अन्नदाता के सम्मान से बदल रहा छत्तीसगढ़ का कृषि परिदृश्य

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  • Oct 31, 2026
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तीन वर्षों में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

15 नवंबर से शुरू होगा धान खरीदी का महाअभियान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ होगी खरीदी

लेखक: डॉ. ओम प्रकाश डहरिया, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

रायपुर, 31 अक्टूबर 2026। 

छत्तीसगढ़ की पहचान देश के धान के कटोरे के रूप में है। यहां की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का मजबूत आधार कृषि और किसान हैं। किसानों की समृद्धि को प्रदेश के विकास की आधारशिला मानते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बीते तीन वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसानों को उपज का बेहतर मूल्य दिलाने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, खेती को आधुनिक बनाने और कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

बीते तीन वर्षों में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी और किसानों को 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में धान उपार्जन के महत्व को दर्शाता है। राज्योत्सव के अवसर पर किसानों के हित में लिए गए फैसले छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

तीन वर्षों में 437 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में लगभग 144.92 लाख मीट्रिक टन और वर्ष 2024-25 में लगभग 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। वहीं, वर्ष 2025-26 में लगभग 142 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ।

इस तरह तीन खरीफ सीजन में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई और किसानों को लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस व्यवस्था से किसानों को उनकी उपज का मूल्य उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।

3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होगी धान खरीदी

किसानों के हित में राज्य मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने का निर्णय लिया है। इस वर्ष 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जाएगा।

किसानों की सुविधा के लिए एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन से छूट दी गई है। ऐसे किसानों को धान बेचने के लिए समिति में ऋण पुस्तिका ले जाने की आवश्यकता भी नहीं होगी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे का ऑनलाइन निर्धारण और बायोमेट्रिक आधारित खरीदी से प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

धान खरीदी व्यवस्था को और सुगम बनाने के लिए इस वर्ष 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जाएंगे। इसके बाद प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी।

कृषक उन्नति योजना से किसानों को 35,904 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए संचालित कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,904.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। वहीं, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के किसानों को अब तक 12,267.39 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की जा चुकी है।

आधुनिक खेती, सिंचाई और फसल विविधीकरण को बढ़ावा

कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए वर्ष 2024-25 से अब तक 8,567 कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं और 678 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 46,615 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार हुआ है। इसके लिए किसानों को 201.07 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है।

एग्रीस्टैक के माध्यम से प्रदेश के 19,751 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी की जा चुकी है और 43 लाख से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से कृषि संबंधी जानकारी और सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल रही है।

दलहन और तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत 29 जिलों के 273 केंद्रों से अरहर, सोयाबीन, चना, मसूर और सरसों की खरीदी की गई। इसके एवज में किसानों को 219.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के अंतर्गत 94,615 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार और 10 तेल निष्कर्षण इकाइयों की स्थापना प्रस्तावित है। इन प्रयासों का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और कृषि आधारित गतिविधियों को मजबूत करना है।

फसल बीमा और उर्वरक उपलब्धता पर विशेष जोर

किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से होने वाले आर्थिक जोखिमों से राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ एवं रबी 2025-26 में 16.70 लाख से अधिक किसानों ने बीमा कराया। इनमें से 1 लाख 40 हजार 730 किसानों को 292.43 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया।

कृषि कार्यों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खरीफ 2026 में 15.55 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 18.02 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरक का भंडारण किया गया। उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए निरीक्षण और कार्रवाई भी की गई है।

किसानों की खुशहाली से विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य

लगभग 40 लाख कृषक परिवारों और 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत किसानों वाले छत्तीसगढ़ में कृषि का विकास सीधे ग्रामीण समृद्धि से जुड़ा है। राज्योत्सव के अवसर पर किसानों के हित में किए जा रहे प्रयास प्रदेश की विकास यात्रा में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में धान खरीदी, आर्थिक सहायता, आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई सुविधाओं और फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। अन्नदाता की खुशहाली, खेती की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती ही विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार है।

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