नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर में जवानों संग प्रधानमंत्री मोदी ने मनाई दीवाली

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  • Nov 08, 2026
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47 साल में पहली बार ड्यूटी के दौरान एक साल में सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं

50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर, नक्सली हिंसा का भी अंत


बस्तर | 8 नवंबर 2026
बस्तर की धरती पर इस बार दिवाली का उत्सव एक ऐतिहासिक उपलब्धि के नाम रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। नक्सलवाद के खिलाफ दशकों तक चली लड़ाई में मिली निर्णायक सफलता के बाद प्रधानमंत्री ने जवानों के बीच पहुंचकर उनके साहस, बलिदान और समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। यह उपलब्धि केवल सुरक्षा बलों की जीत नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों को भय से मुक्ति मिलने का अवसर भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ। 47 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है। यह देश की ठोस नीतियों, मजबूत इच्छाशक्ति और जवानों की वीरता, साहस तथा संयम की जीत है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई में सफलता के साथ देश ने गरीबी के मोर्चे पर भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले 12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं।
जवानों को बताया अपना परिवार
करनपुर का कोबरा ऑपरेशंस बेस बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र और अभियान शुरू करने का प्रमुख आधार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देश और दुनिया में करोड़ों भारतीय अपने परिवारों के साथ रोशनी का त्योहार मना रहे हैं, तब सीमाओं और देश के भीतर सुरक्षा में तैनात जवान राष्ट्र की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कारगिल, हिमालय के लेपचा, तटीय क्षेत्र के सर क्रीक और समुद्र में आईएनएस विक्रांत पर सैनिकों के साथ मनाई गई दिवाली के अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने कहा, "सीमाओं पर और देश के भीतर, जो देश की रक्षा करते हैं, मां भारती के वे बहादुर बेटे—आप सभी मेरे अपने हैं, आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं।"
उन्होंने बताया कि इस बार की दिवाली इसलिए विशेष है, क्योंकि भारत ने माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई में जीत हासिल की है। वह इस उपलब्धि का उत्सव उन लाखों सुरक्षाकर्मियों के साथ मनाने और 140 करोड़ देशवासियों की ओर से उनका आभार व्यक्त करने बस्तर आए हैं। उन्होंने जवानों के बलिदान, समर्पण और सेवा भाव के प्रति कृतज्ञता जताई।
आंतरिक सुरक्षा मजबूत तो बाहरी दुश्मन भी नहीं कर सकते नुकसान
प्रधानमंत्री ने संस्कृत के प्राचीन श्लोक 'आभ्यन्तरं भयं रक्ष्याम्, असारं बाह्यतो भयम्' का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, उसे बाहरी दुश्मन नुकसान नहीं पहुंचा सकते। इसके विपरीत, आंतरिक सुरक्षा कमजोर होने पर बाहरी दुश्मनों को सिर उठाने का मौका मिलता है। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा में जुटे जवानों की भूमिका की तुलना सीमाओं पर तैनात सशस्त्र बलों से की।
उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी, राज्य पुलिस बलों, बस्तर फाइटर्स कमांडो और महिला लड़ाकों के योगदान तथा असीम बलिदानों की सराहना की। देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों को भी दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश उनकी सेवाओं का ऋणी है और करोड़ों नागरिकों को उन पर गर्व है।
230 से अधिक जिलों में था नक्सलवाद का आतंक
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के भयावह दौर को याद करते हुए कहा कि कभी बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले वामपंथी उग्रवाद की चपेट में थे। इन क्षेत्रों में शाम होते ही कर्फ्यू जैसे हालात बन जाते थे। लोगों से मतदान का अधिकार छीन लिया गया था और हर साल करीब 2,000 नक्सली हमले होते थे।
अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई। कई जवान आईईडी विस्फोटों में अपने अंग खो बैठे। वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुए अलग-अलग हमलों में सीआरपीएफ के 76 जवान और 44 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2013 के बीच हर साल मारे गए नक्सलियों की तुलना में शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या अधिक रही। इससे माओवादी नेताओं के हौसले बढ़ते गए।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने दुश्मनों के प्रति नरम रुख अपनाकर तरक्की नहीं कर सकता। इसके लिए ऊंचे मनोबल और रणनीतिक तरीके से उनका सफाया करना जरूरी है। वर्ष 2014 के बाद दशकों से चली आ रही उस स्थिति को बदला गया, जिसमें सुरक्षा बलों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता था। पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं होना इसी बदलाव का ऐतिहासिक प्रमाण है।


नक्सलियों की आर्थिक और हथियार आपूर्ति व्यवस्था तोड़ी
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता के लिए सही इरादे और प्रभावी नीतियां दोनों जरूरी हैं। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई कड़े फैसले लिए, जिनमें से कुछ सार्वजनिक भी नहीं किए गए। इन फैसलों से नक्सलियों और अलगाववादियों के धन जुटाने के स्रोतों पर चोट हुई तथा नकली नोटों का नेटवर्क ध्वस्त हुआ।इससे नक्सलियों का आर्थिक आधार कमजोर हुआ और उनकी पूरी आपूर्ति व्यवस्था ठप पड़ गई। हथियारों की आपूर्ति बाधित हुई, आवाजाही पर अंकुश लगा और नए लोगों की भर्ती करना भी मुश्किल हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा बलों को जरूरी फैसले लेने की पूरी कामकाजी स्वतंत्रता दी। बिना प्रचार और दिखावे के एक ही लक्ष्य पर काम किया गया कि किसी मां का बच्चा उससे न बिछड़े, कोई परिवार बर्बाद न हो और कोई युवा हथियार उठाने को मजबूर न हो।


सुरक्षा अभियान के साथ जनसेवा ने बदली तस्वीर
प्रधानमंत्री ने कहा कि माओवादी आतंक की कमर तोड़ने वाले संवेदनशील सुरक्षा अभियानों को जनसेवा की भावना से जोड़ा गया। इससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का जीवन बदला और माओवाद से पीड़ित नागरिक सरकार तथा सुरक्षा बलों के साथ मजबूती से खड़े हुए। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय नागरिकों के सहयोग की भी सराहना की।उन्होंने कहा कि 'राष्ट्र प्रथम' की भावना से किए गए प्रयासों से शांति और सुरक्षा स्थापित होती है, देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है और गरीबों तथा वंचितों की राष्ट्रीय प्रगति में भागीदारी बढ़ती है। पिछले 12 वर्षों में देश ने नक्सलवाद और अलगाववाद के साथ-साथ गरीबी के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई जीती है।


50 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर
प्रधानमंत्री ने दिवाली से ठीक पहले जारी विश्व बैंक की बहुचर्चित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की तुलना दिवाली की रंगोली से की, जिसमें अलग-अलग छोटी रेखाएं मिलकर एक सुंदर और भव्य चित्र बनाती हैं।
उन्होंने बताया कि जनधन बैंक खाते, प्रधानमंत्री आवास योजना के पक्के मकान, बिना गारंटी के मुद्रा ऋण, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए स्वनिधि योजना, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सुरक्षा, हर महीने मुफ्त राशन, बच्चों की शिक्षा से जुड़ी नीतियां, स्वच्छ भारत अभियान और हर घर जल जैसी योजनाओं ने मिलकर गरीब परिवारों की जिंदगी बदली है। इनसे लोगों को मुफ्त दवा, शिक्षा और भोजन जैसी सुविधाएं मिलीं तथा परिवारों की बुनियादी चिंताएं कम हुईं। पीढ़ियों से गरीबी में जी रहे परिवारों को बेहतर भविष्य की उम्मीद मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले गरीब परिवारों का पूरा जीवन चिंताओं में बीत जाता था, लेकिन अब उन्हें सरकार का भरोसा मिला है और उनमें नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है।
नक्सलवाद ने रोकी थी विकास की राह
प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीबी के खिलाफ मिली सफलता नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई से गहराई से जुड़ी है। नक्सलवाद ने लाखों निर्दोष नागरिकों को अभाव में धकेला। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल और मेडिकल दुकानें बाधित की गईं। पोलियो टीकाकरण अभियान में रुकावट डाली गई, मोबाइल टावर और उद्योग स्थापित नहीं होने दिए गए तथा रेलवे पटरियों को बम विस्फोट से उड़ाया गया।
सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ इन क्षेत्रों में विशेष विकास अभियान भी चलाए। इसके तहत 15 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें बनाई गईं और 9,500 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए। करीब 175 एकलव्य विद्यालय, लगभग 50 आईटीआई और 50 कौशल विकास केंद्र शुरू किए गए। हजारों डाकघर, बैंक शाखाएं और एटीएम भी स्थापित किए गए। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई। वहीं, प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से दूरदराज के आदिवासी गांवों तक पहली बार पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गईं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई शुरू करने के साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष अभियान भी चलाए गए, ताकि हिंसा से प्रभावित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
बस्तर ओलंपिक बना बदलाव का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' के संकल्प ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई को नई ऊर्जा दी, नक्सली हिंसा को समाप्त करने में मदद की और 50 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकालने में भूमिका निभाई। बस्तर में आए बदलाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने 'बस्तर ओलंपिक' का उल्लेख किया। कहा कि आज यहां बच्चे बंदूकों के बजाय खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। यह क्षेत्र में शांति, विश्वास और बदलते सामाजिक परिवेश का प्रतीक है।
सुरक्षा बलों के बलिदान से बनेगा विकसित भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की उपलब्धियां अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत हैं। देश की नई उड़ान स्वतंत्रता सेनानियों, सीमाओं पर तैनात सैनिकों और नक्सलवाद व आतंकवाद से लड़ते हुए प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के सपनों को पूरा करेगी। उन्होंने सुरक्षा बलों से 'तेरा गौरव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें' की भावना को अब नए आत्मविश्वास और देश के लिए जीने के संकल्प में बदलने का आह्वान किया।
उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने, हर घर में शौचालय बनाने और टीकाकरण अभियान का विस्तार करने जैसे बड़े राष्ट्रीय संकल्पों को पूरा करने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि इसी दृढ़ इच्छाशक्ति से भारत गरीबी को जड़ से मिटाने के साथ नशामुक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य भी हासिल करेगा। उन्होंने सभी से इन सपनों को साकार करने के लिए जुटने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने जवानों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका बलिदान और कड़ी मेहनत विकसित भारत की भव्य इमारत की मजबूत आधारशिला बनेगी।

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