‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, तीजा-पोरा में रंगा मुख्यमंत्री निवास

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा- आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका, आपका अपने भाई के घर आना मेरे लिए सौभाग्य की बात

शिव-पार्वती की पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना, ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ

माताओं-बहनों को दिलाई सुपोषण की शपथ, सुपोषण रथ को दिखाई हरी झंडी; महतारी वंदन की 31 किस्तों में 20 हजार करोड़ से अधिक की राशि खातों में पहुंचने की जानकारी

13.50 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों से मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ी गांव का परिवेश

रायपुर, 12 सितंबर 2026। तीजा-पोरा के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास शनिवार को छत्तीसगढ़ के एक बड़े मायके में तब्दील हो गया। प्रदेशभर से पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत करते हुए कहा, “आज मेरा घर आप सभी बहनों का मायका है।” लोकगीतों, नृत्य, फुगड़ी, रस्साकशी, झूलों और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी सजावट के बीच मुख्यमंत्री निवास में गांव के उत्सव का जीवंत स्वरूप नजर आया। इसी अवसर पर ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ हुआ।

‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, मुख्यमंत्री निवास में उल्लास से मना तीजा-पोरा तिहार

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मीयता से उनका स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से बहनें उनके घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज सभी बहनों का मायका है। उन्होंने कहा कि अपने भाई के घर बहनों का आना उनके लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस संबोधन पर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।

तीजा-पोरा माटी, परिवार और लोकजीवन से जुड़ा पर्व

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ की माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली तीज-त्योहारों की श्रृंखला सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। लोक परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना से हुई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

उन्होंने कहा कि तीजा माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा पर्व है। वहीं पोरा छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। खेती-किसानी यहां केवल आजीविका नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है।

‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान की शुरुआत

तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के बेहतर पोषण में उपयोगी हो सकती हैं।

उन्होंने प्रदेशवासियों से अपने घरों और आसपास मुनगा लगाने तथा इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से घर-घर मुनगा लगाने की पहल सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत करेगी।

राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ रवाना

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का भी शुभारंभ किया। उन्होंने पोस्टर का विमोचन कर माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई और सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उन्होंने बताया कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां होंगी। सुपोषण रथ अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को पोषण संबंधी जानकारी देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए लगातार काम कर रही हैं।

नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने बच्चों की माताओं से संवाद कर उनके स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी भी ली।

तीजा-पोरा के पारिवारिक उत्सव के बीच अन्नप्राशन संस्कार ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा।

महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किस्तों के जरिए 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग महिलाएं बेटियों के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा करने से लेकर सिलाई मशीन खरीदने, सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे व्यवसाय शुरू करने तक में कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। महिलाओं को आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था। यह उपलब्धि महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़कर महिलाएं ‘डीलर दीदी’ बन रही हैं, जबकि निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रही हैं। खेती में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर ‘ड्रोन दीदी’ आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।

उन्होंने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की महिलाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां माताओं-बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति की आस्था, सामूहिकता और दृढ़ संकल्प का उदाहरण बताया।

संपत्ति में स्वामित्व से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने में भागीदारी देना है। सरकार इसी व्यापक सोच के साथ माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम कर रही है।

हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर देने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूरे किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों को मंजूरी दी गई है। सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे।

एक आंगन में दिखा पूरा छत्तीसगढ़

तीजा-पोरा तिहार के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौनों और ग्रामीण परिवेश के बीच लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने वातावरण को छत्तीसगढ़ी रंग में रंग दिया।

माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से हिस्सा लिया। मेहंदी और झूलों का भी आनंद लिया। मुख्यमंत्री निवास का पूरा परिसर ऐसा नजर आया, मानो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में उतर आई हों।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास वास्तव में माताओं-बहनों के मायके में बदल गया है। उन्होंने प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिलने, परिवारों में सुख-समृद्धि बने रहने और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास की कामना की।

तीजा मातृशक्ति और परंपराओं का पर्व : लक्ष्मी राजवाड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।

राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए माताओं-बहनों से घरों और आसपास मुनगा लगाने तथा इसे नियमित आहार में शामिल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मंत्री गजेंद्र यादव, मंत्री दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, महापौर मीनल चौबे, वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में माताएं-बहनें मौजूद रहीं।

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