गढ़फुलझर में 50 लाख से बनेगा भव्य डोम, मुख्यमंत्री साय ने सर्वमंगल भवन का किया लोकार्पण

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  • Oct 24, 2026
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कोलता समाज के वार्षिक स्नेह सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री; मानसरोवर तालाब के सौंदर्यीकरण और 3.50 करोड़ की सड़क परियोजना का भी उल्लेख

महासमुंद, 24 अक्टूबर 2026। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के गढ़फुलझर में बाबा बिशासहे कुल कोलता समाज के वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने 50 लाख रुपये की लागत से निर्मित सर्वमंगल भवन का लोकार्पण किया। समाज की मांग पर मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में 50 लाख रुपये की लागत से भव्य डोम निर्माण कराने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में गढ़फुलझर के विकास के लिए किए गए वादे अब धरातल पर साकार हो रहे हैं। सर्वमंगल भवन बनने से सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 48 लाख रुपये की लागत से मानसरोवर तालाब का सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है। इसके अलावा, लगभग पौने दो किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण प्रगति पर है, जिस पर करीब 3.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

साय ने कहा कि इन परियोजनाओं से गढ़फुलझर और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे भी गति देने की बात कही।

शिक्षा, कृषि और समाजसेवा में कोलता समाज का योगदान

मुख्यमंत्री ने कोलता समाज की सराहना करते हुए कहा कि यह मेहनतकश, शिक्षित, समृद्ध और सामाजिक मूल्यों के प्रति समर्पित समाज है। कृषि, शिक्षा, सेवा और सामाजिक क्षेत्र में समाज के लोगों ने विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और आपसी सहयोग को मजबूत करने में कोलता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसकी प्रगतिशील सोच और सामाजिक चेतना दूसरे समाजों के लिए भी प्रेरणादायी है।

योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप राज्य सरकार जनकल्याणकारी संकल्पों को प्राथमिकता से पूरा कर रही है। सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आवास से वंचित गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण हो रहा है। विशेष पिछड़ी जनजातियों के परिवारों को भी प्राथमिकता के आधार पर आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही किसानों, तेंदूपत्ता संग्राहकों, श्रमिकों और युवाओं के कल्याण के लिए भी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और विकास का लाभ जरूरतमंदों तक बिना भेदभाव पहुंचाना है।

हेल्पलाइन और डिजिटल सेवाओं से सुशासन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने के लिए तकनीक के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू की गई है। इसके माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिए समय-सीमा और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।

उन्होंने कहा कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की लगभग 700 सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे नागरिकों को विभिन्न सेवाओं के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से भी सरकारी सेवाओं और वित्तीय लेन-देन को सरल बनाया जा रहा है।

पर्यटन और सिंचाई परियोजनाओं से विकास की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक विरासत और समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। राज्य में पर्यटन की संभावनाओं को देखते हुए धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से होमस्टे जैसी व्यवस्थाओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने सिरपुर बैराज और सिकासेर-कोडार लिंक परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किसानों की समृद्धि और कृषि उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगा। सरकार किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने और सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है।

धर्मेंद्र प्रधान ने गढ़फुलझर की धार्मिक विरासत को सराहा

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं संबलपुर सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि गढ़फुलझर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने मां रामचंडी मंदिर की धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए क्षेत्र को आस्था, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यहां गुरुद्वारे के निर्माण और लक्ष्मी-नारायण मंदिर के विकास से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।

प्रधान ने कहा कि बसना अंचल में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है। सर्वमंगल भवन का लोकार्पण सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और भाईचारे को मजबूत करेगा। उन्होंने कोलता समाज को मेहनतकश, कृषि से गहराई से जुड़ा और राष्ट्र तथा समाज के विकास में योगदान देने वाला समाज बताया।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। छत्तीसगढ़ के किसान धान उत्पादन और देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

सिरपुर की विरासत और मंदिर विकास का उल्लेख

महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि गढ़फुलझर श्रद्धा और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है तथा इसके समग्र विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कोलता समाज को उदार, मिलनसार और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला समाज बताया।

चौधरी ने सिरपुर के यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल होने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने मां रामचंडी मंदिर में सीढ़ियों के लिए शेड निर्माण हेतु सांसद निधि से राशि उपलब्ध कराने की घोषणा भी की।

अंचल के विकास के लिए प्रतिबद्धता दोहराई

बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि वार्षिक स्नेह सम्मेलन एवं बंधु मिलन सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने वाला आयोजन है। उन्होंने शिक्षा, कृषि, सेवा और सामाजिक क्षेत्र में कोलता समाज के योगदान की सराहना की तथा अंचल के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्धता जताई।

कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा महासमुंद जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, कोलता समाज के अध्यक्ष भुवनेश्वर सदावर्ती सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाज पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक और समाजजन उपस्थित रहे।

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