शेखावाटी साहित्य संगम में इतिहास, तकनीक और लोक संस्कृति पर हुआ मंथन

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  • Oct 10, 2026
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विकसित भारत-2047 में युवाओं की भूमिका, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की प्रासंगिकता पर हुई चर्चा

सीकर, 15 अक्टूबर 2026। 

शेखावाटी साहित्य संगम के दूसरे दिन इतिहास, भारतीय संस्कृति, युवा शक्ति, तकनीक और लोक परंपराओं से जुड़े विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ। विभिन्न सत्रों में वक्ताओं ने ऐतिहासिक प्रेरणाओं को वर्तमान चुनौतियों से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, डिजिटल माध्यमों के प्रभाव और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विचार रखे। साहित्यिक चर्चाओं के साथ लोकगीत, लोकनृत्य, नाट्य प्रस्तुतियों और पुस्तक मेले ने भी आयोजन को विशेष बनाया।

विकसित भारत-2047 में युवाओं की भूमिका पर चर्चा

‘Gen Z, टेक्नोलॉजी और एल्गोरिद्म : विकसित भारत में भूमिका’ सत्र में युवा शक्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने बदलते तकनीकी परिवेश में युवाओं की क्षमता और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण के लिए करने की आवश्यकता पर विचार रखे।

शेखावाटी की हवेलियों और कला विरासत के संरक्षण पर जोर

‘लोकमंथन एवं लोकवस्तु’ सत्र में शेखावाटी की भित्तिचित्र कला, पारंपरिक स्थापत्य और ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण पर विमर्श हुआ। वक्ताओं ने प्राचीन चित्रकला तकनीकों, प्राकृतिक रंगों और स्थानीय कला परंपराओं को संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हल्दीघाटी के इतिहास से साहस और नेतृत्व की प्रेरणा

‘हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौती तक : आज का भारत’ विषय पर महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर के कुलगुरु प्रो. मदन सिंह राठौड़ ने इतिहास से मिलने वाली प्रेरणा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, हौसलों से भी लड़े जाते हैं। विपरीत परिस्थितियों में साहस, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और दूरगामी रणनीति की अहम भूमिका होती है।

रील और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन जरूरी

‘रील, रियलिटी और सिनेमा’ सत्र में अभिनेता राहुल सिंह ने कहा कि सिनेमा युवाओं की सोच को प्रभावित करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। इसके लिए पढ़ाई और मेहनत जरूरी है। फिल्म लेखक सूर्यपाल ने भी युवाओं से आभासी दुनिया के आकर्षण के बीच अपने वास्तविक लक्ष्यों और जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की प्रासंगिकता पर विमर्श

‘हिंद की चादर : गुरु तेग बहादुर जी और वर्तमान प्रासंगिकता’ सत्र में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कुलपति प्रो. (डॉ.) करमजीत सिंह ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। सत्र में गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, बलिदान और उनकी शिक्षाओं के समकालीन महत्त्व पर विचार-विमर्श हुआ।

लोकगीत और लोकनृत्य से सजी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

साहित्य संगम में आयोजित एकल लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिताओं में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। लोकनृत्य प्रस्तुतियों को दर्शकों की सराहना मिली।

नाट्य प्रस्तुतियों में भक्ति, समरसता और शौर्य का संदेश

जयपुर के युवतरंग संस्कृत नाट्य दल ने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जीवन पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया। इसके माध्यम से श्रम की गरिमा, भक्ति और सामाजिक समानता का संदेश दिया गया। वहीं, ‘वीरांगना हीरा दे’ नाटक में जालौर की लोकप्रचलित शौर्यगाथा के जरिए कर्तव्य, साहस और स्वाभिमान को मंच पर जीवंत किया गया।

पुस्तक मेले में साहित्य और इतिहास की पुस्तकों ने खींचा ध्यान

साहित्य संगम परिसर में आयोजित पुस्तक मेले में साहित्य, इतिहास, भारतीय संस्कृति और समकालीन विषयों पर आधारित पुस्तकों को देखने के लिए विद्यार्थी, साहित्य प्रेमी और अन्य आगंतुक पहुंचे। मेले ने पाठकों को विविध विषयों की पुस्तकों से परिचित होने का अवसर दिया।

शेखावाटी साहित्य संगम का यह आयोजन इतिहास से प्रेरणा लेने, वर्तमान की चुनौतियों पर संवाद करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास का मंच बना। वैचारिक विमर्श, साहित्य और लोककलाओं के माध्यम से संगम ने भारतीय परंपराओं और समकालीन चिंतन के बीच सार्थक संवाद स्थापित किया।

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