कासरगोड में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर संगोष्ठी, छात्र विरोध के बीच दो दिवसीय विमर्श संपन्न

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  • Oct 18, 2026
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राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने शोधपत्रों के प्रकाशन और वंदे मातरम् पर शोध शुरू करने का दिया सुझाव; साहित्य और इतिहास के संबंध पर भी हुई चर्चा

कासरगोड, 18 अक्टूबर 2026।

केरल के कासरगोड में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में साहित्य, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। केंद्रीय साहित्य अकादमी, अखिल भारतीय साहित्य परिषद और केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार, विरोध के बावजूद संगोष्ठी निर्धारित कार्यक्रम के तहत संपन्न हुई।

कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाएं हुईं। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल ने विरोध प्रदर्शन और संगोष्ठी की कार्यवाही को लेकर प्रसारित दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर गंभीर चर्चा हुई और विरोध के कारण इसकी कार्यवाही प्रभावित नहीं हुई।

साहित्य और इतिहास के संबंध पर हुआ मंथन

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में ‘प्रज्ञा प्रवाह’ के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार ने मुख्य वक्तव्य दिया। समापन सत्र में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के महासचिव डॉ. पवनपुत्र बादल ने साहित्य और इतिहास के परस्पर संबंधों पर विचार रखे।

उन्होंने कहा कि इतिहास घटनाओं को क्रम देता है, जबकि साहित्य उन्हें अर्थ प्रदान करता है। उन्होंने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ और 1905 के बंग-भंग विरोधी आंदोलन के संदर्भ में साहित्य की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारतीय एक-दूसरे की भाषाएं सीखकर बंकिमचंद्र और सुब्रमण्यम भारती जैसे रचनाकारों की रचनाएं पढ़ते थे।

राज्यपाल ने शोधपत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का दिया सुझाव

समापन सत्र के मुख्य अतिथि केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने आयोजकों को संगोष्ठी में प्रस्तुत शोधपत्रों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का सुझाव दिया। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति से ‘वंदे मातरम्’ विषय पर शोध कार्य शुरू करने की अपेक्षा व्यक्त की।

पहले दिन हुए छात्र विरोध का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस घटना को व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए और इसमें शामिल समूहों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और वंदे मातरम् के विरोध से जुड़े मामलों में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

छात्र संगठनों के विरोध को लेकर आयोजकों ने रखी अपनी बात

संगोष्ठी में शामिल होकर लौटे डॉ. पवनपुत्र बादल ने बताया कि विरोध प्रदर्शन में लगभग 15 से 20 स्थानीय छात्र शामिल थे। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्र स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई), मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) से जुड़े थे।

बादल ने दावा किया कि विरोध के बावजूद संगोष्ठी का सफल आयोजन केरल में राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े विमर्श के विस्तार का संकेत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों के परिणाम आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं।

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