श्रद्धेय ​अशोक सिंहल जन्मशताब्दी वर्ष का शंखनाद

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  • Sep 29, 2026
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भोपाल। 

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) मध्यभारत प्रांत द्वारा रवींद्र भवन सभागार में श्रद्धेय अशोक सिंहल जी के जन्मशताब्दी वर्ष का उद्घाटन समारोह उत्साह के साथ संपन्न हुआ। 27 सितंबर, 1926 को जन्मे अशोक सिंहल जी की जन्मशताब्दी के निमित्त देशव्यापी अभियान आरंभ किया गया है। इस वर्षभर के अभियान के तहत देश के 47 प्रमुख केंद्रों सहित विश्वभर में वैचारिक संगोष्ठियां, सामाजिक समरसता सम्मेलन और सेवा कार्य आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत मंडपम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी की उपस्थिति में अखिल भारतीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कर्णावती (अहमदाबाद) में मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई की उपस्थिति में भव्य आयोजन संपन्न हुए।

​भोपाल के रवींद्र भवन सभागार में आयोजित समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विहिप के केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव देशपांडे और बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक जयभान सिंह पवैया उपस्थित रहे। साथ ही मंच पर गुफा मंदिर धाम के पीठाधीश्वर स्वामी रामप्रवेशदास देवाचार्य जी महाराज, बौद्ध भिक्षु भदंत बुद्धघोष जी सहित पूज्य संतगण एवं प्रबुद्धजन मंचासीन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी चौधरी ओ.पी. गोंदिया ने की।

​डॉ. मोहन यादव (मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश) ने कहा कि ​”एक ही देश और एक ही प्रदेश में दो विधान नहीं चलेंगे; समान नागरिक संहिता (UCC) समय की मांग है। जब हिन्दू (राम) कानूनन एक शादी करता है, तो मुस्लिम (रहीम) को भी एक ही शादी करनी होगी। मध्यप्रदेश में बहुविवाह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

विनायक राव देशपांडे (केंद्रीय सह संगठन महामंत्री, विहिप) ने कहा कि ​”देशभर के देवालय सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त होने चाहिए। मंदिरों के स्वतंत्र, स्वायत्त और पारदर्शी संचालन के लिए समाज और संतों के हाथों में स्वायत्त बोर्ड या धर्म परिषद की व्यवस्था सौंपी जानी चाहिए।”

​जयभान सिंह पवैया (पूर्व राष्ट्रीय संयोजक, बजरंग दल) ने कहा कि ​”राम जन्मभूमि आंदोलन दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा सांस्कृतिक पुनर्जागरण था। कारसेवकों का अप्रतिम बलिदान और काशी में डोम राजा के घर संतों द्वारा भोजन ग्रहण कर समरसता का स्थापित हुआ अनुपम आदर्श ही नए भारत की असली शक्ति है।”

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