बस्तर के जनजातीय समाज से सीखें प्रकृति संरक्षण, राष्ट्रपति मुर्मु ने दिया विकास का मंत्र

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  • Oct 23, 2026
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बस्तर दशहरा को बताया छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आस्था का प्रतीक

राष्ट्रपति ने नक्सलवाद से मुक्ति के बाद क्षेत्र की प्रगति पर जताया भरोसा

 राष्ट्रपति ने  जनजातीय उद्यमियों को बाजार से जोड़ने की पहल को बताया समावेशी विकास की राह

 

जगदलपुर | 23 अक्टूबर 2026
प्रकृति को बचाना है तो बस्तर के जनजातीय समाज से सीखें। विकास की दौड़ में पर्यावरण को पीछे छोड़ने के बजाय प्रकृति के साथ संतुलन बनाना जरूरी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को बस्तर दशहरा के मंच से यही संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवनदायिनी प्रकृति की पूजा करने वाले जनजातीय समुदायों की प्रकृति-पोषक जीवनशैली पूरे समाज के लिए मूल्यवान सीख है। प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन विकास की यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।

बस्तर दशहरा में दिखती है पूरे समाज की एकजुटता

राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा को छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आस्था का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में पूरे समाज की जिस तरह सहभागिता होती है, वह असाधारण है। समाज के विभिन्न वर्गों को आत्मीयता से जोड़ने वाले अनेक अनुष्ठान बस्तर दशहरा को विशिष्ट और आकर्षक बनाते हैं। यह उत्सव सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था की अनूठी मिसाल है।

नक्सलवाद से मुक्ति के बाद विकास की नई राह

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सलवाद का दंश झेला है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से यह क्षेत्र नक्सली आतंक से मुक्त हो चुका है और अब तेजी से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सहायता देकर बाजार से जोड़ने की पहल तेज किए जाने पर प्रसन्नता जताई। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से समतापरक और समावेशी विकास को गति मिलेगी तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

जनजातीय जीवनशैली में प्रकृति संरक्षण का संदेश

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदाय जीवनदायिनी प्रकृति की पूजा करते हैं। विकास की यात्रा में उनकी प्रकृति-पोषक जीवन पद्धति से उपयोगी शिक्षा ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकास की दिशा में महत्वपूर्ण आधार है।

मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन, मुरिया दरबार में संवाद

सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले राष्ट्रपति ने जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मुरिया दरबार में स्थानीय मांझी और चालकी के साथ संवाद किया। जगदलपुर में राष्ट्रपति ने रंगोली तथा दशहरा प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

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