भारतीय चाय को वैश्विक पहचान दिलाने की जरूरत, अनुसंधान और आधुनिकीकरण पर जोर

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  • Sep 21, 2026
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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कूनूर में उपासी चाय अनुसंधान फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन का किया उद्घाटन

कूनूर, 21 सितंबर। भारत की चाय को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावशाली बनाने के लिए अनुसंधान, आधुनिकीकरण, ब्रांडिंग और मूल्य-वर्धन पर व्यापक स्तर पर काम करने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को नीलगिरी के कूनूर में यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (उपासी) चाय अनुसंधान फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।

उपराष्ट्रपति ने फाउंडेशन के चाय उद्योग, बागान मालिकों और श्रमिकों की सेवा के 100 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी और चाय क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए उसके सदी भर के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में केवल चाय की खेती बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके कुशल प्रसंस्करण, उत्पादन और विपणन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

लागत, गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने वाले अनुसंधान पर जोर

उपराष्ट्रपति ने चाय क्षेत्र में विशेष रूप से ऐसे अनुसंधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई, जिससे लागत में कमी, गुणवत्ता में सुधार और उत्पादकता में वृद्धि हो सके। उन्होंने बागान मालिकों को गुणवत्ता मानकों तथा बदलती बाजार जरूरतों के अनुरूप उत्पादन के लिए लगातार प्रशिक्षित और जागरूक करने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वैश्विक चाय बाजार में प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। चाय उत्पादक दूसरे देशों से मिल रही चुनौती के बीच भारत को अपनी चाय की मार्केटिंग बेहतर करने, राजस्व बढ़ाने और निरंतर अनुसंधान व नवाचार के माध्यम से बागान क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने पर ध्यान देना होगा।

उपराष्ट्रपति ने चाय उद्योग से जुड़े हितधारकों से चाय क्षेत्र की जरूरतों का व्यवस्थित आकलन करने और ठोस परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने अनुसंधान के लिए विशेषज्ञों और पेशेवरों की पहचान करने, चाय कारखानों को आधुनिक बनाने तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन के लिए आवश्यक तकनीकी उन्नयन करने की जरूरत भी रेखांकित की।

थोक बिक्री से आगे बढ़कर मजबूत भारतीय ब्रांड बनाने का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने चाय उत्पादकों और निर्यातकों से केवल थोक में चाय बेचने की परंपरा से आगे बढ़कर मजबूत भारतीय चाय ब्रांड विकसित करने का आह्वान किया। विदेश यात्राओं के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कई देशों के चाय ब्रांड बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं, जबकि भारतीय चाय ब्रांडों की मौजूदगी और पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि सभी संबंधित पक्ष मिलकर भारतीय चाय को मजबूत ब्रांड के तहत वैश्विक बाजार में पेश करें। इससे भारतीय चाय की बाजार स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ उसकी कीमत और उद्योग का राजस्व बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

शताब्दी वर्ष में अनुसंधान नेटवर्क को मिले नया विस्तार

सी. पी. राधाकृष्णन ने उपासी से अपने शताब्दी वर्ष को चाय अनुसंधान नेटवर्क के विस्तार और अनुसंधान केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उभरती चुनौतियों और नए अवसरों के अनुरूप अनुसंधान में निरंतर बदलाव और विकास जरूरी है।

उन्होंने चाय उद्योग में बागान श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उनके कल्याण पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उद्योग की प्रगति और स्थिरता के लिए श्रमिकों का कल्याण उसका अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा, “उद्योग और श्रमिकों का कल्याण साथ-साथ होना चाहिए।”

चाय में मूल्य-वर्धन से नए बाजारों की तलाश

उपराष्ट्रपति ने चाय में मूल्य-वर्धन को भी उद्योग की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रमुख हितधारकों से नए उत्पादों, नई प्रक्रियाओं और नए बाजार अवसरों की पहचान के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत के पास दुनिया के बड़े चाय उत्पादक और उपभोक्ता देशों में शामिल होने का लाभ है। इसलिए चाय उद्योग को अपने विशाल घरेलू बाजार का व्यापक उपयोग करना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियां चाय क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को सरकार के साथ मिलकर उद्योग को मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करती हैं।

चाय अनुसंधान की दक्षिण भारतीय विरासत पर पुस्तक का विमोचन

शताब्दी सम्मेलन में चाय और बागान क्षेत्र से जुड़े बागान मालिक, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक एकत्र हुए। सम्मेलन में चाय अनुसंधान और बागान उद्योग के भविष्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने “टी रिसर्च इन साउथ इंडिया – ए कम्पेंडियम” पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में दक्षिण भारत में चाय अनुसंधान की समृद्ध विरासत और इस क्षेत्र में हुए महत्वपूर्ण योगदानों का विवरण प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, उदगमंडलम के विधायक भोजराजन, भारतीय चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष सी. मुरुगन, उपासी के अध्यक्ष अजय थिपैया सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति, बागान मालिक, कृषि वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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