30 लीटर दूध की रोजाना बिक्री से मजबूत हुई कमाई, डेयरी ने बदली मनोज की जिंदगी

  • Admin
  • Oct 08, 2026
  • 11,238 views

राज्य डेयरी उद्यमिता योजना के अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से हर माह 15 हजार रुपये तक की बचत

सरगुजा, 8 अक्टूबर 2026।

मेहनत, लगन और शासन की योजनाओं का सही लाभ मिले तो पशुपालन ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी मनोज कुमार पटेल ने अपने प्रयासों से इसे साबित किया है। राज्य डेयरी उद्यमिता योजना के तहत पशुपालन विभाग से मिले अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन की मदद से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज नियमित दूध बिक्री से उन्हें हर महीने अच्छी आमदनी हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

योजना का लाभ लेकर शुरू किया डेयरी व्यवसाय

मनोज कुमार पटेल ने पशुपालन को स्थायी आय का साधन बनाने के उद्देश्य से राज्य डेयरी उद्यमिता योजना का लाभ लिया। योजना के अंतर्गत पशुपालन विभाग से प्राप्त अनुदान राशि का उपयोग उन्होंने गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को विकसित करने में किया।

विभागीय अधिकारियों से मिले मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने धीरे-धीरे डेयरी व्यवसाय को आय के भरोसेमंद माध्यम के रूप में स्थापित किया।

रोजाना 30 लीटर दूध की बिक्री से 1,200 रुपये की आमदनी

वर्तमान में मनोज कुमार पटेल प्रतिदिन करीब 30 लीटर दूध का विक्रय कर रहे हैं। इससे उन्हें रोजाना लगभग 1,200 रुपये की आमदनी होती है। दूध की नियमित बिक्री से उन्हें महीने में लगभग 30 से 35 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

पशुओं के चारे, देखभाल और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद उन्हें करीब 15 हजार रुपये प्रतिमाह की बचत हो रही है। मनोज के अनुसार, डेयरी व्यवसाय से वे सालाना लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये तक की बचत कर पा रहे हैं।

नियमित आय का साधन मिलने से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में सुविधा हुई है। साथ ही भविष्य में डेयरी व्यवसाय को और विस्तार देने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

अनुदान और विभागीय मार्गदर्शन से मिली मजबूती

मनोज कुमार पटेल का कहना है कि राज्य डेयरी उद्यमिता योजना के तहत मिले अनुदान ने उनके डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें व्यवसाय को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिली।

उन्होंने योजना का लाभ मिलने पर पशुपालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासकीय सहायता के साथ स्वयं की मेहनत से वे अपने परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने में सफल हो रहे हैं।

ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार की राह

मनोज कुमार पटेल की कहानी बताती है कि हितग्राहीमूलक शासकीय योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

राज्य डेयरी उद्यमिता योजना के माध्यम से पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर ग्रामीण युवा और किसान नियमित आय अर्जित करने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। मनोज की सफलता मेहनत, योजना के लाभ और विभागीय मार्गदर्शन के समन्वय से ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की एक मिसाल पेश करती है।

सम्बन्धित खबरें