मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में RSS के पथ संचलन को दी अनुमति, पुलिस के रवैये पर की टिप्पणी

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  • Oct 16, 2026
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25 अक्टूबर और 1 नवंबर को होंगे रूट मार्च; अदालत ने पुलिस को आयोजकों के साथ समय और स्थान तय करने के निर्देश दिए

चेन्नई।

मद्रास उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में पथ संचलन (रूट मार्च) निकालने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने अनुमति देने से बार-बार इनकार किए जाने पर राज्य पुलिस के रवैये की आलोचना की। अदालत ने कहा कि पहले के न्यायिक आदेशों में जिन कारणों को स्वीकार नहीं किया गया था, पुलिस उन्हीं आधारों पर लगातार अनुमति रोक रही है।

न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने टिप्पणी की कि पुलिस ने अनुमति से इनकार करने के लिए कोई नया कारण नहीं खोजा है, बल्कि उन्हीं कारणों को दोहराया है, जिन्हें अदालत पहले ही निराधार मान चुकी है। न्यायालय ने पुलिस को मामले को और लंबा न खींचने तथा आयोजकों के साथ समन्वय कर पथ संचलन और उसके बाद होने वाली जनसभाओं के समय एवं स्थान तय करने का निर्देश दिया।

धार्मिक स्थलों और कानून-व्यवस्था का दिया गया था हवाला

मामले के अनुसार, RSS के एक कार्यकर्ता ने 3 अक्टूबर को संघ स्थापना दिवस और विजयादशमी के उपलक्ष्य में पथ संचलन एवं कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। इसके लिए 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर की तिथियां प्रस्तावित की गई थीं। पुलिस अधिकारियों ने आवेदनों को खारिज करते हुए प्रस्तावित मार्गों पर अन्य समुदायों के धार्मिक स्थलों और विभिन्न नेताओं की मूर्तियों की मौजूदगी, यातायात बाधित होने, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी संभावित समस्याओं का हवाला दिया था।

न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने कहा कि RSS से संबंधित पिछले मामलों में इन आधारों पर पहले ही विचार किया जा चुका है। अदालत ने पूर्व के न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानूनी प्रतिबंधों और निर्धारित शर्तों के अधीन संगठन को पथ संचलन निकालने का अधिकार है।

सार्वजनिक सड़कों को लेकर पुराने फैसले का उल्लेख

अदालत ने 2023 के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक सड़कें धर्मनिरपेक्ष स्थान हैं और धर्म, जाति या पंथ के भेदभाव के बिना सभी लोगों की पहुंच में हैं।

न्यायालय ने पुलिस के रवैये पर टिप्पणी करते हुए एक उदाहरण दिया कि जिस शल्य चिकित्सा उपकरण का उपयोग मरीज का उपचार करने के लिए होना चाहिए, उसका इस्तेमाल उसी मरीज को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। अदालत ने भविष्य में विवाद से बचने के लिए संबंधित विवरणों को आदेश के साथ संलग्न करने का भी निर्देश दिया।

पुलिस और आयोजकों, दोनों को दिए निर्देश

न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे अनुमति संबंधी आवेदनों में कमियां तलाशने के बजाय नियमानुसार मंजूरी देने की प्रक्रिया पर ध्यान दें। साथ ही, आयोजकों से भी अपील की कि वे कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त समय पहले आवेदन प्रस्तुत करें।

अदालत ने उम्मीद जताई कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने और पुलिस तथा आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय से भविष्य में ऐसे विवादों को टाला जा सकेगा और इस तरह के मामलों में न्यायालय का समय खर्च नहीं होगा।

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