बेमेतरा के ग्राम जनता में कृषक-वैज्ञानिक संवाद

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  • Oct 29, 2026
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खेत की सेहत बचाने पर जोर, किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर खाद डालने की सलाह

 

बेमेतरा,  29 अक्टूबर 2026। खेतों की उर्वरता बनाए रखने और खेती को टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के तहत ग्राम पंचायत जनता में कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर ने कृषि विज्ञान केंद्र, बेमेतरा और संबंधित कृषि विभाग के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें ग्राम पंचायत की सरपंच पूजा मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 35 किसानों ने भाग लिया।

मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एस.के. जैन और डॉ. मल्लिकार्जुन जीर ने किसानों से संवाद कर मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, जैविक और प्राकृतिक खेती तथा फसल अवशेष प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत में सुधार, उर्वरकों के संतुलित और आवश्यकता-आधारित उपयोग को बढ़ावा देना, टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना तथा जल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना है।

रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने की सलाह

किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई। वैज्ञानिकों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर अनावश्यक निर्भरता कम करने के लिए जैविक खाद, कम्पोस्ट और अन्य उपलब्ध जैविक संसाधनों का समुचित उपयोग किया जाना चाहिए। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने और उसकी उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से टिकाऊ खेती

कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर कृषि उत्पादन को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया। किसानों ने वैज्ञानिकों से कृषि संबंधी समस्याओं पर चर्चा की और टिकाऊ खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। कृषक-वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से किसानों को संसाधनों के संरक्षण पर आधारित कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया गया।

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