SRCC@100: 2013 के ‘पूरे गिलास’ से 2047 के विकसित भारत तक

 

जिस SRCC मंच पर 13 साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की संभावनाओं का सपना रखा था, उसी मंच से 2026 में उन्होंने आर्थिक बदलाव, डिजिटल क्रांति, Make in India और युवा भारत के नए आत्मविश्वास का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

 

नई दिल्ली | 5 सितंबर 2026

किसी देश की कहानी सिर्फ आंकड़ों में नहीं लिखी जाती। कभी-कभी उसकी कहानी एक गिलास में भी दिखाई देती है—आधा भरा, आधा खाली या पूरा भरा हुआ।करीब 13 साल पहले श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के मंच से प्रधानमंत्री ने भारत को इसी गिलास के रूपक से देखने की कोशिश की थी। देश मुश्किल आर्थिक दौर से गुजर रहा था। महंगाई, करंट अकाउंट डेफिसिट, औद्योगिक सुस्ती, भ्रष्टाचार और नीति-गतिरोध जैसी खबरें सार्वजनिक विमर्श पर हावी थीं। तब  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि गिलास को अधूरा देखने के बजाय उसकी संभावनाओं को देखना चाहिए।

5 सितंबर 2026 को SRCC के शताब्दी समारोह में वही मंच एक बार फिर सामने था। फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार सामने एक सवाल था—13 साल पहले जिस भारत का सपना देखा गया था, वह आज कहां खड़ा है?

प्रधानमंत्री  मोदी ने अपने पुराने भाषण को याद किया और मौजूदा भारत की तस्वीर को अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, विनिर्माण, रक्षा, बुनियादी ढांचे और युवाओं की महत्वाकांक्षाओं के जरिए सामने रखा।

 

100 साल का SRCC: एक कॉलेज नहीं, पीढ़ियों की फैक्ट्री

SRCC की कहानी दरियागंज के एक छोटे से स्थान से शुरू हुई और एक ऐसे संस्थान तक पहुंची, जिसने देश की अनेक पीढ़ियों को शिक्षा, नेतृत्व और पेशेवर जीवन के लिए तैयार किया।

शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने संस्थापक सर श्रीराम को श्रद्धांजलि देते हुए संस्थान की विरासत को याद किया।

उनके शब्दों में, 100 वर्ष का कोई संस्थान सिर्फ अनुभवों का भंडार नहीं होता; वह उपलब्धियों और प्रेरणाओं का महासागर बन जाता है।

SRCC के पूर्व छात्रों ने अर्थव्यवस्था से लेकर राजनीति, कानून, न्यायपालिका, कला और सार्वजनिक जीवन तक अपनी पहचान बनाई है। समारोह इसी विरासत और नई पीढ़ी के बीच एक सेतु की तरह दिखाई दिया।

2013 बनाम 2026: बदलते भारत की कहानी

2013 में प्रधानमंत्री ने जिस समय SRCC को संबोधित किया था, तब देश की आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं।

उनके अनुसार, उस दौर की खबरों में शामिल थे—

GDP ग्रोथ के अनुमान में कमी

रिकॉर्ड स्तर पर करंट अकाउंट डेफिसिट

करीब 10 प्रतिशत महंगाई

औद्योगिक क्षेत्र में मंदी

भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप

आतंकी घटनाएं और सुरक्षा चुनौतियां

उनका तर्क था कि उस दौर में निराशा का माहौल था, लेकिन संभावनाएं तब भी मौजूद थीं।

2026 में उसी तर्क को उन्होंने एक नए फ्रेम में रखा—भारत ने मुश्किलों के बावजूद अपनी क्षमता को कैसे विस्तार दिया।

7.8% ग्रोथ: आंकड़े से आगे की कहानी

प्रधानमंत्री ने हाल की तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ का उल्लेख करते हुए इसे बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत की मजबूती का संकेत बताया।

उन्होंने बिजली उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत वृद्धि, वाहनों की बिक्री में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी और स्टील-सीमेंट खपत में करीब 8 प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया।

इन आंकड़ों का इस्तेमाल उन्होंने एक बड़ी तस्वीर बनाने के लिए किया—जहां आर्थिक विकास का असर बिजली, परिवहन, निर्माण, आवास और औद्योगिक गतिविधियों में भी दिखाई देता है।

भारत की आर्थिक गतिविधि: कुछ प्रमुख आंकड़े

7.8%
तिमाही GDP ग्रोथ

~9%
बिजली उत्पादन में वृद्धि

20%+
वाहनों की बिक्री में वृद्धि

~8%
स्टील और सीमेंट खपत में वृद्धि

जनधन से UPI तक: जब बैंक खाता डिजिटल क्रांति का आधार बना

आज की युवा पीढ़ी के लिए मोबाइल से भुगतान करना सामान्य बात है। लेकिन कुछ वर्ष पहले देश की बड़ी आबादी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी।

प्रधानमंत्री ने इसी अंतर को जनधन योजना के संदर्भ में रेखांकित किया।

उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में जनधन योजना के तहत करीब 60 करोड़ नए बैंक खाते खुले हैं।

यही व्यापक बैंकिंग पहुंच आगे चलकर भारत की डिजिटल और फिनटेक क्रांति की आधारभूमि बनी।

एक बैंक खाता, एक डिजिटल पहचान और मोबाइल—इन तीनों के मेल ने भारत में वित्तीय सेवाओं के इस्तेमाल का तरीका बदल दिया।

यानी जनधन सिर्फ बैंक खाते खोलने की योजना नहीं रही; यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार का एक महत्वपूर्ण आधार बनी।

Make in India: बाजार से मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर

2013 के भाषण में भारत में निर्माण क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया था।

2026 में प्रधानमंत्री ने मोबाइल फोन उद्योग का उदाहरण सामने रखा।

उनके मुताबिक, 2014 में भारत मोबाइल फोन के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर था। आज भारत में निर्मित स्मार्टफोन दुनिया के विभिन्न बाजारों तक पहुंच रहे हैं और देश का मोबाइल निर्यात ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

यह बदलाव सिर्फ मोबाइल फोन की कहानी नहीं है।

यह उस बड़े सवाल से जुड़ा है कि क्या भारत दुनिया की सप्लाई चेन में सिर्फ एक उपभोक्ता के रूप में रहेगा या निर्माता और निर्यातक के रूप में अपनी जगह बनाएगा?

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग: आयातक से निर्यातक बनने की कहानी

रक्षा क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता की दिशा में हुए बदलाव का उल्लेख किया।

उन्होंने रक्षा उपकरणों के आयात को कम करने के लिए बनाई गई नकारात्मक सूचियों और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की प्रक्रिया का जिक्र किया।

उनके अनुसार—

करीब ₹2 लाख करोड़

भारत का रक्षा उत्पादन

करीब ₹40 हजार करोड़

रक्षा निर्यात

2013-14 में रक्षा निर्यात का आंकड़ा करीब 600-700 करोड़ रुपये बताया गया था।

यह बदलाव एक बड़े औद्योगिक इकोसिस्टम के निर्माण की ओर संकेत करता है, जिसमें भारतीय कंपनियां रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर में गति: दशकों का काम, वर्षों में

भारत की विकास यात्रा में सिर्फ नई परियोजनाएं ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। महत्वपूर्ण यह भी है कि उन्हें कितनी तेजी से पूरा किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने रेलवे विद्युतीकरण का उदाहरण दिया।

1925 में भारत में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चली। लेकिन उनके अनुसार 2014 तक 90 वर्षों में भी 30 प्रतिशत से कम रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण हुआ था।

इसके बाद के 12 वर्षों में करीब-करीब 100 प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण का दावा किया गया।

यह उदाहरण उनके भाषण में नीति-निर्णय की गति का प्रतीक बनकर सामने आया।

UPI से सेमीकंडक्टर तक: ‘क्यों?’ से ‘क्यों नहीं?’ तक

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में एक खास मानसिकता का जिक्र किया—हर नई परियोजना के सामने यह सवाल खड़ा करना कि “इसकी जरूरत क्या है?”

उन्होंने Statue, High-Speed Train, UPI, सेमीकंडक्टर निर्माण, नई संसद और राष्ट्रीय स्मारकों जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया।

उनके संदेश का सार था:

अगर कोई काम देश के भविष्य के लिए जरूरी है, तो केवल इसलिए उसे नहीं रोका जा सकता कि उसकी उपयोगिता पर तत्काल सवाल उठ रहे हैं।

यहां से भाषण का आर्थिक विमर्श एक मानसिकता के विमर्श में बदल जाता है।

एक ऐसा भारत, जो सिर्फ वर्तमान जरूरतों के बारे में न सोचे बल्कि भविष्य की क्षमता तैयार करे।

अगली पीढ़ी का भारत: नौकरी खोजने से अवसर बनाने तक

SRCC के युवाओं से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने बदलती भारतीय युवा आकांक्षाओं को भाषण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

आज का युवा—

Startup करना चाहता है।
Unicorn बनाना चाहता है।
AI में काम करना चाहता है।
Space और drones में अवसर तलाश रहा है।
Agriculture innovation करना चाहता है।

यह बदलाव सिर्फ युवाओं की सोच में नहीं है। इसके पीछे ऐसा इकोसिस्टम तैयार होने की कोशिश है, जिसमें पूंजी, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बाजार और नीतिगत समर्थन उपलब्ध हो।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को इससे भी बड़ा लक्ष्य दिया—भारतीयों द्वारा बनाई गई कंपनियां दुनिया की अग्रणी कंपनियों का नेतृत्व क्यों नहीं कर सकतीं?

विकसित भारत: लक्ष्य अब छोटा नहीं

भाषण का सबसे बड़ा कैनवास विकसित भारत का विज़न था।

प्रधानमंत्री ने आने वाले भारत के लिए कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखे—

Manufacturing Hub

भारत को वैश्विक विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना।

Research & Innovation Hub

नई तकनीक और शोध के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व।

Agriculture Export Superpower

कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका को और मजबूत करना।

अपना Space Station

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षा को अगले स्तर तक ले जाना।

Global Sporting Power

भविष्य में ऐसे ओलंपिक की मेजबानी करना, जिसे पूरी दुनिया याद रखे।

ये लक्ष्य केवल सरकार की योजनाओं का विषय नहीं हैं। इनकी सफलता उद्योग, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक समुदाय, स्टार्टअप और सबसे बढ़कर युवाओं की भागीदारी पर निर्भर करेगी।

SRCC की कैंपस लाइफ से दुनिया की बड़ी जिम्मेदारियों तक

प्रधानमंत्री ने भाषण को सिर्फ नीतियों और आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा।

उन्होंने SRCC की छात्र जिंदगी को भी याद किया—कैंपस की चाय, कोल्ड कॉफी, परीक्षा से पहले नोट्स और प्रिंटआउट की भाग-दौड़, Crossroads और Business Conclave जैसी गतिविधियां।

लेकिन कैंपस से बाहर की दुनिया में चुनौतियां अलग हैं।

वहां हर नया विचार स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहां आलोचना होगी, विरोध होगा और सवाल भी उठेंगे।

युवाओं के सामने चुनौती यही है कि वे केवल यह पूछने वाली पीढ़ी न बनें कि “यह क्यों नहीं हो सकता?”

बल्कि वे यह पूछने वाली पीढ़ी बनें—

“यह क्यों नहीं हो सकता?”

SRCC Crest: सूरज और जहाज का संदेश

भाषण के अंतिम हिस्से में SRCC के कॉलेज क्रेस्ट का उल्लेख आया।

क्रेस्ट में मौजूद उगता सूरज और समुद्र में आगे बढ़ता जहाज—दोनों मिलकर एक खूबसूरत रूपक बनाते हैं।

सूरज दिशा दिखाता है।
जहाज उस दिशा में आगे बढ़ता है।

यही रूपक भारत की विकास यात्रा पर भी लागू किया गया।

दिशा स्पष्ट हो।
लक्ष्य बड़ा हो।
संकल्प मजबूत हो।
और रास्ते की बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ने का साहस बना रहे।

100 साल पीछे नहीं, अगले 100 साल आगे

SRCC का शताब्दी समारोह मूलतः अतीत का उत्सव था, लेकिन प्रधानमंत्री के संबोधन की नजर भविष्य पर थी।

2013 में इसी मंच से भारत की संभावनाओं की बात हुई थी। 2026 में उसी मंच से उन संभावनाओं के आधार पर एक बदले हुए भारत की तस्वीर पेश की गई।

लेकिन असली कहानी यहां खत्म नहीं होती।

क्योंकि अगले 100 वर्षों का SRCC और अगले 25 वर्षों का भारत—दोनों की कहानी आज के युवाओं को लिखनी है।

वे युवा जो आज कैंपस में अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं, कल कंपनियां बनाएंगे, संस्थान खड़े करेंगे, शोध करेंगे, नीतियां बनाएंगे और दुनिया के बाजारों में भारतीय कंपनियों को नेतृत्व दे सकते हैं।

यही इस शताब्दी समारोह का सबसे बड़ा संदेश है—

सपना बड़ा होना चाहिए।
संकल्प अपना होना चाहिए।
दिशा स्पष्ट होनी चाहिए।
और मंजिल—विकसित भारत।

SRCC ने अपने पहले 100 वर्षों में पीढ़ियां तैयार की हैं।

अब उसके अगले 100 वर्षों की कहानी और भारत के अगले अध्याय की कहानी—शायद एक ही सवाल से शुरू होगी:

क्या हम केवल बदलते भारत के गवाह बनेंगे, या उसे बदलने वाली पीढ़ी बनेंगे?

वंदे मातरम्।

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