किसानों की आय बढ़ाने की कसौटी पर प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का एक साल, दूसरे साल नतीजों पर जोर

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  • Oct 12, 2026
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गया अव्वल, नागौर दूसरे और मध्य प्रदेश का उमरिया जिला देश में तीसरे स्थान पर; 100 जिलों में कृषि विकास को गति देने की तैयारी

121 संकेतकों से हो रही निगरानी, छह प्रमुख क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले 18 जिलों को भी सम्मान

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के एक साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने अब योजना को कागजी कार्ययोजनाओं से आगे ले जाकर खेतों और किसानों की जिंदगी में ठोस बदलाव लाने पर जोर दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि योजना की असली सफलता किसानों की आय में बढ़ोतरी और कृषि व्यवस्था में दिखाई देने वाले मापने योग्य सुधारों से तय होगी। योजना के पहले वर्ष में मजबूत आधार तैयार किया गया, जबकि दूसरे वर्ष में कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने, फसल सघनता बढ़ाने, कृषि ऋण की पहुंच आसान करने और फसल कटाई के बाद भंडारण सुविधाएं मजबूत करने पर ध्यान रहेगा।
गया देश में पहले, नागौर दूसरे और उमरिया तीसरे स्थान पर
योजना के तहत सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन करने वाले जिलों में बिहार के गया ने पहला, राजस्थान के नागौर ने दूसरा और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा योजना के छह प्रमुख उद्देश्यों के तहत उल्लेखनीय काम करने वाले 18 जिलों को भी सम्मानित किया गया। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों सहित 370 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने 11 अक्टूबर को योजना के एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया।
छह क्षेत्रों में 18 जिलों के काम को सराहना
कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और सिक्किम के गेजिंग को सम्मानित किया गया। फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश के महोबा, मध्य प्रदेश के डिंडोरी और उत्तराखंड के चमोली को चुना गया। फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ और सीधी तथा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा को सम्मान मिला। सिंचाई अवसंरचना में सुधार के लिए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, गुजरात के दाहोद और छोटा उदयपुर को सराहा गया। अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाने के लिए तेलंगाना के नारायणपेट, उत्तर प्रदेश के जालौन और आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले को सम्मानित किया गया। बेहतर शासन और सेवा वितरण के लिए तेलंगाना के नगर कुरनूल, गुजरात के कच्छ और कर्नाटक के हावेरी को मान्यता दी गई।
121 संकेतकों से निगरानी, जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
योजना का आधार जिला-केंद्रित कृषि विकास है। इसके तहत हर जिले की मिट्टी, वर्षा, फसल पैटर्न, जल उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और किसानों की जरूरतों के मुताबिक कार्ययोजना तैयार की जाती है। योजना के प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए समर्पित डैशबोर्ड बनाया गया है, जहां 121 संकेतकों के आधार पर जिलों की प्रगति मापी जाती है। मासिक रैंकिंग से पारदर्शिता और जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिला धन-धान्य समितियों की भूमिका को भी अहम माना गया है। कृषि विभाग के सचिव ने राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, जिला नोडल अधिकारियों, केंद्रीय नोडल अधिकारियों, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों के योगदान की सराहना की।
स्थानीय जरूरतों के मुताबिक समाधान पर जोर
कार्यक्रम में गढ़चिरोली जिले ने जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन से जुड़े काम प्रस्तुत किए। अल्लूरी सीताराम राजू जिले ने उच्च मूल्य वाली बागवानी को बढ़ावा देने की पहल साझा की, जबकि बांका जिले ने लिलावरन प्राकृतिक कृषि भूमि पुनरुद्धार मॉडल का प्रदर्शन किया। इन उदाहरणों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं बनाने, विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने और किसानों की भागीदारी से कृषि चुनौतियों का समाधान करने की संभावनाएं सामने आईं।
22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलेगा खेत बचाओ अभियान
केंद्रीय मंत्री चौहान ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक सभी राज्यों में आयोजित होने वाले खेत बचाओ अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। अभियान का उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण इस्तेमाल के जरिए मिट्टी की सेहत सुधारना है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण की रक्षा करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन बचाने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाना जरूरी है। उन्होंने राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साथ समन्वय बढ़ाकर जिला कार्ययोजनाओं को जमीन पर उतारने तथा सफल पहलों को सभी चिन्हित जिलों में व्यापक स्तर पर लागू करने पर जोर दिया।
11 मंत्रालयों की 36 योजनाएं एक ढांचे में
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत 11 अक्टूबर 2025 को हुई थी। इसके तहत कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वितरण वाले 100 जिलों को शामिल किया गया है। योजना का लक्ष्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता विकसित करना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना तथा अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण की उपलब्धता आसान बनाना है। इसके लिए 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को संबंधित राज्य सरकारों की योजनाओं के साथ एक समन्वित ढांचे में जोड़ा गया है।
दूसरे वर्ष में किसान तक पहुंचना लक्ष्य
सरकार का जोर अब पहले वर्ष में तैयार आधार को किसानों के लिए प्रत्यक्ष लाभ में बदलने पर है। बेहतर उत्पादकता, उन्नत कृषि पद्धतियां, मजबूत भंडारण और सिंचाई व्यवस्था तथा संस्थागत ऋण तक आसान पहुंच इसके प्रमुख लक्ष्य हैं। योजना के दूसरे वर्ष में केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और किसान समुदाय के समन्वय से सभी 100 जिलों को कृषि प्रगति, समृद्धि और किसान कल्याण के आदर्श बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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