बस्तर के 485 गांवों तक पहुंचेगी बारहमासी सड़क, 804 करोड़ से बनेंगी 263 सड़कें

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  • Oct 30, 2026
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नक्सलवाद से मुक्त इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी तेज

 754 और बसाहटों के लिए प्रस्ताव; 373 पुलों के निर्माण पर भी केंद्र का सकारात्मक रुख


जगदलपुर, 30 अक्टूबर 2026


नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए अब सड़क और पुलों का जाल बिछाने की तैयारी है। दीपावली से पहले केंद्र सरकार ने बस्तर संभाग की 485 बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के प्रस्तावों को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही 280 अन्य बसाहटों तक बारहमासी सड़क पहुंचाने के लिए 804.06 करोड़ रुपये की लागत से 263 सड़क निर्माण कार्यों के प्रस्ताव मिले हैं। इन सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर होगी। करीब 474 अन्य चिन्हित बसाहटों के लिए भी विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम गांवों को सड़क संपर्क देने की दिशा में केंद्र का यह सहयोग महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों की जरूरतों को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर विशेष पहल और नियमों में छूट देने का आग्रह किया था। शिवराज सिंह चौहान ने पत्र के माध्यम से सड़क-पुल निर्माण की प्रगति, स्वीकृत कार्यों, प्रस्तावित योजनाओं और विशेष छूट के अनुरोध पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के प्रति आभार जताया है।

1,168 बसाहटों में अलग-अलग चरणों में चल रही प्रक्रिया
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के अनुसार, बस्तर संभाग की कुल 1,168 बसाहटों में सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग चरणों में काम चल रहा है। इनमें 485 बसाहटों के सड़क कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के पहले बैच में 234 बसाहटों को सड़क से जोड़ने की मंजूरी मिली है। इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोंडागांव की 34 और सुकमा की 16 बसाहटें शामिल हैं।दूसरे बैच के तहत 280 बसाहटों को जोड़ने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनकी कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर और अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त करीब 474 अन्य चिन्हित बसाहटों के लिए डीपीआर तैयार किए जा रहे हैं।

सात जिलों की 754 बसाहटों को जोड़ने की तैयारी
पीएमजीएसवाई-4 के दूसरे बैच में बस्तर जिले की 114, बीजापुर की 125, दंतेवाड़ा की 63, कांकेर की 140, कोंडागांव की 31, नारायणपुर की 136 और सुकमा की 146 बसाहटों को सड़क सुविधा देने के प्रस्ताव शामिल हैं। इस तरह सातों जिलों की 754 बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए ग्रामीण सड़क सर्वे ऐप के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है और प्रस्तावों को गति शक्ति योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है।
इन सड़कों के बनने से अंदरूनी वनांचल के गांवों की स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, बाजारों और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। किसानों को उपज बाजार तक पहुंचाने, स्थानीय व्यापार बढ़ाने और ग्रामीणों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

373 पुलों के प्रस्तावों पर विचार, 55 लंबे पुलों की योजना
सड़क संपर्क के साथ नदी-नालों पर पुल निर्माण को भी गति देने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएमजीएसवाई-4 के पहले बैच के अंतर्गत 206 पुलों और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत 167 पुलों के प्रस्तावों पर विचार के लिए अधिकार प्राप्त समिति की बैठक हो चुकी है। इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति देने की बात कही गई है।
बस्तर संभाग के लिए 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। आगामी चरणों में पुल निर्माण की कार्ययोजना पर भी काम चल रहा है। दुर्गम नारायणपुर जिले में पीएम-जनमन के तहत 22 लंबे पुल बनाने के प्रस्ताव हैं। इनकी अनुमानित लागत करीब 87.45 करोड़ रुपये है। पुल बनने से बारिश के दौरान नदी-नालों में उफान के कारण गांवों का संपर्क टूटने की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।

100 से कम आबादी वाले गांवों के लिए नियमों में छूट की मांग
बस्तर के घने जंगलों और दूर-दूर तक फैली छोटी बसाहटों में कई गांव ऐसे हैं, जहां की आबादी 100 से भी कम है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मौजूदा जनसंख्या संबंधी मापदंडों के कारण ये गांव बारहमासी सड़क संपर्क की पात्रता से बाहर रह जाते हैं। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलवाद से मुक्त हुए ऐसे गांवों तक विकास पहुंचाने के लिए केंद्र से विशेष छूट देने का आग्रह किया है।
उन्होंने निर्धारित क्लस्टर की आबादी की गणना में छूट देने और 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी-छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क निर्माण की मंजूरी देने का सुझाव दिया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बस्तर की शेष पात्र बसाहटों की पहचान और सड़क संपर्क की जरूरतों का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (जीएसएस) ऐप के माध्यम से चार महीने का सर्वे शुरू किया गया है। क्लस्टर आधारित व्यवस्था और विशेष छूट के प्रस्ताव का परीक्षण सर्वे से मिले तथ्यों तथा लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जाएगा।

सड़क पहुंचेगी तो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के रास्ते खुलेंगे
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद का प्रभाव घटने के साथ विकास की नई संभावनाएं तेजी से आकार ले रही हैं। सरकार की प्राथमिकता उन गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और रोजगार की सुविधाएं पहुंचाना है, जहां वर्षों तक भय और असुरक्षा का माहौल रहा। उन्होंने कहा कि सड़क केवल दो स्थानों को जोड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है।
पक्की सड़क बनने से बच्चों की स्कूलों तक पहुंच आसान होगी, मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा और किसान अपनी उपज बाजार तक पहुंचा सकेंगे। सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ भी अंतिम छोर पर रहने वाले परिवारों तक पहुंचाना आसान होगा। इसी उद्देश्य से छोटी और दुर्गम बसाहटों के लिए विशेष छूट मांगी गई है, ताकि कम आबादी या कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कोई गांव सड़क सुविधा से वंचित न रहे।

केंद्र-राज्य के समन्वय से बदलेगी बस्तर की तस्वीर
विजय शर्मा ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताते हुए कहा कि बस्तर में सड़क और पुल निर्माण के प्रस्तावों पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सर्वेक्षण और आगे की कार्रवाई की जानकारी देना महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ अंचलों में विकास की नई राह खुलेगी। सरकार का संकल्प है कि नक्सलवाद से मुक्त होने वाले प्रत्येक गांव तक विकास पहुंचे। जहां कभी आवागमन कठिन था, वहां सड़कें बनेंगी, पुल दूरियां कम करेंगे और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र के निरंतर सहयोग से बस्तर संभाग के शेष पात्र गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से सड़क संपर्क से जोड़ा जा सकेगा और बस्तर को देश का सबसे विकसित जनजातीय संभाग बनाने का लक्ष्य पूरा होगा।

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