करम परब जनजातीय संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

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  • Oct 28, 2026
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गनोद में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन बनाने की घोषणा

रायपुर, 28 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम परिसर में उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ, रायपुर द्वारा आयोजित करम पूजा परब 2026 में शामिल हुए। उन्होंने करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भारत माता के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि करम परब छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आस्था, प्रेम और सम्मान की भावना को अभिव्यक्त करता है। पूर्वजों ने प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की जो परंपरा विकसित की, वह आज भी समाज को महत्वपूर्ण संदेश देती है। करम परब प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता और सामूहिक जीवन के मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपर्वों और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव से है। प्रदेश के विभिन्न जनजातीय समाजों ने अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजकर रखा है। करम परब भी ऐसी ही गौरवशाली परंपरा है, जिसमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यह पर्व अपनी जड़ों से जुड़े रहने तथा प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है।

नई पीढ़ी को संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति और परंपराएं केवल उत्सव मनाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें पूर्वजों का ज्ञान, जीवनमूल्य और समाज को एकजुट रखने की भावना समाहित है। इन परंपराओं को जीवंत बनाए रखना और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। नई पीढ़ी जब अपनी भाषा, लोकगीतों, लोकनृत्यों और पारंपरिक पर्वों से जुड़ी रहेगी, तभी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत निरंतर आगे बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि करम परब जैसे आयोजन समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। ऐसे अवसरों पर नई पीढ़ी को समाज के वरिष्ठजनों से अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों को जानने-समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने उरांव समाज द्वारा सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

गनोद में 50 लाख रुपये से बनेगा सामुदायिक भवन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर रायपुर जिले के गनोद गांव में उरांव समाज के लिए 50 लाख रुपये की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भवन बनने से समाज के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियों के आयोजन के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। इससे समाज को एकजुट होकर अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की विविध जनजातीय परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनमें प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता, परस्पर सहयोग और सामाजिक समरसता का संदेश निहित है। अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करने के साथ उनका संरक्षण एवं संवर्धन करना सभी का नैतिक दायित्व है।

करम पूजा परब की दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री साय ने उपस्थित लोगों को करम पूजा परब की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सांस्कृतिक विरासत ही हमारी पहचान और शक्ति है। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए तथा समाज में प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना निरंतर मजबूत होती रहे।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, समाज प्रमुख बिन्देश्वर भगत, उरांव (सरना) आदिवासी विकास संघ के पदाधिकारी, समाज के वरिष्ठजन, सदस्य और बड़ी संख्या में समाज के परिवारजन उपस्थित थे।

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