बस्तर में धमाकों की नहीं ; अब 'मन की बात' की गूंज

दंतेवाड़ा, 30 अगस्त। कभी नक्सली हिंसा और धमाकों के लिए पहचाने जाने वाले दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में रविवार को बदलाव की एक नई तस्वीर देखने को मिली। गांव के लोगों ने पूरे उत्साह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी सुनी। प्रधानमंत्री को सुनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए। उनके साथ वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी भी मौजूद रहे।

छिंदनार में ‘मन की बात’ सुनने को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह दिखाई दिया। कई ग्रामीणों के लिए यह पहला अवसर था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रेडियो पर सुना। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण पूरी तल्लीनता से प्रधानमंत्री का संदेश सुनते रहे।

कभी जहां नक्सली हिंसा के कारण ग्रामीणों को दहशत के माहौल में जीवन बिताना पड़ता था, वहीं अब वहां रेडियो पर प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ सुनने के लिए लोगों का एकत्र होना बस्तर में बदलते माहौल का संकेत माना जा रहा है। धमाकों की आवाज की जगह रेडियो की गूंज ने गांव में शांति और सामान्य जीवन की नई तस्वीर पेश की।

कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों ने कहा कि ‘मन की बात’ देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों, नवाचारों और बदलावों से लोगों को परिचित कराता है। इससे समाज और राष्ट्रहित में बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है तथा जनभागीदारी की भावना मजबूत होती है। ग्रामीणों ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ सहित देश की संस्कृति, विरासत और विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक प्रयासों की जानकारी भी मिलती है।

विकास की ओर बढ़ रहा बस्तर

छिंदनार में ग्रामीणों का ‘मन की बात’ सुनने के लिए जुटना बस्तर में बदलते हालात की एक झलक है। नक्सलवाद के प्रभाव से लंबे समय तक प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ गांवों तक सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकार का जोर नक्सल प्रभावित रहे दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने और ग्रामीणों को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर है। ऐसे में छिंदनार में ‘मन की बात’ सुनने के लिए ग्रामीणों का एकजुट होना बस्तर के बदलते सामाजिक वातावरण और सामान्य होते जनजीवन की तस्वीर पेश करता है।

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