सरकारी खजाने के हर रुपये का हिसाब हो, खर्च का लाभ जनता तक पहुंचे : ओम बिरला

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  • Nov 03, 2026
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लोक लेखा समितियों के सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ने वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर दिया जोर

 10 से 20 साल तक लंबित ऑडिट आपत्तियों के समयबद्ध निराकरण, खर्च की जमीनी जांच और निगरानी में एआई के इस्तेमाल की पैरवी

तिरुवनंतपुरम | 3 नवंबर 2026 । सरकारी खजाने से खर्च होने वाले एक-एक रुपये का हिसाब होना चाहिए। जिस उद्देश्य के लिए राशि आवंटित की गई है, उसका उपयोग उसी काम में हो और उसका वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे। सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की बुनियाद हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संसद और राज्य विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों (पीएसी) के अध्यक्षों के सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने समितियों से सार्वजनिक धन के संरक्षक की भूमिका और मजबूत करने तथा सरकारी खर्च का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में आए बदलाव के आधार पर करने का आह्वान किया।
20 साल तक लंबित ऑडिट आपत्तियों पर जताई चिंता
बिरला ने कहा कि लेखा परीक्षा की आपत्तियां 10, 15 और 20 वर्षों तक लंबित रहना पूरी व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इनके निराकरण के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। केंद्र और राज्य सरकारें निगरानी, समीक्षा और नियमित अनुवर्ती कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करें, ताकि जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित न रहे और समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने कहा कि लोक लेखा समितियां केवल खातों और ऑडिट रिपोर्ट की जांच करने वाली संस्थाएं नहीं हैं। उनका दायित्व यह भी देखना है कि आवंटित धन से निर्धारित लक्ष्य पूरे हुए या नहीं और जनता को अपेक्षित लाभ मिला या नहीं। समितियों को कार्यपालिका को जवाबदेह बनाने के साथ वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर हो सार्वजनिक धन की सुरक्षा
लोकसभा अध्यक्ष ने पीएसी के अध्यक्ष पद पर विपक्ष के सदस्य को नियुक्त करने की संसदीय परंपरा को लोकतंत्र की परिपक्वता, समावेशिता और मजबूती का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि समिति में सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी से सार्वजनिक खर्च की जांच में अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं। राजनीतिक विचारधाराएं और नीतिगत मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जनता के धन की सुरक्षा सभी की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पीएसी को संवाद, सहयोग, आम सहमति और सामूहिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और बर्बादी को रोकना, वित्तीय अनियमितताओं तथा धन के रिसाव पर अंकुश लगाना और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है। नागरिकों का विश्वास लोकतांत्रिक शासन की नींव है। सार्वजनिक धन का प्रत्येक रुपया जनता के योगदान और उसकी आकांक्षाओं से जुड़ा है, इसलिए उसका उपयोग वित्तीय औचित्य के उच्चतम मानकों के अनुरूप होना चाहिए।
परियोजनाओं का मौके पर जाकर जांचें काम और गुणवत्ता
बिरला ने कहा कि सार्वजनिक व्यय का मूल्यांकन केवल बजट आवंटन, खर्च के आंकड़ों और उपयोगिता प्रमाण-पत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में समितियां जरूरत के अनुसार निर्माण स्थलों का दौरा करें और काम की गुणवत्ता, समय-सीमा तथा निर्धारित मानकों के पालन की जांच करें। इससे पता चलेगा कि खर्च की गई राशि से अपेक्षित निर्माण हुआ है या नहीं और सार्वजनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग हुआ है या नहीं।
इसी तरह सामाजिक कल्याण योजनाओं में केवल खर्च की गई राशि देखना पर्याप्त नहीं है। यह भी जांचना जरूरी है कि योजनाओं से लोगों के जीवन में कितना बदलाव आया। सार्वजनिक व्यय का अंतिम लक्ष्य सामाजिक कल्याण और जनहित होना चाहिए।
सीएजी की रिपोर्ट पर कार्रवाई और एआई से निगरानी
लोकसभा अध्यक्ष ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उसकी ऑडिट रिपोर्टों की जांच, सरकार की कार्रवाई संबंधी रिपोर्टों की समीक्षा और सिफारिशों पर आगे की कार्रवाई पीएसी के काम का अभिन्न हिस्सा है। समितियों को जहां व्यवस्था में सुधार की जरूरत हो, वहां उचित मार्गदर्शन और सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करनी चाहिए।
उन्होंने वित्तीय निगरानी मजबूत करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया। इनके जरिए सरकारी खर्च के बड़े आंकड़ों का विश्लेषण, वित्तीय अनियमितताओं के नए रुझानों की पहचान और ऑडिट आपत्तियों पर कार्रवाई की निगरानी बेहतर बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ने से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा मजबूत होगा।
राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से बेहतर होगा सुशासन
बिरला ने सभी राज्यों की लोक लेखा समितियों से सम्मेलन को अनुभव, नवाचार और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा करने का प्रभावी मंच बनाने का आग्रह किया। जिन राज्यों ने पारदर्शिता, वित्तीय निगरानी और मूल्यांकन की बेहतर व्यवस्था विकसित की है, वे अपने अनुभव दूसरे राज्यों के साथ साझा करें। जवाबदेही मजबूत करने के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पूरे देश में सुशासन को बढ़ावा देगी।
उन्होंने कहा कि समय के साथ पीएसी का कार्यक्षेत्र बढ़ा है। अब उसकी जिम्मेदारी केवल ऑडिट रिपोर्ट और सार्वजनिक खातों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक खर्च, सरकारी विभागों के कामकाज, प्रशासनिक सुधारों और कार्यक्रमों के मूल्यांकन में भी उसकी अहम भूमिका है। हाल में हुए पीएसी के शताब्दी समारोहों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की गई प्रतिबद्धताओं को समिति की कार्यप्रणाली में ठोस सुधारों के रूप में लागू किया जाना चाहिए। केंद्र-राज्य साझेदारी और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत संचालित योजनाओं की भी समितियों के अधिकार क्षेत्र में प्रभावी वित्तीय जांच होनी चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन की चर्चाओं से वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने के ठोस सुझाव सामने आएंगे। इसके निष्कर्षों से निगरानी, ऑडिट पर समयबद्ध कार्रवाई और सार्वजनिक खर्च की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए, ताकि जनता का प्रत्येक रुपया निर्धारित उद्देश्य के लिए जिम्मेदारी से खर्च हो।
हर संसद सत्र में कम से कम एक पीएसी रिपोर्ट पर चर्चा का प्रस्ताव
लोकसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने स्वागत भाषण में कहा कि वित्तीय निगरानी खर्च की जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका केंद्र परिणाम और नागरिकों को मिलने वाला वास्तविक लाभ होना चाहिए। सार्वजनिक व्यय से सेवा वितरण में सुधार और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जाने चाहिए।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि संसद के प्रत्येक सत्र में कम से कम एक पीएसी रिपोर्ट और उस पर सरकार की कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने समयबद्ध ऑडिट, विभिन्न क्षेत्रों की संतुलित समीक्षा तथा प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गहन जांच की जरूरत भी बताई।
मुख्यमंत्री, उपसभापति और विधानसभा अध्यक्ष रहे मौजूद
उद्घाटन सत्र में केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, लोकसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल, केरलम विधानसभा के अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन और केरलम विधानसभा की पीएसी के अध्यक्ष के.एन. बालगोपाल ने संबोधित किया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्ष, सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इस अवसर पर ‘लोक लेखा समिति सम्मेलन स्मारिका 2026’ का विमोचन भी किया गया।

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