इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक होगी संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक

  • Admin
  • Oct 31, 2026
  • 5,751 views

देशभर से करीब 408 पदाधिकारी होंगे शामिल, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना पर होगा मंथन

इंदौर, 31 अक्टूबर 2026।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 2 से 4 नवंबर तक इंदौर में आयोजित होगी। बैठक से पहले शनिवार को अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताया कि विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की गईं। बैठक में इन कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ संघ कार्य के विस्तार और आगामी योजनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक में देशभर से लगभग 408 कार्यकर्ताओं के शामिल होने की अपेक्षा है। इनमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह, कार्य विभागों के प्रमुख, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य तथा 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के संघचालक, सह संघचालक, कार्यवाह, सह कार्यवाह, प्रचारक और सह प्रचारक शामिल होंगे।

देशभर में 1.01 लाख से अधिक दैनिक शाखाएं संचालित

सुनील आंबेकर ने बताया कि वर्तमान में देशभर में संघ की 1,01,151 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। साप्ताहिक मिलन और अन्य गतिविधियों को मिलाकर संघ का कार्य लगभग 1,10,849 स्थानों तक पहुंच चुका है। पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाएं शुरू हुई हैं।

शताब्दी वर्ष से पहले तीन वर्षों के लिए तैयार की गई कार्य विस्तार योजना की उपलब्धियों और अनुभवों की बैठक में समीक्षा की जाएगी।

65,660 हिंदू सम्मेलनों में समाज की सहभागिता

शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। नगरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में मंडल स्तर पर हुए इन सम्मेलनों को समाज का व्यापक समर्थन मिला। गृह संपर्क अभियान में भी लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

संघ का प्रयास है कि समाज की विभिन्न संस्थाओं और संगठनों द्वारा शुरू किए जाने वाले समाजहित के कार्यों में स्वयंसेवक अपने अनुभव के आधार पर सहयोग करें।

महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर रहेगा विशेष ध्यान

गृह संपर्क अभियान, प्रमुख जन गोष्ठियों और हिंदू सम्मेलनों में महिलाओं की सहभागिता उल्लेखनीय रही। ग्रामीण क्षेत्रों, विश्वविद्यालय परिसरों और अन्य स्थानों पर युवाओं एवं युवतियों के लिए आयोजित कार्यक्रमों में भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली।

आंबेकर ने बताया कि युवाओं की आकांक्षाओं, देश और समाज से जुड़े विषयों तथा उनके सुझावों के आधार पर आगामी कार्यक्रमों की दिशा तय की जाएगी।

संगठनात्मक बदलाव और नशामुक्ति पर होगा विचार

बैठक में संघ की संगठनात्मक संरचना में प्रस्तावित बदलावों पर भी विचार किया जाएगा। इसके बाद मार्च में नागपुर में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से पहले जिला, विभाग, प्रांत और क्षेत्र स्तर पर संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसी क्रम में मार्च में सरकार्यवाह का निर्वाचन होगा।

संगठनात्मक विषयों के साथ समाज जागरण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। नशीले पदार्थों के बढ़ते चलन को देखते हुए युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की योजना बनाई जाएगी।

वैश्विक संवाद और पंच परिवर्तन के कार्यों की समीक्षा

शताब्दी वर्ष के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड प्रवास के दौरान हुए वैश्विक संवाद की भी समीक्षा होगी। भारत के चिंतन, हिंदुत्व की सही समझ और विश्व कल्याण में भारत की भूमिका से जुड़े संवाद को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

इसके साथ ही संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी आयोजनों की योजना पर चर्चा होगी।

शताब्दी वर्ष में सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुरूप जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य जैसे पंच परिवर्तन के विषयों को समाज तक पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं। आगामी समय में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के साथ मिलकर इन विषयों पर नए कार्यक्रम और अभियान चलाने की योजना बनाई जाएगी।

4 नवंबर को सरकार्यवाह देंगे बैठक की जानकारी

बैठक के अंतिम दिन 4 नवंबर को सरकार्यवाह पत्रकार वार्ता करेंगे। इसमें बैठक के दौरान हुए विचार-विमर्श, कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। वे पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर भी देंगे।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि शताब्दी वर्ष के दौरान संघ के चिंतन में हिंदुत्व, भारत की पहचान, देश की भावी दिशा और समाज में भ्रम पैदा करने वाले तत्वों जैसे विषय प्रमुख रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ किसी नई तकनीक का विरोध नहीं करता, लेकिन मनुष्य के नाते यह विचार करना आवश्यक है कि तकनीक का उपयोग किस प्रकार किया जाए। इस संदर्भ में संघ समाज में जागरूकता लाने का कार्य करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों से संघ और हिंदुत्व के विचारों पर निरंतर विमर्श होता रहा है। संघ इस विमर्श के लिए खुला है और सरसंघचालक सहित संगठन के सभी प्रमुख पदाधिकारी संवाद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

सम्बन्धित खबरें