युवाओं के आइडिया बनें स्टार्टअप, रोजगार मांगने के बजाय रोजगार देने वाले बनें : राज्यपाल डेका

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  • Oct 26, 2026
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आईटीएम विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में 16 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 4 शोधार्थियों को पीएचडी और 464 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां

रायपुर, 26 अक्टूबर 2026। 

राज्यपाल रमेन डेका ने युवाओं से अपने नए विचारों को स्टार्टअप में बदलने, नवाचार अपनाने और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है। युवाओं के विचार देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। स्टार्टअप की संभावनाएं अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों में भी नए उद्यम आकार ले रहे हैं। युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर अपनी पहचान स्वयं बनानी चाहिए।

राज्यपाल सोमवार को आईटीएम विश्वविद्यालय, रायपुर के 11वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में 16 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके साथ ही चार शोधार्थियों को पीएचडी और 464 विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर की उपाधियां दी गईं।

नौकरी पाने तक सीमित न रहें युवा, रोजगार सृजन पर भी दें ध्यान

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। युवा अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देकर नए उद्यम शुरू कर सकते हैं और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहने, बल्कि अपनी क्षमता, ज्ञान और रचनात्मकता के बल पर रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ने की अपील की।

राज्यपाल ने कहा कि युवा अपने आइडिया को स्टार्टअप में बदलें, अपनी जगह स्वयं बनाएं और सफलता हासिल करने के बाद समाज को न भूलें। समाज ने प्रत्येक व्यक्ति को बहुत कुछ दिया है, इसलिए उसके प्रति जिम्मेदारी का भाव हमेशा बना रहना चाहिए।

डिग्री मंजिल नहीं, नई जिम्मेदारियों की शुरुआत

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन की एक पारी के समापन और दूसरी पारी की शुरुआत का प्रतीक है। आगे का जीवन चुनौतियों और संघर्षों से भरा हो सकता है, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना किया जा सकता है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में करियर बनाना चाहिए, ताकि उन्हें काम में संतुष्टि मिले और वे सफलता हासिल कर सकें।

उन्होंने कहा कि डिग्री केवल एक प्रमाणपत्र नहीं है, बल्कि अर्जित ज्ञान और कौशल के माध्यम से परिवार, समाज और देश के प्रति अपने दायित्व निभाने का अवसर है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करना और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। युवाओं को डिग्री को अंतिम मंजिल मानने के बजाय निरंतर सीखने और नए प्रयोग करने की प्रवृत्ति बनाए रखनी चाहिए।

एआई के दौर में तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी

राज्यपाल ने कहा कि आज के विद्यार्थी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मोबाइल तकनीक के दौर में आगे बढ़ रहे हैं। इन तकनीकों के पीछे भी मानवीय बुद्धि का योगदान है। उन्होंने युवाओं को डिजिटल लत और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही, जरूरत के अनुसार मोबाइल का उपयोग करने और परिवार, मित्रों तथा समाज के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।

शांति और सुरक्षा से विकास को मिलती है गति

राज्यपाल ने कहा कि शांति और सुरक्षा विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के प्रभाव में कमी के बाद पैदा हुए विकास के अवसरों और बस्तर में आजीविका के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन स्थलों के विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

आत्मनिर्भर और विकसित भारत में युवाओं की अहम भूमिका

अपने संबोधन में राज्यपाल ने युवाओं से बड़े सपने देखने, उन्हें साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करने और असफलताओं से निराश हुए बिना नए प्रयोग करते रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में सभी का योगदान आवश्यक है। युवाओं को अपनी तरक्की के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए अपने ज्ञान और हुनर का उपयोग राष्ट्र के समग्र विकास के लिए करना चाहिए।

कुलपति ने दिया स्वागत भाषण

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामचंद्र जहांगीर ने स्वागत भाषण दिया। छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष वी.के. गोयल ने भी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम भादुड़ी, विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल एवं कार्य परिषद के सदस्य, प्राध्यापक, अभिभावक तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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