पुराना किला में जला ‘आशीर्वाद का दीया’, सेवा और विकसित भारत के संकल्प के साथ मनाया प्रधानमंत्री का जन्मदिन

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  • Sep 18, 2026
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नई दिल्ली, 18 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय ने 17 सितंबर को पुराना किला में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में सेवा, संस्कृति, कृतज्ञता और विकसित भारत के संकल्प को केंद्र में रखा गया।

शेखावत ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ महज एक दीपक नहीं, बल्कि जनआशीर्वाद, सेवा और राष्ट्र निर्माण के सामूहिक संकल्प का प्रतीक है। भारतीय परंपरा में दीपक स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने और अंधकार दूर करने का संदेश देता है। इसी भावना के साथ यह आयोजन राष्ट्रसेवा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को अभिव्यक्त करता है।

प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक विभिन्न जिम्मेदारियों में राष्ट्रसेवा, लोककल्याण और विकास के प्रति उनका संकल्प निरंतर रहा है।

परिणाम आधारित शासन को बताया सुशासन का आधार

शेखावत ने प्रधानमंत्री के साथ काम करने के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री के साथ-साथ समर्पित कार्यकर्ता, साधक, संगठनकर्ता और मार्गदर्शक के रूप में भी देखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की कार्यशैली में सार्वजनिक पद को प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा के माध्यम के रूप में देखने की भावना प्रमुख है।

उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं की सफलता केवल फाइलों और आंकड़ों में नहीं, बल्कि समाज और अंतिम व्यक्ति के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से तय होती है। उनके अनुसार जनकल्याण के रूप में सामने आने वाला परिणाम ही सुशासन का वास्तविक पैमाना है।

‘विकास भी, विरासत भी’ पर जोर

शेखावत ने कहा कि 2014 के बाद देश ने विकास और सुशासन की नई यात्रा देखी है। जनभागीदारी के माध्यम से विकास को आगे बढ़ाने और जनता के विश्वास को मजबूत करने के प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा कि विरासत और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।

उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। भारत की शास्त्रीय, लोक और पारंपरिक सांस्कृतिक परंपराओं को सभ्यतागत चेतना की अमूल्य विरासत बताते हुए उन्होंने कहा कि इनके संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी, कथक केंद्र, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, ललित कला अकादमी और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के कलाकारों एवं विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दीं।

कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री ने कलाकारों, विद्यार्थियों, राष्ट्रीय संस्कृति कोष के प्रतिनिधियों, ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ पहल से जुड़े लोगों और अन्य हितधारकों से संवाद किया। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार में उनके योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम का समापन ‘आशीर्वाद का दीया’ के सामूहिक प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर सेवा, संस्कृति, राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के संकल्प को दोहराया गया।

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