नक्सलवाद और भय से बाहर निकलकर नई संभावनाओं की ओर छत्तीसगढ़ : उपराष्ट्रपति

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  • Sep 02, 2026
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एम्स रायपुर के दीक्षांत समारोह में सी. पी. राधाकृष्णन का आह्वान—तकनीक के साथ करुणा और ईमानदारी को चिकित्सा सेवा का आधार बनाएं

 

रायपुर, 2 सितंबर 2026। चिकित्सा विज्ञान तेजी से बदल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीमेडिसिन और डिजिटल तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और स्वरूप को बदल रही हैं। लेकिन इन बदलावों के बीच एक चीज ऐसी है, जिसकी जगह कोई तकनीक नहीं ले सकती—मानवीय संवेदना और करुणा। यही संदेश उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने एम्स रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में युवा चिकित्सकों को दिया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक सफल चिकित्सक बनने के लिए केवल चिकित्सा ज्ञान और पेशेवर उत्कृष्टता पर्याप्त नहीं है। चिकित्सा क्षेत्र में संवेदनशीलता, करुणा, ईमानदारी और समावेशिता भी उतनी ही आवश्यक हैं। उन्होंने युवा डॉक्टरों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग विशेष रूप से वंचित वर्गों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए करने का आह्वान किया।

‘जीवनभर सीखते रहें, क्योंकि चिकित्सा विज्ञान लगातार बदल रहा है’

उपराष्ट्रपति ने युवा चिकित्सकों को याद दिलाया कि दीक्षांत समारोह उनकी शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। उन्होंने उन्हें जीवनभर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

आज चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकें लगातार दस्तक दे रही हैं। ऐसे में डॉक्टरों को बदलती तकनीक के साथ स्वयं को भी निरंतर अपडेट करना होगा। उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

उनके संदेश का सार यही था कि तकनीक का उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच दूरी बढ़ाना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना होना चाहिए।

तकनीक की ताकत पहुंचे वंचितों तक

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है—हर व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाना। दूरदराज के इलाकों और वंचित समुदायों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच अब भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।

ऐसे में टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य जैसी तकनीकें बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उपराष्ट्रपति ने युवा डॉक्टरों से आह्वान किया कि वे अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल समाज के उन वर्गों के लिए करें, जिन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक जरूरत है।

यह संदेश खास तौर पर छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है।

नक्सलवाद और भय से बाहर निकलकर नई संभावनाओं की ओर छत्तीसगढ़

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के बदलते स्वरूप की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि राज्य नक्सलवाद और भय से मुक्त होकर प्रगति और संभावनाओं की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।

ऐसे बदलाव में शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। एम्स रायपुर जैसे संस्थान केवल उपचार केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे चिकित्सा शिक्षा, शोध और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से राज्य के भविष्य को आकार देने वाले संस्थान भी हैं।

युवा डॉक्टरों की नई पीढ़ी इस परिवर्तन की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है—एक ऐसी पीढ़ी जो आधुनिक चिकित्सा ज्ञान को मानवीय सरोकारों के साथ जोड़कर आगे बढ़े।

689 डिग्रियों के साथ शुरू हुआ सेवा का नया अध्याय

एम्स रायपुर के स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित तीसरे दीक्षांत समारोह में विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 16 पुरस्कार भी दिए गए।

लेकिन इन विद्यार्थियों के लिए यह अवसर केवल उपलब्धि का उत्सव नहीं था। डिग्री के साथ उनके पेशेवर जीवन की वह जिम्मेदारी भी शुरू हुई, जिसमें प्रत्येक मरीज उनके ज्ञान, निर्णय और संवेदनशीलता पर भरोसा करेगा।

चिकित्सा में उत्कृष्टता के साथ नैतिकता भी जरूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी युवा चिकित्सकों को चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ करुणा, नैतिकता, निवारक स्वास्थ्य, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

उन्होंने आयुष्मान भारत, PM-JAY, ABHA और e-Sanjeevani जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख करते हुए युवा चिकित्सा पेशेवरों की भूमिका को व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा।

एम्स रायपुर की बढ़ती पहचान

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने एम्स रायपुर की चिकित्सा शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और शोध के क्षेत्र में बढ़ती भूमिका की सराहना की। उन्होंने संस्थान की NIRF रैंकिंग में 36वें स्थान तथा Newsweek World’s Best Hospitals 2026 में पहचान का उल्लेख करते हुए इसकी बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को रेखांकित किया।

एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

डिग्री हाथ में, जिम्मेदारी कंधों पर

दीक्षांत समारोह में डिग्री पाने वाले युवा अब अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में नई भूमिका निभाएंगे। उनके सामने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की चुनौतियां होंगी, लेकिन साथ ही मरीजों की उम्मीदें भी होंगी।

उपराष्ट्रपति का संदेश इसी बिंदु पर सबसे अधिक महत्वपूर्ण बनता है—डॉक्टर की पहचान केवल उसकी विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगी कि वह अपने ज्ञान का इस्तेमाल किसके लिए और किस संवेदना के साथ करता है।

एम्स रायपुर से निकली यह नई चिकित्सा पीढ़ी यदि तकनीक की शक्ति को करुणा की संवेदना के साथ जोड़ती है, तो यह केवल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत नहीं करेगी, बल्कि उस नए भारत की तस्वीर भी बनाएगी जहां आधुनिक चिकित्सा और मानवीय सेवा साथ-साथ चलती हैं।

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