरी कराई गई।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जमानत आवेदन पर सुनवाई

एक प्रकरण में अधिवक्ताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर जमानत आवेदन पर अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आवेदन का विधिवत निराकरण किया। इस व्यवस्था से अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की सुविधा मिली और आवागमन में लगने वाले समय तथा संसाधनों की बचत हुई।

मुंबई और चेन्नई के गवाहों के बयान दर्ज

एक अन्य विचाराधीन प्रकरण में मुंबई और चेन्नई में रहने वाले महत्वपूर्ण गवाहों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दुर्ग न्यायालय की कार्यवाही से जोड़ा गया। निर्धारित तकनीकी और विधिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उनके बयान दर्ज किए गए तथा प्रतिपरीक्षण की कार्यवाही पूरी की गई। इससे लंबी दूरी की यात्रा से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने और साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिली।

डिजिटल न्याय के साथ विधिक जागरूकता पर जोर

न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए नागरिकों और संबंधित हितधारकों को उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं की जानकारी देना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन और प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर के निर्देशन में विभिन्न जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

इन प्रयासों के तहत आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों और अन्य संबंधित हितधारकों के बीच विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य लोगों को न्यायिक एवं विधिक सेवाओं की उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराना, डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग के प्रति जागरूक करना तथा पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता प्राप्त करने के विकल्पों की जानकारी देना है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की यह पहल न्यायिक संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच संवाद मजबूत करने तथा डिजिटल न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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