राम जन्मभूमि आंदोलन के पुरोधा के रूप में माननीय अशोक सिंहल जी की पहचान बनी है। उनके कार्यकाल में अमरनाथ आंदोलन, रामसेतु रक्षा आंदोलन, गंगा रक्षा, गौ रक्षा आदि आंदोलन के सफलतापूर्वक आयोजन के कारण, उनकी यह पहचान और सशक्त बनी। उनके व्यक्तित्व के कई और पहलुओं पर भी उनके संपर्क में आए, कई चिंतकों और कार्यकर्ताओं ने प्रकाश डाला है। माननीय अशोक जी युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा पुरुष के रूप में माने जाते रहे हैं। जब अशोक जी के पास संघ का दायित्व था, या, उसके बाद विश्व हिंदू परिषद का दायित्व आया, वे हमेशा युवाओं के प्रेरणा पुंज रहे। युवा शक्ति को प्रेरणा देना और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण का भाव जागृत करने का कार्य माननीय अशोक जी हमेशा करते रहे।

मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य 1977 में मिला, जब वे आपातकाल के बाद दिल्ली प्रांत के प्रांत प्रचारक बनकर आए। मेरे पास उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और चांदनी चौक की सायं शाखा का दायित्व था। मैं स्वयं उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय का विद्यार्थी भी था। माननीय अशोक जी की हार्दिक इच्छा थी कि दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में संघ कार्य होना चाहिए। उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय में 32-33 कॉलेज हुआ करते थे। माननीय अशोक जी की प्रेरणा से 23 कॉलेज में साप्ताहिक मिलन प्रारंभ हो गया।

वे स्वयं उन कॉलेजों के विद्यार्थियों की बैठक लेने का प्रयास करते थे। इन बैठकों में दिया गया मार्गदर्शन और प्रेरणा, आज भी उन युवाओं को स्फूर्ति प्रदान करती है। जो विद्यार्थी सायं शाखा में नहीं जा सके, उनके लिए विद्यार्थी प्रभात शाखाएं प्रारंभ करने का विचार उन्हीं का था। युवाओं को जोड़ने के विभिन्न प्रयोग करने के लिए माननीय अशोक जी दिशा देते थे और उनकी प्रेरणा से हुए प्रयोग हमेशा सफल भी होते थे।

1984 में राम जानकी रथ यात्रा संतों के आह्वान पर निकाली गई। उन यात्राओं को जिहादियों की धमकियां मिल रही थीं। उस समय की राजनीति मुस्लिम वोटों की दासी थी। उत्तर प्रदेश में जब यह यात्रा अयोध्या से लखनऊ के लिए चली, तब उस समय की उत्तर प्रदेश की सरकार ने इस यात्रा को सुरक्षा देने से मना कर दिया था। माननीय अशोक जी ने युवाओं का आह्वान किया और कहा भगवान राम के काम को पूरा करने का दायित्व बजरंगबली ने लिया था और वानर सेना ने इस दायित्व को पूरा किया था। आज यह दायित्व भारत का युवा पूर्ण करेगा और लखनऊ आते-आते युवाओं का एक बड़ा समूह यात्रा की सुरक्षा के लिए लग गया और बजरंग दल का गठन हो गया।

राम जन्मभूमि के सामने आने वाली हर चुनौती का सामना करने के लिए माननीय अशोक जी ने युवाओं को प्रेरणा दी। मुस्लिम समाज के द्वारा चाहे लॉन्ग मार्च का आयोजन हो या शार्ट मार्च का, उन सब का जवाब बजरंग दल ने दिया और वह कोई भी राष्ट्र विरोधी गतिविधि नहीं कर सके।

अयोध्या में युवा सम्मेलन कर युवाओं के विभिन्न चरण एकात्मता यात्रा, राम ज्योति यात्रा, या, चरण पादुका यात्रा के हर कार्यक्रम में युवाओं की सहभागिता बहुत बड़ी मात्रा में रही। उन युवाओं को प्रेरित करने का केंद्र मा. अशोक जी सिंहल ही रहे।

अशोक जी के आह्वान पर ही गौ रक्षा का दायित्व बजरंग दल स्वीकार करे, यह निर्णय किया गया और 1995 में प्रयाग के पावन तट पर "गाय नहीं काटने देंगे, देश नहीं बंटने देंगे" के संकल्प के साथ गौ रक्षा सम्मेलन हुआ। देशभर से एक लाख से अधिक युवक इस सम्मेलन में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की व्यवस्था करने वालों को इतनी संख्या पर विश्वास नहीं हो रहा था। संख्या 1 लाख से ज्यादा हो गई, तो यह व्यवस्थाएं चरमराई भी, लेकिन माननीय अशोक जी ने स्वयं खड़े होकर यह सुनिश्चित किया कि किसी भी युवक को भूखा न रहना पड़े, सबका पेट भरे और इसी का परिणाम हुआ कि इतनी अधिक संख्या में उपस्थित युवकों ने भूखा रहना मंजूर किया, लेकिन अनुशासन में रहते हुए किसी रेहड़ी वाले को भी परेशान नहीं किया।

इस समय अमरनाथ यात्रा को बाधित करने के लिए आतंकवादियों ने हिंदू समाज को चुनौती दी कि घर से आते समय सब अलविदा करके आएँ, क्योंकि वह वापस नहीं जा पाएंगे। माननीय अशोक जी ने कहा बजरंग दल को इस चुनौती का जवाब देना चाहिए और माननीय अशोक जी के आह्वान पर 50,000 से अधिक युवक अमरनाथ यात्रा पर गए और आतंकवादी निःशब्द रह गए। कोई इस यात्रा का विरोध नहीं कर सका और तब से यह यात्रा फलती-फूलती जा रही है। अब संख्या 10 लाख से ऊपर हो जाएगी, प्रशासन यह व्यवस्था करके चलता है।

युवकों को जोड़ने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग माननीय अशोक जी किया करते थे। यूथ फॉर नेशन के नाम से एक प्रयोग प्रारंभ किया गया, जिसमें पढ़े-लिखे और पेशेवर युवाओं को सम्मिलित किया गया। यह कार्य पूरे देश में फैला। इसी प्रकार उन्हें यह स्मरण था कि युवा शक्ति को समर्पण भाव के साथ आगे आने के लिए जब तक प्रेरित नहीं किया जाएगा, विश्व हिंदू परिषद के महान कार्यों को पूरा करने के लिए हमारे पास पर्याप्त शक्ति का अभाव रहेगा। उन्होंने युवाओं को आह्वान किया कि वह पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के रूप में अपना समय दें। सैकड़ों युवक पूर्णकालिक बनकर सामने आए, जिनको संपूर्ण देश में कार्य के विस्तार के लिए भेजा गया। माननीय अशोक जी के साथ बैठकर कभी जेनरेशन गैप, जिसे पीढ़ीगत अंतर कहा जा सकता है, महसूस नहीं हुआ। वे युवाओं में राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव भरने वाले कुशल शिल्पी भी थे। माननीय अशोक जी का उस समय दिया गया मार्गदर्शन, आज भी संदर्भिक है और उनसे प्रेरणा प्राप्त करके, आज भी देश के अंदर लाखों युवक समर्पण भाव से राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे हैं। माननीय अशोक जी के साथ बैठकर कभी जेनरेशन गैप, जिसे पीढ़ीगत अंतर कहा जा सकता है, महसूस नहीं हुआ। वे युवाओं में राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव भरने वाले कुशल शिल्पी भी थे।

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