दिव्यांगजन सशक्तिकरण की नई नीति पर भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यशाला

भोपाल। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 को लागू हुए एक दशक पूरा हो चुके हैं । ऐसे में समय की आवश्यकता के हिसाब से दिव्यांगजन सशक्तिकरण, अधिकारों और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन भोपाल स्थित पलाश रेसीडेंसी में किया गया। न्यायालय आयुक्त दिव्यांगजन, मध्य प्रदेश और साइटसेवर्स संस्था के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में प्रदेश की प्रस्तावित नई दिव्यांगजन नीति में व्यापक प्रतिनिधित्व और समावेशन सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यशाला में इस बात पर विमर्श किया गया कि कानून के माध्यम से दिव्यांगजन सशक्तिकरण और कल्याण का अब तक का सफर कैसा रहा, वर्तमान में कौन-सी चुनौतियां सामने हैं और भविष्य की नीति को अधिक समावेशी एवं प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है। विशेष रूप से यह सवाल प्रमुख रहा कि समावेशन क्या वास्तव में इतना सरल है और नई नीति में समाज के सभी वर्गों एवं विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं का प्रतिनिधित्व किस प्रकार सुनिश्चित किया जाए।

कार्यक्रम में सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, आयुक्त सामाजिक न्याय के.जी. तिवारी, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष प्रो. राजीव दीक्षित, राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के सदस्य भूषण पुनियानी तथा साइटसेवर्स के डीपीओ जतिन तिवारी सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

मध्य प्रदेश में इन दिनों नई दिव्यांगजन नीति तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में दिव्यांगता से जुड़े विभिन्न पक्षों पर पांच अलग-अलग सत्रों में चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने शिक्षा, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा, अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत व्यवस्था और नीति निर्माण में दिव्यांगजनों की भागीदारी जैसे विषयों पर सुझाव दिए।

कार्यशाला में कटनी के ब्रजकिशोर पाल, आजीविका मिशन के ओमप्रकाश, सहायक संचालक सुरेश कुमार कुशवाहा, नीति आयोग की प्रतिनिधि कोमल मिश्रा, राजेंद्र कोरी (कटनी), प्रीति सोनी (भोपाल), अजमेर पाल (शिवपुरी), आर.जी. सोनी (खंडवा) तथा राज्य शिक्षा केंद्र के प्रमोद कुशवाहा समेत अन्य प्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण सुझाव रखे।

कार्यशाला के अंतिम सत्र को केंद्रीय दिव्यांगजन आयुक्त एस. गोविंद राजू ने मध्य प्रदेश के आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया के साथ वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने दिव्यांगजन अधिकार कानून के क्रियान्वयन से जुड़े व्यावहारिक पक्षों और जमीनी स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया।

कार्यशाला का संयोजन साइटसेवर्स की ताशा महंता ने किया, जबकि मीनाक्षी पटेल ने आभार प्रदर्शन किया।

कार्यशाला में सामने आए सुझाव मध्य प्रदेश की प्रस्तावित नई दिव्यांगजन नीति को अधिक सहभागी, अधिकार-आधारित और व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार प्रदान कर सकते हैं।

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