भोपाल में अभाविप का ‘विद्यार्थी हुंकार’ प्रदर्शन, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने का आह्वान

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  • Oct 24, 2026
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अटल पथ पर निकाली रैली, ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ का दिया संदेश; राष्ट्रीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह सोलंकी और प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों को किया संबोधित

भोपाल, 24 अक्टूबर 2026। 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के भोपाल महानगर इकाई ने शनिवार को टीटी नगर स्थित अटल पथ पर ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ आह्वान के तहत विद्यार्थी हुंकार प्रदर्शन आयोजित किया। प्रदर्शन में अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी और मध्यभारत प्रांत के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी उपस्थित रहे। आयोजन में शामिल विद्यार्थियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने रैली निकालकर ‘अराजकता रोको, लोकतंत्र अपनाओ’ का संदेश दिया। आयोजकों ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था संविधान, कानून और जनता के मताधिकार पर आधारित है। लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने या अराजकता के माध्यम से राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के प्रयासों से बचना चाहिए। निर्वाचन प्रक्रिया अथवा संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों का समाधान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।

युवाओं की भूमिका पर वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने रखे विचार

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने अपने संबोधन में मध्य प्रदेश में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए युवा शक्ति की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक समय प्रदेश में शिक्षा और बुनियादी व्यवस्थाओं की स्थिति खराब थी और विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए चिमनी की रोशनी पर निर्भर रहना पड़ता था। उनके अनुसार, आज मध्य प्रदेश आगे बढ़ रहा है और यह युवाओं की शक्ति का उदाहरण है।

सोलंकी ने राम मंदिर और सनातन परंपरा को लेकर राजनीतिक विरोध के संदर्भ में भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युवाओं की ताकत का प्रभाव है कि जो लोग पहले राम मंदिर और सनातन परंपरा का विरोध करते थे, वे भी अब सनातन यात्रा करते दिखाई दे रहे हैं।

केतन चतुर्वेदी ने अराजकता के प्रयासों पर जताई चिंता

अभाविप के मध्यभारत प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि कुछ लोग देश में अराजकता फैलाने और भारत की व्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति ऐसे प्रयासों को समझती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उसकी आस्था मजबूत है।

चतुर्वेदी ने जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने वालों पर सवाल उठाए और कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा तिरंगा जलाए जाने की घटनाओं के संदर्भ में उनकी भूमिका पर प्रश्न किया। उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और उसकी अध्यक्ष नेहा बोरा को लेकर भी आरोप लगाए तथा संगठन पर आतंकवादियों के समर्थन में मार्च निकालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी और नागरिक संवैधानिक व्यवस्था के प्रति अपनी आस्था बनाए रखेंगे।

संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर मतभेदों के समाधान पर जोर

अभाविप ने कहा कि भारत का लोकतंत्र जनता के विश्वास, मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर आधारित है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक और वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उनका समाधान संवैधानिक मर्यादाओं के अंतर्गत होना चाहिए।

संगठन के अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों से लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग रहने और संवैधानिक व्यवस्था की मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया गया।

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