दिल्ली से ये ख़बर आई है कि तथाकथित ‘जेन जी’ के नाम पर फैलाई जाने वाली अराजकता के विरुद्ध देश के युवा एक जुट हुए हैं।    दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव 2026 में ABVP ने अध्यक्ष,  सचिव और संयुक्त सचिव के तीन पदों पर जीत हासिल की। जबकि उपाध्यक्ष के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी। कांग्रेस और वामपंथी इकोसिस्टम के छात्र संगठन बेदम पिटे। चुनाव परिणामों ने ये बता दिया कि स्टूडेंट्स के बीच अराजकता को कोई स्थान नहीं है। देश की राजधानी से युवाओं की हुंकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत की असली युवा शक्ति किसी आयातित संबोधन की पहचान नहीं बल्कि विकसित भारत के संकल्प के प्रति हर क्षण प्रतिबद्ध  है। 

छात्रसंघ चुनाव का परिणाम

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की राजधानी में स्थित यह विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्र राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहां होने वाले छात्रसंघ चुनावों में विभिन्न छात्र संगठनों के बीच होने वाली प्रतिस्पर्धा के साथ शिक्षा, छात्र सुविधाएं, रोजगार, छात्रावास, कैंपस की व्यवस्थाएं और व्यापक सामाजिक मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा बनते हैं।इस बार के परिणाम में एबीवीपी ने तीन प्रमुख पदों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन एनएसयूआई का खाता ही नहीं खुला। परिणाम ने विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में संगठनात्मक ताकत, उम्मीदवारों की व्यक्तिगत स्वीकार्यता और स्वतंत्र उम्मीदवारों की भूमिका को लेकर भी एक अलग तस्वीर सामने रखी है। 

‘जेन जी’ के नाम पर

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में अराजकता,उपद्रव हिंसा को देश ने देखा ही है। तथाकथित ‘जेन जी’ शब्द को लेकर सार्वजनिक विमर्श में युवाओं की भूमिका पर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। कुछ राजनीतिक समूहों और उनके समर्थक वर्गों की ओर से युवा असहमति को व्यवस्था के प्रति टकराव और विरोध के व्यापक आख्यान से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। ऐसे में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव स्पष्ट घोषणा करता है कि देश के युवा राष्ट्रीय विचारों के साथ हैं। वो देश की समरसता और मूल्यों के साथ हैं। इन परिणामों के आलोक में हमें पश्चिम की ओर से  विभाजनकारी मंशा के शब्द  ‘जेन जी’ को समझना पड़ेगा। भारत का युवा ऐसी किसी शब्दावली से परिभाषित नहीं होता है। भारत की युवा शक्ति को केवल इस शब्दावली के दायरे में सीमित करना उसके व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भ को छोटा करना होगा। भारत का युवा केवल असहमति जताने वाला वर्ग नहीं है, वह शिक्षा, रोजगार, नवाचार, उद्यमिता, तकनीक, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रनिर्माण से जुड़ा विशाल जनसमूह है।


भारत की असली युवा शक्ति किसी आयातित संबोधन की मोहताज नहीं है, वह विकसित भारत के निर्माण के लिए अपने ज्ञान, श्रम, प्रतिभा और ऊर्जा को लगाने वाली पीढ़ी है। उसके सामने आधुनिक विज्ञान और तकनीक की चुनौतियां हैं तो साथ ही अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने का दायित्व भी है। इसलिए भारत की युवा शक्ति को केवल तथाकथित  ‘जेन जी’ के बनाए हुए खांचे में देखने के बजाय भारत की अपनी परिस्थितियों, आकांक्षाओं और विकास यात्रा के संदर्भ में समझना अधिक सार्थक होगा।

युवा शक्ति का अर्थ केवल विरोध नहीं

आज जब युवाओं को तथाकथित ‘जेन जी’ जैसे पीढ़ीगत संबोधनों में परिभाषित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, तब यह भी देखना जरूरी है कि भारत का युवा अपने भविष्य को किस व्यापक संदर्भ में देखता है। भारत की युवा शक्ति में विरोध और असहमति की लोकतांत्रिक भूमिका के साथ-साथ निर्माण, नवाचार, परिश्रम और जिम्मेदारी की भावना भी मौजूद है। विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार या किसी राजनीतिक संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, तकनीक, उद्योग, विज्ञान, स्टार्टअप, खेल और सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे करोड़ों भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए देश की युवा शक्ति को केवल किसी पश्चिमी लोकप्रिय शब्दावली से परिभाषित करना पर्याप्त नहीं हो सकता।

भारत का सशक्त युवा अपनी पहचान केवल नारों में नहीं, बल्कि अपने काम, प्रतिभा और राष्ट्रनिर्माण में भी स्थापित करता है. विज्ञान और संस्कार, आधुनिकता और परंपरा, तकनीक और सामाजिक जिम्मेदारी को साथ लेकर चलने वाली यही युवा ऊर्जा विकसित भारत की वास्तविक ताकत बन सकती है। दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनाव परिणाम इन्हीं बातों पर मुहर लगाते हैं कि देश का युवा सृजन के संकल्प के साथ है। राष्ट्रीयता के भाव के साथ भारत की सांस्कृतिक चेतना के साथ गतिमान है।  भारत का युवा विध्वंस नहीं बल्कि नवोन्मेष के साथ आगे बढ़ रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ये प्रचंड जीत , इस बात का प्रमाण है कि — भारत की युवा शक्ति किसी बहकावे में नहीं आने वाली है। उसके कंधों को विभाजनकारी राजनीति कभी भी हथियार नहीं बना सकती है। क्योंकि भारत की युवा तरुणाई ये जानती है कि उसका हित और अहित किसमे है। 

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